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नमक से बंजरभूमि भूमि में फिर लहलहाई फसलें, 17 मिलियन टन का अतिरिक्त उत्पादन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 02:07 AM IST
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Crops growing again in barren land with salt, additional production of 17 million tonnes
केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल।
देव शर्मा
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करनाल। शहर में राष्ट्रीय स्तर का केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) एक मार्च 1969 में स्थापित किया गया था। जिस पर देश की 6.73 मिलियन हेक्टेयर लवणता एवं क्षारीयता प्रभावित भूमि को फिर से उपजाऊ बनाने की जिम्मेदारी है। संस्थान ने पिछले 53 साल के प्रयासों के तहत अब तक 2.1 मिलियन हेक्टेयर लवण प्रभावित भूमि को फिर हरा भरा बनाकर देश के खाद्यान्न उत्पादन में 17 मिलियन टन अतिरिक्त खाद्य उत्पादन का इजाफा किया है। इसके अलावा देश को लवणरोधी 22 फसल प्रजातियां देकर क्रांतिकारी प्रयास किया है। देश और विदेश में अपनी सुगंध के लिए पहचान बना चुकी सीएसआर 30 बासमती भी इसी संस्थान की देन हैं, जिसने पिछले दो दशकों में अब तक करीब 24 हजार करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा अर्जित कर देश के खजाने में इजाफा किया है।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि संस्थान ने लवणता प्रभावित भूमि को सुधार के लिए तीन विशेष तकनीक शुरू की। जिसमें एक जिप्सम पैकेज, लवण प्रतिरोधी फसल प्रजातियां व भूमिगत जलनिकासी (एसएसडी) शामिल हैं। इसमें अब एक और तकनीक को जोड़ा गया है, जिसे लैंड सेपिंग कहा गया है। इससे पश्चिम बंगाल जैसे ऐसे क्षेत्र जहां 1400 मिली तक बारिश रिकॉर्ड होती है वहां कामर्शियल डिजाइनिंग शुरू की है, वहां धान के अलावा सब्जियों के उत्पादन में क्रांतिकारी कदम उठाए जाने शुरू कर दिए हैं, जिससे वहां का जीवन स्तर बदलने लगा है।
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काछवा रोड पर जहां संस्थान बना है, उसके निकटस्थ गांव का नाम वीरान था, लवणता अधिक होने के कारण क्षेत्र बंजर होकर वीरान हो गया था। लेकिन संस्थान के प्रयासों से यहां फसलें लहलहा रही हैं, गांव का नाम भी अब जरीफा वीरान हो चुका है। काछवा का नाम यहां कछुओं की अधिकता के कारण ही पड़ा। यहां भी कभी ऊसर जमीन में कछुओं का राज था लेकिन अब यह समृद्ध इलाका हो चुका है। इसी तरह देश में कई स्थानों पर नमक की अधिकता के कारण वीरान हो चुकी भूमि पर संस्थान की तकनीक से ही हरी भरी फसलें लहलहा रही हैं। संस्थान ने 2001 में सीएसआर 30 बासमती किस्म रिलीज की थी। इसके अलावा गेहूं की पांच, धान की 11, सरसों की पांच व चने की एक लवणरोधी फसल प्रजाति तैयार कर देश को दी है।
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डॉ. अनिल कुमार, प्रधान वैज्ञानिक सामाजिक विज्ञान अनुसंधान सीएसएसआरआई
देश में 6.73 मिलियन हेक्टेयर भूमि लवण प्रभावित है, जिसमें से 2.1 मिलियन हेक्टेयर (21 लाख हेक्टेयर) को सुधार कर उसमें हर साल करीब 17 मिलियन टन का अतिरिक्त फसलोत्पादन शुरू हो गया है। हरियाणा, पंजाब का भी इसमें बड़ा भूभाग शामिल है। संस्थान द्वारा विकसित लवणरोधी प्रजातियों से ऐसी भूमि पर फसलें लहलहाने लगी हैं। भूमि सुधार के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस समय हरियाणा के कई जिलों में किसानों से लवण प्रभावित जमीन के सुधार के लिए पंजीकरण कराया जा रहा है। अब इसके लिए जिलास्तर पर राज्य सरकारों की सहायता से प्लानिंग करके भूमि सुधार के प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

डॉ. प्रबोधचंद्र शर्मा, निदेशक सीएसएसआरआई करनाल
सीएसएसआरआई का स्थापना दिवस समारोह आज
संस्थान के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी अनिल शर्मा ने बताया कि सीएसएसआरआई का 54वां स्थापना दिवस समारोह तीन मार्च को संस्थान के डॉ. डीआर भंबला सभागार में सुबह 11 बजे से आयोजित किया जाएगा। जिसमें चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।
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