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Panipat News: कमेटी का दावा वार्डबंदी का प्रस्ताव खारिज
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पानीपत। शहर में नगर निगम की नई वार्डबंदी के प्रस्ताव को खारिज करने का दावा किया है। कमेटी का कहना है कि अब यह नए सिरे से की जाएगी। इसमें अधिकारियों के स्तर पर कमियों को दूर करने के साथ बूथों का भी समायोजन किया जाएगा। इसको अगले सप्ताह के मध्य तक पूरा किया जा सकता है। एडहॉक कमेटी का यह भी कहना है कि इसमें किसी प्रकार की जल्दबाजी नहीं की जाएगी। इसमें सभी कमियों को दूर किया जाएगा। बेशक इसमें कुछ समय और लग जाए। वहीं उपायुक्त ने प्रस्ताव को खारिज करने से इन्कार किया है। उन्होंने इसमें सुधार की बात कही है।
नगर निगम अधिकारियों ने शहर के 26 वार्डों की नई वार्डबंदी का प्रस्ताव वीरवार को उपायुक्त की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एडहॉक कमेटी के सामने रखा था। जिसमें शहरी क्षेत्र के 15 और ग्रामीण अंचल के 11 वार्ड बनाए गए थे। एडहॉक कमेटी के सवाल उठने के बाद नई वार्डबंदी के अधिकारियों के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। अब इसको नए सिरे से बनाया जाएगा।
नगर निगम की प्रस्तावित वार्डबंदी में एक वार्ड या कॉलोनी को कई टुकड़ों में विभाजित कर दिया गया। इसके साथ अधिकतर कॉलोनियों व क्षेत्र का पता भी बदल जाएगा। लोगों को अपने आधार कार्ड से लेकर हर डॉक्यूमेंट में पता बदलवाना पड़ेगा। इसको लेकर फिर सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ेंगे। पिछले वार्डबंदी के बाद मुश्किल से पता बदलवा पाए थे।
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निगम ने पीपीपी को बनाया था आधार
जानकारों का कहना है कि नगर निगम अधिकारियों ने वार्डबंदी बनाने के लिए परिवार पहचान पत्र को आधार बनाया है। अधिकारियों ने एक वार्ड बनाने के लिए जनसंख्या का मानक 26 हजार रखा। इसमें 20 प्रतिशत अधिक या कम रख सकते हैं। ग्रामीण और शहर की कॉलोनियों के अलग-अलग वार्ड बनाए हैं। जबकि पहले मिश्रित थे। इसमें शहरी क्षेत्र के 15 और ग्रामीण के 11 वार्ड रखे हैं। अधिकारियों ने अपने तरीके को सही भी बताया था।
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एडहॉक कमेटी ने इन पर सवाल उठाए
एडहॉक कमेटी ने पहली की नजर में इस पर सवाल खड़े कर दिए। कमेटी के सदस्य निवर्तमान पार्षद अशोक कटारिया ने उदाहरण देते हुए बताया कि मॉडल टाउन के दो वार्ड बना दिए गए। इसको एससी आरक्षित भी कर दिया गया। जबकि यहां सामान्य वर्ग की जनंसख्या अधिक है। मॉडल टाउन व शहर के अन्य हिस्से में करीब 25 प्रतिशत लोगों के परिवार पहचान पत्र नहीं हैं। ऐसे में परिवार पहचान पत्र को आधार बनाना ठीक नहीं है। इसमें बूथों का समीकरण भी होना चाहिए। यह फैसला एडहॉक कमेटी करेगी। वोट और जनसंख्या भी इसका आधार होना चाहिए। राजनीति दल को पता होता है किस बूथ को कहां पर लगाया जाना है।
वार्डबंदी में अब यह होगा
एडहॉक कमेटी के नई वार्डबंदी के प्रस्ताव के खारिज करने के बाद इसे नए सिरे से बनाया जाएगा। कमेटी सदस्य इसको लेकर सोमवार या मंगलवार को नगर निगम अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसमें हर विषय पर चर्चा की जाएगी और सभी पहलुओं के आधार पर वार्डबंदी की जाएगी। एडहॉक कमेटी इसके बाद वीरवार को उपायुक्त के साथ बैठक करेगी। इसमें ज्यादा समय भी लग सकता है।
एडहॉक कमेटी में ये हैं शामिल
एडहॉक कमेटी के चेयरमैन उपायुक्त हैं। कमेटी में निवर्तमान पार्षद अशोक कटारिया, संजीव दहिया, सुनील सोनी, विमल बंसल व पूर्व पार्षद रामकुमार सैनी को शामिल किया गया है।
