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Panipat News: गंभीर मरीजों को 31 से मिल सकेंगी वेंटिलेटर की सेवाएं
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पानीपत। स्वास्थ्य विभाग जीवनदायिनी वेंटिलेटर का अब इस्तेमाल कर सकेगा। गंभीर रोगियों को 31 जुलाई से वेंटिलेटर की सेवाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी। चार साल से वेंटिलेटर स्टोर रूम में बंद थे। यह वेंटिलेटर कोरोना काल में भी इस्तेमाल नहीं हो पाए थे। वेंटिलेटर के अभाव में जिला नागरिक अस्पताल से गंभीर रोगी रेफर कर दिए जाते थे।
उल्लेखनीय है कि आईसीयू व डॉक्टरों के प्रशिक्षण में अभाव में चार साल से लगभग तीन करोड़ के 29 वेंटिलेटर कबाड़ बने रहे। इनमें से छह वेंटिलेटर आईसीयू व दो वेंटिलेटर एसएनसीयू वार्ड में इंस्टॉल किए गए हैं, बाकी 21 वेंटिलेटर को स्टोर रूम में बैकअप के तौर पर रखा गया है। एक वेंटिलेटर की कीमत लगभग 10 लाख रुपये है। यह वेंटिलेटर पीएम केयर फंड, मुख्यमंत्री केयर फंड व उद्यमियों की ओर से मिले थे। अब जबकि आईसीयू वार्ड तैयार है और वेंटिलेटर संचालित करने के लिए डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ऐसे में गंभीर रोगियों को 31 जुलाई से वेंटिलेटर की सेवाएं मिलना शुरू हो जाएंगी।
वेंटिलेटर के अभाव में जिला नागरिक अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड से एक जनवरी से 30 मार्च तक 80 बच्चों को रेफर कर दिया गया था। 10 बच्चों की वेंटिलेटर की कमी से मौत भी हो गई थी। जब मुख्यालय से फटकार पड़ी तो अप्रैल में दो वेंटिलेटर एसएनसीयू वार्ड में इंस्टॉल किए गए थे। समालखा से बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भावना को जिला नागरिक अस्पताल में डेपुटेशन पर लाया गया। वह वेंटिलेटर संचालित करने में सक्षम है। अब एसएनसीयू वार्ड का रेफर 21 प्रतिशत से घटकर सात प्रतिशत पर आ गया है।
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वेंटिलेटर चलाने के लिए डाॅक्टरों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
डॉक्टरों को सरकार की ओर से समय रहते वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण नहीं दिया गया। इसलिए वेंटिलेटर चार साल तक स्टोर रूप में कबाड़ की तरह पड़े रहे। अब आईसीयू में वेंटिलेटर संचालन के लिए तीन डॉक्टरों समेत आठ स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला नागरिक अस्पताल में दो डॉक्टरों के पास ही वेंटिलेटर चलाने का अनुभव है।
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अब छह बेड का आईसीयू बनाने की मिली अनुमति
पानीपत, रोहतक व अंबाला में 31 जुलाई तक आईसीयू वार्ड तैयार करना है। पानीपत को छह बेड का आईसीयू बनाने की अनुमति मिली है। इसलिए छह वेंटिलेटर इंस्टॉल किए गए हैं। अगर एक मरीज के इलाज के दौरान वेंटिलेटर में कोई खराबी आती है तो बाकी वेंटिलेटर को बैकअप के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
वर्जन-
आईसीयू वार्ड की प्रभारी डॉ. कविता ने बताया कि फिलहाल आईसीयू में छह वेंटिलेटर इंस्टॉल किए गए हैं। बाकी वेंटिलेटर को बैकअप के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। एनसीयू वार्ड में दो वेंटिलेटर लगाए गए हैं। अस्पताल के सभी वेंटिलेटर वर्किंग में है। सभी वेंटिलेटर की जांच हो चुकी है।
वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि वेंटिलेटर को अब आईसीयू व एसएनसीयू वार्ड में इस्तेमाल किया जा रहा है। भविष्य में यह क्रिटिकल केयर ब्लॉक व पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट में इस्तेमाल में लिया जाएगा। वेंटिलेटर का बैकअप में होना भी जरूरी है।
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उल्लेखनीय है कि आईसीयू व डॉक्टरों के प्रशिक्षण में अभाव में चार साल से लगभग तीन करोड़ के 29 वेंटिलेटर कबाड़ बने रहे। इनमें से छह वेंटिलेटर आईसीयू व दो वेंटिलेटर एसएनसीयू वार्ड में इंस्टॉल किए गए हैं, बाकी 21 वेंटिलेटर को स्टोर रूम में बैकअप के तौर पर रखा गया है। एक वेंटिलेटर की कीमत लगभग 10 लाख रुपये है। यह वेंटिलेटर पीएम केयर फंड, मुख्यमंत्री केयर फंड व उद्यमियों की ओर से मिले थे। अब जबकि आईसीयू वार्ड तैयार है और वेंटिलेटर संचालित करने के लिए डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ऐसे में गंभीर रोगियों को 31 जुलाई से वेंटिलेटर की सेवाएं मिलना शुरू हो जाएंगी।
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वेंटिलेटर के अभाव में जिला नागरिक अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड से एक जनवरी से 30 मार्च तक 80 बच्चों को रेफर कर दिया गया था। 10 बच्चों की वेंटिलेटर की कमी से मौत भी हो गई थी। जब मुख्यालय से फटकार पड़ी तो अप्रैल में दो वेंटिलेटर एसएनसीयू वार्ड में इंस्टॉल किए गए थे। समालखा से बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भावना को जिला नागरिक अस्पताल में डेपुटेशन पर लाया गया। वह वेंटिलेटर संचालित करने में सक्षम है। अब एसएनसीयू वार्ड का रेफर 21 प्रतिशत से घटकर सात प्रतिशत पर आ गया है।
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वेंटिलेटर चलाने के लिए डाॅक्टरों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
डॉक्टरों को सरकार की ओर से समय रहते वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण नहीं दिया गया। इसलिए वेंटिलेटर चार साल तक स्टोर रूप में कबाड़ की तरह पड़े रहे। अब आईसीयू में वेंटिलेटर संचालन के लिए तीन डॉक्टरों समेत आठ स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला नागरिक अस्पताल में दो डॉक्टरों के पास ही वेंटिलेटर चलाने का अनुभव है।
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अब छह बेड का आईसीयू बनाने की मिली अनुमति
पानीपत, रोहतक व अंबाला में 31 जुलाई तक आईसीयू वार्ड तैयार करना है। पानीपत को छह बेड का आईसीयू बनाने की अनुमति मिली है। इसलिए छह वेंटिलेटर इंस्टॉल किए गए हैं। अगर एक मरीज के इलाज के दौरान वेंटिलेटर में कोई खराबी आती है तो बाकी वेंटिलेटर को बैकअप के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
वर्जन-
आईसीयू वार्ड की प्रभारी डॉ. कविता ने बताया कि फिलहाल आईसीयू में छह वेंटिलेटर इंस्टॉल किए गए हैं। बाकी वेंटिलेटर को बैकअप के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। एनसीयू वार्ड में दो वेंटिलेटर लगाए गए हैं। अस्पताल के सभी वेंटिलेटर वर्किंग में है। सभी वेंटिलेटर की जांच हो चुकी है।
वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि वेंटिलेटर को अब आईसीयू व एसएनसीयू वार्ड में इस्तेमाल किया जा रहा है। भविष्य में यह क्रिटिकल केयर ब्लॉक व पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट में इस्तेमाल में लिया जाएगा। वेंटिलेटर का बैकअप में होना भी जरूरी है।