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वर्दीधारियों ने कानून की जानकारी से खाकी को किया दागदार
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Fri, 08 Jan 2016 11:56 PM IST
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सीआईए-टू के चूरापोस्त की हेराफेरी में सस्पेंड चारों थानेदारों ने कानून की जानकारी का पूरा फायदा उठाया और चारों ने पुलिस रिमांड से बचने के लिए फर्द इंसाफ पर साइन नहीं किए। थानेदारों ने साइन करने से पहले वकीलों से बात करने की शर्त रखी थी। जिस कारण अदालत ने पुलिस की रिमांड की मांग को नहीं माना। पुलिस सोमवार को सेशन कोर्ट में थानेदारों के रिमांड की मांग करेगी।
थाना शहर पुलिस ने गिरफ्तार सीआईए-टू के एसआई जयबीर सिंह, एसआई देवेंद्र, एएसआई नरेश व एएसआई कृष्ण को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया। चारों ने कोर्ट में जाकर अपने वकील की राय अनुसार साइन करने की बात रखी। वकीलों ने फर्द इंसाफ पर साइन करने से मना कर दिया। चारों ने वकीलों की सलाह अनुसार फई इंसाफ पर साइन नहीं किए। जिसके चलते चारों का रिमांड मंजूर नहीं किया जा सका। कोर्ट ने चारों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
परिजनों ने लगा दी अग्रिम जमानत अजीऱ्र्जी
सीआईए-टू के चारों थानेदारों के परिजनों ने भी अपनी पैरवी रखने का पूरा प्रयास किया। उन्होंने शुक्रवार को चारों की अग्रिम जमानत की अर्जी लगा दी। उस वक्त किसी के कानों में चारों के गिरफ्तार होने की बात नहीं थी। कोर्ट में परिजनों को लताड़ लगने के बाद मामला खुलकर सामने आया। जिसके बाद पुलिस ने भी चारों की गिरफ्तारी को सार्वजनिक करना पड़ा।
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चारों ने ऐसे खेला चूरापोस्त का खेल
सीआईए-टू पानीपत ने 24 दिसंबर को बसेड़ा निवासी सुदेश उर्फ बाबा के घर से 22 क्विंटल चूरापोस्त व तीन किलोग्राम अफीम बरामद की थी। टीम ने उसी दिन समालखा से एक ट्रक से नो क्विंटल चूरा पोस्ट ओर बरामद की थी। चारों थानेदारों ने मुख्य आरोपी सुदेश उर्फ बाबा से 30 लाख रुपये में मामला तय कर लिया और चूरापोस्त तस्करी मामले से निकाल दिया। चारों ने उक्त चूरापोस्त व अफीम में से 22 क्विंटल चूरापोस्त व डेढ़ किलोग्राम अफीम पकड़े गए ट्रक बरामद होना दिशा दी। आरोपी थानेदारों ने डेढ़ क्विंटल अफीम को खुर्दबुर्द कर दिया। उच्च अधिकारियों की नजर मामले पर पड़ी तो थाना पुलिस ने 26 दिसंबर को एक अन्य ट्रक से कुछ चूरापोस्त पकड़ा दिखा दिया। जिसमें सुदेश उर्फ बाबा को गिरफ्तार कर लिया।
यह है मामला
सीआईए-टू स्टाफ पानीपत ने 24 दिसंबर को समालखा के गांव बसेडा से ट्रक से 22 किलोग्राम चूरापोस्त व डेढ़ किलोग्राम अफीम बरामद दिखाई थी। चूरापोस्त की कीमत एक करोड़ से आंकी गई थी। पुलिस ने बताया था कि मामले का मुख्य आरोपी कपूरथला का अवतार सिंह है। अवतार सिंह ढाबों पर चूरापोस्त की सप्लाई करता था। सीआईए टू की इस कामयाबी पर समालखा के डीएसपी गौरखपाल राणा ने सीआईए टू को बधाई भी दी थी। मामले पर आईजी की स्पेशल स्टॉफ की नजर पड़ते ही आईजी ने तुरंत कार्रवाई की।
