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Panipat News: सीपीसीबी ने प्रदूषण मापक यंत्र लगाने के लिए कंपनी की तय, दबाव में उद्यमी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 15 Apr 2026 03:00 AM IST
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CPCB decides to install pollution measuring device for company, entrepreneurs under pressure
पानीपत। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने वायु गुणवत्ता मानक को सख्त कर दिया है। बाेर्ड ने इसके लिए देशभर में डिवाइस उपलब्ध कराने के लिए कंपनी तय की है। उद्यमियों को 31 अगस्त तक नए डिवाइस लगाने होंगे। इन आदेश पर उद्यमी उलझकर रह गए हैं। खासकर डाइंग उद्यमियों को परेशानी हो रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले अमेरिका के टैरिफ और अब पश्चिमी एशिया में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में निर्यात कम हो गया है और नए ऑर्डर भी नहीं मिल पा रहे हैं। उद्यमियों पर प्रदूषण रोकने के लिए नए डिवाइस लगाने का दबाव बना हुआ है। इन सबके बीच बोर्ड के नोटिस भी आना शुरू हो गए हैं।
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जिले में करीब 37 हजार औद्योगिक इकाइयां हैं। यहां टेक्सटाइल के उत्पाद और इनकी रीढ़ डाई हाउस बड़े स्तर पर हैं। उद्यमियों ने अपनी इकाइयाें में ओसीईएमएस डिवाइस लगा रखा है। इसके माध्यम से प्रदूषण का डेटा सीधे सीपीसीबी और एचएसपीसीबी को दिया जाता है। सीपीसीबी ने अधिकृत कंपनियों से ही उपकरण (ओसीईएम, बैग फिल्टर व जेनरेटर किट ) लगवाने की अनिवार्यता कर दी है। हैंडलूम एक्सपोर्टर मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा ने बताया कि उद्यमी नए डिवाइस लगाकर थक चुके हैं। पहले पेट कोक बंद किया और फिर जेनरेटर की किट बदलवाई। अब कंपनी ही तय कर दी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तय एक कंपनी और सामान्य कंपनी में एक ही डिवाइस के रेट में दो से तीन गुना का अंतर है। बोर्ड द्वारा तय कंपनियों में डिवाइस के रेट अधिक हैं। इसका पालन उद्योगों के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण बन रही है। बोर्ड द्वारा स्वीकृत कंपनियों से पुरानी और बड़ी कंपनियों के नाम शामिल नहीं हैं।
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एसपीएम की सीमा भी घटी

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (निलंबित कणकीय पदार्थ) (एसपीएम ) की सीमा कम कर दी है। पहले यह 800 थी। इसे फिर 80 किया गया और अब 50 करने का नोटिफिकेशन जारी किया है। डायर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रधान भीम राणा ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में इसे लागू करना व्यावहारिक नहीं है। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि पुराने फिल्टर में बाईपास किया जा सकता है। फिल्टर बैग फट जाए या उसकी सिलाई कमजोर हो जाए तो धूल बाहर निकल जाती हैं। एक छोटा सा छेद भी उत्सर्जन को ऊपर ले जा सकता है। इसके अलावा धूल जमा होने से ये पुराने फिल्टर अपनी कार्यक्षमता खो देते हैं। इससे चिमनी से धुएं का गुबार निकलता है।
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उद्यमियों ने ये भी की हैं मांग
-सीपीसीबी कंपनी तय करने की बजाय डिवाइस तय करें। इसमें भी एक समय निर्धारित किया जाए

-प्रत्येक औद्योगिक क्षेत्र में में कॉमन बॉयलर स्थापित किया जाए

-लघु एवं अति लघु उद्योगों को कुछ मानकों में छूट दी जाए

-प्रदूषण के पैरामीटर पूरे देश में एक समान किए जाए

-पर्यावरण मानकों को कम से कम अगले पांच वर्षों के लिए स्थिर रखा जाए। ताकि उद्योग उन्हें प्रभावी रूप से लागू कर सके

-पिछले आठ वर्षों से लंबित जेडएलडी (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज) परियोजना को जल्द लागू किया जाए


वर्जन :
सीपीसीबी के नए आदेश धरातल पर व्यावहारिक नहीं हैं। देश की चुनिंदा कंपनी के नाम देना ठीक नहीं है। इनके रेट में दो से तीन गुना तक रेट का अंतर है। कंपनी मांग बढ़ने पर रेट भी बढ़ा सकती है।

नितिन अरोड़ा, प्रधान, पानीपत डायर्स एसोसिएशन।

वर्जन :
वायु गुणवत्ता मानक के लिए नए डिवाइस लगाने होंगे। इसके लिए पंजीकरण कराया जा रहा है। सरकार द्वारा इन उपकरणों पर सब्सिडी भी दी जा सकती है। इन डिवाइस को 31 अगस्त तक लगाया जाना है।
कुलदीप, एसडीओ, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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