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नगर निगम में पहले नक्शे की तो अब टेंडर की फाइल की गुम
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नगर निगम में गुम फाइल के दस्तावेज दिखाता ठेकेदार।
- फोटो : panipat
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नगर निगम में लगातार नक्शे और टेंडर की फाइल गुम हो रही हैं। निगम में लगातार दूसरी बार फाइल खो गई, जिससे निगम के अधिकारियों की लापरवाही लगातार सामने आ रही है। कूड़ेदान रिपेयर के लिए तीन साल पहले टेंडर लगाया गया था, जिसकी आधी कीमत ठेकेदार को मिल चुकी है, लेकिन ठेकेदार पूरी कीमत लेने के लिए निगम के चक्कर काट रहा है। हालांकि ठेकेदार के पास लागत के सभी दस्तावेज पूरे हैं, लेकिन जब भी वह अधिकारियों के पास पैसे लेने के लिए जाता है तो अधिकारी अपनी फाइलों को खंगालने लगते है और अंत में कहते है कि फाइल खो गई, अब तुम्हारे पैसे नहीं मिलेंगे। उन्होंने अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि जानबूझ कर फाइल गुम की गई है ताकि वह पैसे को अपने कब्जे में ले सकें।
नगर निगम ने कूड़ेदान रिपेयर के लिए सन 2016 में एक टेंडर लगाया गया था, जिसकी कीमत 5 लाख 97 हजार रुपये थी, जिसका ठेका नरेश कुमार ठेकेदार को दिया गया था। इस टेंडर की समय अविधि चार से छह माह के बीच रखी गई थी। ठेकेदार ने समय अविधि के बीच में निगम से 2.5 लाख रुपये तो ले लिए है, लेकिन बाकि 2.87 लाख रुपये निगम पर बकाया रह गई थी। टेंडर पूरा होने के बाद ठेकेदार ने जेई एमई से पैसे मांगे तो उन्होंने कहा कि अभी पैसे आए नहीं है, जब पैसे आ जा जाएंगे तो तुम्हें निगम में बुला लिया जाएगा, लेकिन दो साल गुजर जाने के बाद जब निगम से फोन नहीं आया तो उन्होंने खुद जाकर निगम से बचे हुए पैसे मांगे, लेकिन उन्होंने फाइल ढूंढ़ने का हवाला देते हुए एक फिर बाद में आने के लिए कहा। ठेकेदार ने कहा कि वह सैकड़ों बार जेई अजय कुमार, एमई अजीत गर्ग के पास सैकड़ों बार जा चुका हूं लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इंजीनियरों ने ठेकेदार से कहा कि निगम से फाइल नंबर 349 गुम हो गई है, फाइल को स्वीपर के हाथ ढूंढ़ वाया जाएगा, फिर उसके बाद ही पैसे मिल पाएंगे। ठेकेदार ने आरोप लगाया कि नगर निगम से फाइल गुम होना अधिकारियों की लापरवाही व भ्रष्टाचार की तरफ इशारा कर रही है। जानकारी के लिए ता दें कि नगर निगम से लगातार यह दूसरी फाइल घुम हुई है, जिसका जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ निगम के अधिकारी है।
इससे पहले भी आ चुके है फाइल गुम व टेंडर में घोटाला करने के मामले :
1. पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह ने प्रैस वार्ता कर निगम के अधिकारियों पर आनलाइन टेंडर में घोटाला कर अपने चहेते ठेकेदार को 60 लाख रुपये का फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया था। हालांकि उस टेंडर को बाद में रद्द कर दिया गया, लेकिन निगम के अधिकारियों को भ्रष्टाचार करने के आरोप लगे थे। उन्होंने कहा था कि जेई एमई, एसई एक्सईएन ने मिलकर अपने चहेते ठेकेदार विवेक को टेंडर दिया था। प्रेसवार्ता में उन्होंने तथ्य दिखाते हुए ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने की मांग की थी, लेकिन अभी तक ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट नहीं किया गया था, जिसके बाद पूर्व मेयर ने सीएम विंडो पर शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।