आईजी ने सीआईए-टू प्रभारी इंस्पेक्टर दीपक कुमार, साइबर सैल इंचार्ज होशियार सिंह समेत पूरे थाने को 31 दिसंबर को लाइन हाजिर कर दिया था। इस मामले में पहले डीएसपी समालखा गोरखपाल राणा को जांच सौंपी गई, लेकिन मामले में उन पर भी शक हुआ और उनसे जांच वापस ले ली। वहीं फरार चारों थानेदारों की जांच भी डीएसपी क्राइम जोगिंद्र राठी से ले ली थी। इस पूरे मामले की जांच को कमेटी गठित की थी।
अमर उजाला ने शुरू में ही उठाए थे पुलिस कर्मियों पर सवाल
अमर उजाला की माई सिटी टीम ने शुरू से ही सीआईए टू के थानेदारों पर सवाल उठाती है। टीम ने उस दिन ही पुलिस ने सवालिया निशान लगा दिए थे। जिस दिन आईजी ने सीआईए टू के पूरे थाने को लाइन हाजिर किया था। माई सिटी की टीम ने पुलिस की जांच से पुलिस की बरामदगी तक सवाल दागे थे। माई सिटी की टीम ने पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर रखी है।
बाकी पुलिस कर्मियों की भी बढ़ी धड़कन
सीआईए-टू के चार थानेदारों की पोल खुलने के बाद बाकी सीआईए टू कर्मियों की भी धड़कने बढ़ गई है। मामले में शक की सुई एक तरफ रुकने की बजाय हर किसी की तरफ घूम रही है। चारों थानेदारों को गिरफ्तार करने और उन पर 15 धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होने से लाइन हाजिर सभी पुलिस कर्मियों की धड़कने बढ़ गई है।
डीएसपी पर इसलिए शक
डीएसपी समालखा गोरखपाल राणा पर उठे सवाल गंभीर हैं। मामले के अनुसार सीआईए-टू ने पूरा मामला समालखा थाना क्षेत्र के अंतर्गत पकड़ा। डीएसपी ने मामले को पूरी तरह से जानने का प्रयास नहीं किया या फिर सब कुछ जानकर भी नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने सीआईए-टू के पकड़े गए मामले को ही अधिकारियों के सामने रख दिया। फिलहाल आईजी ने उनकी विभागीय जांच शुरू कराने की सिफारिश डीजीपी को की है।
थाना शहर पुलिस ने गिरफ्तार सीआईए-टू के एसआई जयबीर सिंह, एसआई देवेंद्र, एएसआई नरेश व एएसआई कृष्ण को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया। चारों ने कोर्ट में जाकर अपने वकील की राय अनुसार साइन करने की बात रखी। वकीलों ने फर्द इंसाफ पर साइन करने से मना कर दिया। चारों ने वकीलों की सलाह अनुसार फई इंसाफ पर साइन नहीं किए। जिसके चलते चारों का रिमांड मंजूर नहीं किया जा सका। कोर्ट ने चारों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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परिजनों ने लगा दी अग्रिम जमानत अजीऱ्र्जी
सीआईए-टू के चारों थानेदारों के परिजनों ने भी अपनी पैरवी रखने का पूरा प्रयास किया। उन्होंने शुक्रवार को चारों की अग्रिम जमानत की अर्जी लगा दी। उस वक्त किसी के कानों में चारों के गिरफ्तार होने की बात नहीं थी। कोर्ट में परिजनों को लताड़ लगने के बाद मामला खुलकर सामने आया। जिसके बाद पुलिस ने भी चारों की गिरफ्तारी को सार्वजनिक करना पड़ा।
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चारों ने ऐसे खेला चूरापोस्त का खेल