वर्जन :
शहर की वार्डबंदी को एडहॉक कमेटी के साथ बैठक कर बनाया जाएगा। इसमें सुधार करने के बाद फिर से कमेटी चर्चा करेगी। शहरवासियों के हक में वार्डबंदी रहेगी।
डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त।
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नगर निगम अधिकारियों ने शहर के 26 वार्डों की नई वार्डबंदी का प्रस्ताव वीरवार को उपायुक्त की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एडहॉक कमेटी के सामने रखा था। जिसमें शहरी क्षेत्र के 15 और ग्रामीण अंचल के 11 वार्ड बनाए गए थे। एडहॉक कमेटी के सवाल उठने के बाद नई वार्डबंदी के अधिकारियों के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। अब इसको नए सिरे से बनाया जाएगा।
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नगर निगम की प्रस्तावित वार्डबंदी में एक वार्ड या कॉलोनी को कई टुकड़ों में विभाजित कर दिया गया। इसके साथ अधिकतर कॉलोनियों व क्षेत्र का पता भी बदल जाएगा। लोगों को अपने आधार कार्ड से लेकर हर डॉक्यूमेंट में पता बदलवाना पड़ेगा। इसको लेकर फिर सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ेंगे। पिछले वार्डबंदी के बाद मुश्किल से पता बदलवा पाए थे।
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निगम ने पीपीपी को बनाया था आधार
जानकारों का कहना है कि नगर निगम अधिकारियों ने वार्डबंदी बनाने के लिए परिवार पहचान पत्र को आधार बनाया है। अधिकारियों ने एक वार्ड बनाने के लिए जनसंख्या का मानक 26 हजार रखा। इसमें 20 प्रतिशत अधिक या कम रख सकते हैं। ग्रामीण और शहर की कॉलोनियों के अलग-अलग वार्ड बनाए हैं। जबकि पहले मिश्रित थे। इसमें शहरी क्षेत्र के 15 और ग्रामीण के 11 वार्ड रखे हैं। अधिकारियों ने अपने तरीके को सही भी बताया था।
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एडहॉक कमेटी ने इन पर सवाल उठाए
एडहॉक कमेटी ने पहली की नजर में इस पर सवाल खड़े कर दिए। कमेटी के सदस्य निवर्तमान पार्षद अशोक कटारिया ने उदाहरण देते हुए बताया कि मॉडल टाउन के दो वार्ड बना दिए गए। इसको एससी आरक्षित भी कर दिया गया। जबकि यहां सामान्य वर्ग की जनंसख्या अधिक है। मॉडल टाउन व शहर के अन्य हिस्से में करीब 25 प्रतिशत लोगों के परिवार पहचान पत्र नहीं हैं। ऐसे में परिवार पहचान पत्र को आधार बनाना ठीक नहीं है। इसमें बूथों का समीकरण भी होना चाहिए। यह फैसला एडहॉक कमेटी करेगी। वोट और जनसंख्या भी इसका आधार होना चाहिए। राजनीति दल को पता होता है किस बूथ को कहां पर लगाया जाना है।
वार्डबंदी में अब यह होगा
एडहॉक कमेटी के नई वार्डबंदी के प्रस्ताव के खारिज करने के बाद इसे नए सिरे से बनाया जाएगा। कमेटी सदस्य इसको लेकर सोमवार या मंगलवार को नगर निगम अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसमें हर विषय पर चर्चा की जाएगी और सभी पहलुओं के आधार पर वार्डबंदी की जाएगी। एडहॉक कमेटी इसके बाद वीरवार को उपायुक्त के साथ बैठक करेगी। इसमें ज्यादा समय भी लग सकता है।
एडहॉक कमेटी में ये हैं शामिल
एडहॉक कमेटी के चेयरमैन उपायुक्त हैं। कमेटी में निवर्तमान पार्षद अशोक कटारिया, संजीव दहिया, सुनील सोनी, विमल बंसल व पूर्व पार्षद रामकुमार सैनी को शामिल किया गया है।
वर्जन :
शहर की वार्डबंदी को एडहॉक कमेटी के साथ बैठक कर बनाया जाएगा। इसमें सुधार करने के बाद फिर से कमेटी चर्चा करेगी। शहरवासियों के हक में वार्डबंदी रहेगी।
डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त।