पानीपत। हाउसिंग बोर्ड के बीपीएल फ्लैट अलॉट होने के बाद उपभोक्ता को नोटिस भेज ब्याज के रूप में 57,584 रुपये की मांग की गई थी। उपभोक्ता ने लीगल नोटिस भेज इस संबंध में जब जानकारी मांगी तो कोई जवाब नहीं मिला। नोटिस का न कोई आधार था और कोई पुष्टिकरण था। ऐसे में उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में याचिका लगाई। जिस पर सुनवाई करते हुए अब आयोग के चेयरमैन जेआर चौहान ने नोटिस को अवैध और अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया है। वहीं मानसिक प्रताड़ना देने पर बोर्ड को 10 हजार रुपये और मुकदमे बाजी में लगे 5500 रुपये देने होंगे।
रोहतक के गांव फरमाना खास निवासी रामपाल ने बताया कि उसने 15 अक्तूबर 2010 को बीपीएल क्षेणी में आते हुए ईडब्ल्यूएस के तहत हाउसिंग बोर्ड में फ्लैट के लिए आवेदन किया था। 10 मार्च 2011 को उसका ड्रा में फ्लैट निकल गया। छह जून 2011 को उसे फ्लैट की अलॉटमेंट मिल गई। स्टेट मैनेजर ने उससे 37 हजार रुपये की मांग की, उसने 29 जून 2011 को रुपयों का भुगतान कर दिया। जिसके बाद हाउसिंग बोर्ड ने एक अन्य पत्र जारी कर उससे अन्य 57,584 रुपये ब्याज के रूप में मांगे। जब उसने इस राशि के बारे में अधिकारियों से पूछा तो वह संतोषजनकर जवाब नहीं दे पाए। जिसके बाद उसने 26 अप्रैल 2016 को लीगल नोटिस भेजा। उल्लेखनीय है कि उसने इससे संबंधित एक याचिका जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, रोहतक में भी लगाई थी, लेकिन उसने केस को खारिज कर दिया गया था। इसी वजह से उसने अब उपभोक्ता को इस न्यायालय में अपनी अपील दायर करनी पड़ी।