सीआईए-टू पानीपत ने 24 दिसंबर को बसेड़ा निवासी सुदेश उर्फ बाबा के घर से 22 क्विंटल चूरापोस्त व तीन किलोग्राम अफीम बरामद की थी। टीम ने उसी दिन समालखा से एक ट्रक से नो क्विंटल चूरा पोस्ट ओर बरामद की थी। चारों थानेदारों ने मुख्य आरोपी सुदेश उर्फ बाबा से 30 लाख रुपये में मामला तय कर लिया और चूरापोस्त तस्करी मामले से निकाल दिया। चारों ने उक्त चूरापोस्त व अफीम में से 22 क्विंटल चूरापोस्त व डेढ़ किलोग्राम अफीम पकड़े गए ट्रक बरामद होना दिशा दी। आरोपी थानेदारों ने डेढ़ क्विंटल अफीम को खुर्दबुर्द कर दिया। उच्च अधिकारियों की नजर मामले पर पड़ी तो थाना पुलिस ने 26 दिसंबर को एक अन्य ट्रक से कुछ चूरापोस्त पकड़ा दिखा दिया। जिसमें सुदेश उर्फ बाबा को गिरफ्तार कर लिया।
यह है मामला
सीआईए-टू स्टाफ पानीपत ने 24 दिसंबर को समालखा के गांव बसेडा से ट्रक से 22 किलोग्राम चूरापोस्त व डेढ़ किलोग्राम अफीम बरामद दिखाई थी। चूरापोस्त की कीमत एक करोड़ से आंकी गई थी। पुलिस ने बताया था कि मामले का मुख्य आरोपी कपूरथला का अवतार सिंह है। अवतार सिंह ढाबों पर चूरापोस्त की सप्लाई करता था। सीआईए टू की इस कामयाबी पर समालखा के डीएसपी गौरखपाल राणा ने सीआईए टू को बधाई भी दी थी। मामले पर आईजी की स्पेशल स्टॉफ की नजर पड़ते ही आईजी ने तुरंत कार्रवाई की।
आईजी ने सीआईए-टू प्रभारी इंस्पेक्टर दीपक कुमार, साइबर सैल इंचार्ज होशियार सिंह समेत पूरे थाने को 31 दिसंबर को लाइन हाजिर कर दिया था। इस मामले में पहले डीएसपी समालखा गोरखपाल राणा को जांच सौंपी गई, लेकिन मामले में उन पर भी शक हुआ और उनसे जांच वापस ले ली। वहीं फरार चारों थानेदारों की जांच भी डीएसपी क्राइम जोगिंद्र राठी से ले ली थी। इस पूरे मामले की जांच को कमेटी गठित की थी।
अमर उजाला ने शुरू में ही उठाए थे पुलिस कर्मियों पर सवाल
अमर उजाला की माई सिटी टीम ने शुरू से ही सीआईए टू के थानेदारों पर सवाल उठाती है। टीम ने उस दिन ही पुलिस ने सवालिया निशान लगा दिए थे। जिस दिन आईजी ने सीआईए टू के पूरे थाने को लाइन हाजिर किया था। माई सिटी की टीम ने पुलिस की जांच से पुलिस की बरामदगी तक सवाल दागे थे। माई सिटी की टीम ने पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर रखी है।
बाकी पुलिस कर्मियों की भी बढ़ी धड़कन
सीआईए-टू के चार थानेदारों की पोल खुलने के बाद बाकी सीआईए टू कर्मियों की भी धड़कने बढ़ गई है। मामले में शक की सुई एक तरफ रुकने की बजाय हर किसी की तरफ घूम रही है। चारों थानेदारों को गिरफ्तार करने और उन पर 15 धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होने से लाइन हाजिर सभी पुलिस कर्मियों की धड़कने बढ़ गई है।
डीएसपी पर इसलिए शक
डीएसपी समालखा गोरखपाल राणा पर उठे सवाल गंभीर हैं। मामले के अनुसार सीआईए-टू ने पूरा मामला समालखा थाना क्षेत्र के अंतर्गत पकड़ा। डीएसपी ने मामले को पूरी तरह से जानने का प्रयास नहीं किया या फिर सब कुछ जानकर भी नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने सीआईए-टू के पकड़े गए मामले को ही अधिकारियों के सामने रख दिया। फिलहाल आईजी ने उनकी विभागीय जांच शुरू कराने की सिफारिश डीजीपी को की है।