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2. वार्ड आठ के पार्षद पति विजय सहगल ने भी उनके वार्ड में चल रहे 45 लाख 10 हजार के विकास कार्यों के वर्कआर्डर की फाइल गुम करने का आरोप लगया था। जिसका अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने खुद निगम में जाकर फाइल चेक की थी, लेकिन फाइल नहीं मिली। इस मामले में अभी तक वह फाइल नहीं मिल पाई है, जबकि अधिकारी बता रहे है कि फाइल को ढूंढा जा रही है, मिलते ही पार्षद को सूचित किया जाएगा।
3. हाल ही में सामने आए ठेकेदार नरेश कुमार ने अधिकारियों की पोल खोल दी है। अधिकारी 2.5 लाख रुपये में घोटाला करने की सोच रहे है। ठेकेदार नके बताया है कि अधिकारी उसे तीन साल से निगम के चक्कर कटवा रहे है। कभी फाइल ढूंढ़ने का तो कभी फाइल गुम करने की बात से गुमराह कर रहे है। इससे साफ साफ स्पष्ट हो रहा है कि निगम के अधिकारी पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे है।
4. होस्ट वेस्ट के साथ बन रही दुकानों को निगम के अधिकारियों ने अवैध बताते हुए नोटिस दिया था। जबकि दुकान मालिक ने नक्शा पास करवा कर फाइल जमा करवा दी थी। उन्होंने निगम पर आरोप लगाया था कि निगम के अधिकारियों ने जानबूझ कर फाइल गुम की है ताकि वह दोबारा नक्शा पास ना करवा सके और यह जमीन निगम के अधिकारी अपने कब्जे में ले लें।
प्रशासानिक अधिकारियों ने भी किया भ्रष्टाचार, ऑफिस बदलने में की फाइल गुम
नगर निगम के अलावा अन्य विभागों में भी जानबूझकर फाइल गुम की गई है, जिनका हवाला ऑफिस बदलने का दिया गया है। उदाहरण के तौर पर हुडा ने कुछ साल पहले निशानदेही की थी, जिसकी उन्होंने सीढी भी बनाई थी, लेकिन घोटाला करने के लिए व अवैध कब्जों की मात्रा को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने कहा कि ऑफिस बदलने के कारण सीडी व फाइलें गुम हो गई है। वहीं डीसी कार्यालय से भी समालखा के निजी कॉलेज की सीएलयू की फाइल गुम हो गई थी। आयुक्त नगर निगम, पानीपत ओम प्रकाश ने कहा कि मेरे संज्ञान में अभी यह मामला आया है, जल्द ही फाइल को ढूंढ़वाया जाएगा। ठेकेदार से मिलकर इस मामले की जांच करवाई जाएगी, ताकि उनको बचे हुए पैसे वापिस मिल सके।
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नगर निगम ने कूड़ेदान रिपेयर के लिए सन 2016 में एक टेंडर लगाया गया था, जिसकी कीमत 5 लाख 97 हजार रुपये थी, जिसका ठेका नरेश कुमार ठेकेदार को दिया गया था। इस टेंडर की समय अविधि चार से छह माह के बीच रखी गई थी। ठेकेदार ने समय अविधि के बीच में निगम से 2.5 लाख रुपये तो ले लिए है, लेकिन बाकि 2.87 लाख रुपये निगम पर बकाया रह गई थी। टेंडर पूरा होने के बाद ठेकेदार ने जेई एमई से पैसे मांगे तो उन्होंने कहा कि अभी पैसे आए नहीं है, जब पैसे आ जा जाएंगे तो तुम्हें निगम में बुला लिया जाएगा, लेकिन दो साल गुजर जाने के बाद जब निगम से फोन नहीं आया तो उन्होंने खुद जाकर निगम से बचे हुए पैसे मांगे, लेकिन उन्होंने फाइल ढूंढ़ने का हवाला देते हुए एक फिर बाद में आने के लिए कहा। ठेकेदार ने कहा कि वह सैकड़ों बार जेई अजय कुमार, एमई अजीत गर्ग के पास सैकड़ों बार जा चुका हूं लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इंजीनियरों ने ठेकेदार से कहा कि निगम से फाइल नंबर 349 गुम हो गई है, फाइल को स्वीपर के हाथ ढूंढ़ वाया जाएगा, फिर उसके बाद ही पैसे मिल पाएंगे। ठेकेदार ने आरोप लगाया कि नगर निगम से फाइल गुम होना अधिकारियों की लापरवाही व भ्रष्टाचार की तरफ इशारा कर रही है। जानकारी के लिए ता दें कि नगर निगम से लगातार यह दूसरी फाइल घुम हुई है, जिसका जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ निगम के अधिकारी है।
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इससे पहले भी आ चुके है फाइल गुम व टेंडर में घोटाला करने के मामले :
1. पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह ने प्रैस वार्ता कर निगम के अधिकारियों पर आनलाइन टेंडर में घोटाला कर अपने चहेते ठेकेदार को 60 लाख रुपये का फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया था। हालांकि उस टेंडर को बाद में रद्द कर दिया गया, लेकिन निगम के अधिकारियों को भ्रष्टाचार करने के आरोप लगे थे। उन्होंने कहा था कि जेई एमई, एसई एक्सईएन ने मिलकर अपने चहेते ठेकेदार विवेक को टेंडर दिया था। प्रेसवार्ता में उन्होंने तथ्य दिखाते हुए ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने की मांग की थी, लेकिन अभी तक ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट नहीं किया गया था, जिसके बाद पूर्व मेयर ने सीएम विंडो पर शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।
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2. वार्ड आठ के पार्षद पति विजय सहगल ने भी उनके वार्ड में चल रहे 45 लाख 10 हजार के विकास कार्यों के वर्कआर्डर की फाइल गुम करने का आरोप लगया था। जिसका अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने खुद निगम में जाकर फाइल चेक की थी, लेकिन फाइल नहीं मिली। इस मामले में अभी तक वह फाइल नहीं मिल पाई है, जबकि अधिकारी बता रहे है कि फाइल को ढूंढा जा रही है, मिलते ही पार्षद को सूचित किया जाएगा।
3. हाल ही में सामने आए ठेकेदार नरेश कुमार ने अधिकारियों की पोल खोल दी है। अधिकारी 2.5 लाख रुपये में घोटाला करने की सोच रहे है। ठेकेदार नके बताया है कि अधिकारी उसे तीन साल से निगम के चक्कर कटवा रहे है। कभी फाइल ढूंढ़ने का तो कभी फाइल गुम करने की बात से गुमराह कर रहे है। इससे साफ साफ स्पष्ट हो रहा है कि निगम के अधिकारी पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे है।
4. होस्ट वेस्ट के साथ बन रही दुकानों को निगम के अधिकारियों ने अवैध बताते हुए नोटिस दिया था। जबकि दुकान मालिक ने नक्शा पास करवा कर फाइल जमा करवा दी थी। उन्होंने निगम पर आरोप लगाया था कि निगम के अधिकारियों ने जानबूझ कर फाइल गुम की है ताकि वह दोबारा नक्शा पास ना करवा सके और यह जमीन निगम के अधिकारी अपने कब्जे में ले लें।
प्रशासानिक अधिकारियों ने भी किया भ्रष्टाचार, ऑफिस बदलने में की फाइल गुम
नगर निगम के अलावा अन्य विभागों में भी जानबूझकर फाइल गुम की गई है, जिनका हवाला ऑफिस बदलने का दिया गया है। उदाहरण के तौर पर हुडा ने कुछ साल पहले निशानदेही की थी, जिसकी उन्होंने सीढी भी बनाई थी, लेकिन घोटाला करने के लिए व अवैध कब्जों की मात्रा को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने कहा कि ऑफिस बदलने के कारण सीडी व फाइलें गुम हो गई है। वहीं डीसी कार्यालय से भी समालखा के निजी कॉलेज की सीएलयू की फाइल गुम हो गई थी। आयुक्त नगर निगम, पानीपत ओम प्रकाश ने कहा कि मेरे संज्ञान में अभी यह मामला आया है, जल्द ही फाइल को ढूंढ़वाया जाएगा। ठेकेदार से मिलकर इस मामले की जांच करवाई जाएगी, ताकि उनको बचे हुए पैसे वापिस मिल सके।