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डीटीपी की कार्रवाई से परेशान उद्यमी मिले सांसद संजय भाटिया से, छोटे उद्योगों को नियमित करने की मांग की
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पानीपत के उद्योगों को नियमित करने की मांग को लेकर पानीपत इडस्ट्रीयल एसोसिएशन के पदाधिकारी राकेश चुघ प्रधान के नेतृत्व में रविवार को सांसद संजय भाटिया से उनके आवास पर मिले। यहां उद्यमियों ने मुख्यमंत्री मनोहरलाल के नाम मांग पत्र सौंपा। उद्यमियों ने सांसद को बताया कि पानीपत में हजारों की संख्या में छोटे उद्योगों में लाखों श्रमिक काम कर रहे हैं। जो उद्योग नियमित नहीं हैं, उन पर जिला नगर योजनाकार विभाग और नगर निगम की तलवार लटकी रहती है। इससे भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलता है। इसलिये प्रदेश सरकार द्वारा नई औद्योगिक नीति बनाकर इन उद्योगों को नियमित किया जाए। इसके लिए सभी उद्यमी सरकार द्वारा तय की गई उचित फीस भी भरने को तैयार हैं। उन्होंने बताया कि यही उद्योग पीएम नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल बनाने में सहयोग देंगे।
उद्यमियों ने कहा कि जिन फैक्टरियों का निर्माण कार्य पूरा होकर उनमें माल बनाने का कार्य चल रहा है उनको तोड़ा नहीं जाए और बिना मंजूरी के नई फैक्टरी नहीं बनाने दी जाए। सांसद संजय भाटिया ने एसोसिएशन के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया कि जो भी फैक्टरी चालू हालत में तो उसे टूटने नहीं दिया जाएगा। इस बारे में वे मुख्यमंत्री से बात करेंगे। सांसद ने बताया कि छोटे उद्योगों को नियमित करने के लिए सरकार स्कीम निकाले के प्रयास में है। वहीं सांसद संजय भाटिया व एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने पानीपत के उद्यमियों से भी अपील की कि वे बिना मंजूरी के नई फैक्टरी प बनाएं।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों में प्रधान राकेश चुघ सहित प्रवीन वर्मा उपप्रधान, जुगल अरोड़ा सचिव, महेंद्र मैहता, बरसत रोड़ एसोसिएशन के प्रधान भीम सचदेवा, हरीश गुलाटी आदि मौजूद रहे। वहीं भाजपा नेता एवं उद्योगपति नवीन भाटिया, पार्षद लोकेश नागरू, तरूण गांधी, मनीश जावा आदि भी मौजूद रहे।
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पानीपत में हैं तीस हजार अनियमित उद्योग
शहर के सेक्टर 29 पार्ट वन पार्ट टू, सेक्टर 25 पार्ट वन पार्ट टू, मॉडल टाउन ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में पांच हजार उद्योग हैं जो नियमित हैं। इसके अलावा शहर के कुटानी रोड, सनौली रोड, नूर वाला, देशराज कॉलोनी, राजीव कॉलोनी, विद्यानंद कॉलोनी, हरि सिंह नगर, बलजीत नगर, असंध रोड, खटीक बस्ती, दीवान नगर जगन्नाथ विहार समेत तमाम कॉलोनियों में तीस हजार से अधिक छोटे उद्योग हैं। यह उद्योग रिहायशी क्षेत्र में हैं। इसीलिए इनको सरकार की ओर से अप्रूवल नहीं मिली है।
पाकिस्तान से आने के बाद उद्यमियों ने लगाई थी खड्ड़ी : चुग
देश के विभाजन के बाद उद्यमियों ने पानीपत में हैंडलूम का काम शुरू किया था। यह काम खड्डी लगाकर शुरू किया गया था। शहर विकसित हुआ तो वह खड्ड़ी रिहायशी क्षेत्र में आ गई। सरकार ने बाद में उद्योगों के लिए इंडस्ट्रियल एरिया बना दिया, लेकिन वह उद्योग शहर के अंदर ही रह गए। अब उद्यमियों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह उद्योगों को बाहर नहीं निकाल सकते, क्योंकि सरकार के पास इतनी भूमि नहीं है।
राकेश चुघ, प्रधान पानीपत इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन
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उद्यमियों ने कहा कि जिन फैक्टरियों का निर्माण कार्य पूरा होकर उनमें माल बनाने का कार्य चल रहा है उनको तोड़ा नहीं जाए और बिना मंजूरी के नई फैक्टरी नहीं बनाने दी जाए। सांसद संजय भाटिया ने एसोसिएशन के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया कि जो भी फैक्टरी चालू हालत में तो उसे टूटने नहीं दिया जाएगा। इस बारे में वे मुख्यमंत्री से बात करेंगे। सांसद ने बताया कि छोटे उद्योगों को नियमित करने के लिए सरकार स्कीम निकाले के प्रयास में है। वहीं सांसद संजय भाटिया व एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने पानीपत के उद्यमियों से भी अपील की कि वे बिना मंजूरी के नई फैक्टरी प बनाएं।
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एसोसिएशन के पदाधिकारियों में प्रधान राकेश चुघ सहित प्रवीन वर्मा उपप्रधान, जुगल अरोड़ा सचिव, महेंद्र मैहता, बरसत रोड़ एसोसिएशन के प्रधान भीम सचदेवा, हरीश गुलाटी आदि मौजूद रहे। वहीं भाजपा नेता एवं उद्योगपति नवीन भाटिया, पार्षद लोकेश नागरू, तरूण गांधी, मनीश जावा आदि भी मौजूद रहे।
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पानीपत में हैं तीस हजार अनियमित उद्योग
शहर के सेक्टर 29 पार्ट वन पार्ट टू, सेक्टर 25 पार्ट वन पार्ट टू, मॉडल टाउन ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में पांच हजार उद्योग हैं जो नियमित हैं। इसके अलावा शहर के कुटानी रोड, सनौली रोड, नूर वाला, देशराज कॉलोनी, राजीव कॉलोनी, विद्यानंद कॉलोनी, हरि सिंह नगर, बलजीत नगर, असंध रोड, खटीक बस्ती, दीवान नगर जगन्नाथ विहार समेत तमाम कॉलोनियों में तीस हजार से अधिक छोटे उद्योग हैं। यह उद्योग रिहायशी क्षेत्र में हैं। इसीलिए इनको सरकार की ओर से अप्रूवल नहीं मिली है।
पाकिस्तान से आने के बाद उद्यमियों ने लगाई थी खड्ड़ी : चुग
देश के विभाजन के बाद उद्यमियों ने पानीपत में हैंडलूम का काम शुरू किया था। यह काम खड्डी लगाकर शुरू किया गया था। शहर विकसित हुआ तो वह खड्ड़ी रिहायशी क्षेत्र में आ गई। सरकार ने बाद में उद्योगों के लिए इंडस्ट्रियल एरिया बना दिया, लेकिन वह उद्योग शहर के अंदर ही रह गए। अब उद्यमियों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह उद्योगों को बाहर नहीं निकाल सकते, क्योंकि सरकार के पास इतनी भूमि नहीं है।
राकेश चुघ, प्रधान पानीपत इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन