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दो मकानों की गिरीं छतें
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इसराना/थर्मल। दो दिनों तक लगातार हुई बरसात की वजह से बुआना लाखु में एक घर की छत ढह गई। मकान में रह रहे परिवार ने बाहर भाग कर जान बचाई। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे पीड़ित परिवार को पड़ोसियों ने फिलहाल अपने घर मे पनाह दे रखी है। निवर्तमान सरपंच और ग्रामीण सोमवार को पीड़ित परिवार के साथ एडीसी से मिलकर मदद की गुहार लगाएंगे। उधर, थर्मल के गांव जाटल में भी बुधवार को लगातार बारिश के कारण मकान की छत गिर गई। गनीमत रही हादसे में परिवार बाल-बाल बच गया।
गांव बुआना लाखु में एससी बस्ती में शकुंतला और धीरा के घर की ढह ई। शकुंतला ने बताया कि जब छत गिरने की आवाज हुई तब वह बुजुर्ग पति और चार बच्चों को लेकर घर के बाहर दौड़ीं। घर से बाहर निकलते ही छत पूरी तरह ढह गई। घर ढहने से सारा सामान मलबे में दब गया। दो दिन से वह परिवार समेत पड़ोसियों के घर में शरण लिए हुए हैं। उड़के पास अब न तो छत है न हो खाने को है। पीड़िता ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। गांव की निवर्तमान सरपंच दर्शना देवी के पति मास्टर सुरेश कुमार ने बताया कि वह ग्रामीणों को साथ लेकर पीड़िता की मदद के लिए सोमवार को एडीसी से मिलेंगे।
उधर, थर्मल के गांव जाटल में मकान मालिक नरेंद्र कुमार ने बताया की लगातार बारिश होने के कारण दोपहर उसके मकान की छत गिर गई। उस समय परिवार के सभी लोग दूसरे कमरे में थे। रात के समय हादसा होता तो जान जा सकती थी। पीड़ित परिवार के सदस्य नरेंद्र ने बताया कि छत गिरने के कुछ देर पहले ही सभी कमरे से बाहर आए थे। मतलौडा क्षेत्र में बारिश में मकान गिरने की अब तक यह तीसरी घटना है।
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गांव बुआना लाखु में एससी बस्ती में शकुंतला और धीरा के घर की ढह ई। शकुंतला ने बताया कि जब छत गिरने की आवाज हुई तब वह बुजुर्ग पति और चार बच्चों को लेकर घर के बाहर दौड़ीं। घर से बाहर निकलते ही छत पूरी तरह ढह गई। घर ढहने से सारा सामान मलबे में दब गया। दो दिन से वह परिवार समेत पड़ोसियों के घर में शरण लिए हुए हैं। उड़के पास अब न तो छत है न हो खाने को है। पीड़िता ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। गांव की निवर्तमान सरपंच दर्शना देवी के पति मास्टर सुरेश कुमार ने बताया कि वह ग्रामीणों को साथ लेकर पीड़िता की मदद के लिए सोमवार को एडीसी से मिलेंगे।
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उधर, थर्मल के गांव जाटल में मकान मालिक नरेंद्र कुमार ने बताया की लगातार बारिश होने के कारण दोपहर उसके मकान की छत गिर गई। उस समय परिवार के सभी लोग दूसरे कमरे में थे। रात के समय हादसा होता तो जान जा सकती थी। पीड़ित परिवार के सदस्य नरेंद्र ने बताया कि छत गिरने के कुछ देर पहले ही सभी कमरे से बाहर आए थे। मतलौडा क्षेत्र में बारिश में मकान गिरने की अब तक यह तीसरी घटना है।
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