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दोबारा हुआ कूड़ा पृथीकरण टेंडर, टेंडर राशि से घट गए 9 करोड़ रुपये
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शहर की सफाई व्यवस्था पर हर माह करीब 5 करोड़ रुपये खर्च होते आए हैं। कई बड़े टेंडरों में धांधली के में विरोध प्रदर्शन तक हो चुका है। अब निगम अधिकारियों का जबरदस्त कारनामा सामने आया है। इसमें निंबरी डंपिंग स्टेशन पर पड़े कूड़े को पृथीकरण करने के लिए करीब 48 करोड़ का एस्टिमेट बना निगम अधिकारियों ने टेंडर तक लगाया। टेंडर प्रक्रिया में कई पार्टियों की भागीदारी न होने पर इसके बार- बार स्थगित किया जाता रहा। अब फिर से इस टेंडर को महज 38.86 करोड़ रुपये में लगाया गया है। इस प्रक्रिया में पांच पार्टियों ने भाग तो लिया, लेकिन किसी के पास पूरे दस्तावेज ही नहीं है। अब सवाल निगम अधिकारियों पर ये बनता है कि आखिर किस एस्टिमेट से 48 करोड़ का टेंडर पौने 39 करोड़ का बन जाता है। अचानक से ही 9 करोड़ रुपये कम कैसे हो जाते हैं। अगर पहली बार में ही इस टेंडर को खोलकर इसका वर्क आर्डर जारी कर दिया जाता तो निगम किसे अतिरिक्त 9 करोड़ रुपये का लाभ पहुंचाना चाहता था। इसे लेकर सभी निगम अधिकारियों से बातचीत की गई, लेकिन किसी के पास इसका संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जो सीधे तौर पर एक बड़े गोलमाल की तरफ इशारा कर रहा है।
अब 10 साल का कूड़ा उठाने पर खर्च करने का यूं बना प्लान-
शहरी स्थानीय निकाय के आदेशों पर निगम ने निंबरी डंपिंग स्टेशन पर पिछले 10 साल के पड़े कूड़े को अलग-अलग करने के लिए टेंडर लगवाने के आदेश जारी किए। जिससे इस कूड़े से बिजली और खाद्य बनाई जा सके। इसके लिए निगम अधिकारियों ने अपने किसी चहेते ठेकेदार या एजेंसी का फायदा पहुंचाने के लिए गलत एस्टीमेट बनाकर करीब 6 लाख टन कूड़ा दिखाते हुए करीब 48 करोड़ का एस्टिमेट बनाकर टेंडर लगवा दिया। इस खबर को अमर उजाला ने अपने कई अंकों में प्रमुखता से प्रकाशित भी किया। मामला सुर्खियों में आने के बाद टेंडर को स्थगित किया जाता रहा।
जब मामला अधिकारियों की नजर में आया तो इस टेंडर की दोबारा वेल्यूएशन करवाई गई, जिसमें इंजीनियरिंग ब्रांच ने मौजूदा जगह पर करीब 4 लाख टन कूड़े का एस्टीमेट बना इस टेंडर को 9 करोड़ रुपये तक घटाते हुए 38.86 करोड़ रुपये का बना दिया। अब इसमें भागीदारी कर रही कंपनियों के पास पूरे दस्तावेज नहीं हैं। निगम अब उनसे दस्तावेज मंगवा जल्द इस काम को पूरा करना चाहता है। निगम अधिकारियों का कहना है कि एनजीटी के निर्देशानुसार 2 अक्तूबर तक इस काम का वर्क आर्डर जारी किया जाना है।
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वर्जन-
इस बारे में निगम आयुक्त सुशील कुमार ने बताया कि पहले निगम की सफाई शाखा के ब्योरे अनुसार टेेंडर लगाया गया था, इसमें इंजीनियरिंग ब्रांच ने अपनी नापतोल नहीं की थी, जिस वजह से ये 48 करोड़ का बना था। इसके बाद निगम की इंजीनियरिंग ब्रांच ने कूड़े के ढेर की लंबाई-चौड़ाई व गूगल मैप से छानबीन की तो इसका बजट कम बना। वर्क आर्डर जारी होने के बाद एक बार फिर से निगम कमेटी नई तकनीक से इसका विश्लेषण करेगी।
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अब 10 साल का कूड़ा उठाने पर खर्च करने का यूं बना प्लान-
शहरी स्थानीय निकाय के आदेशों पर निगम ने निंबरी डंपिंग स्टेशन पर पिछले 10 साल के पड़े कूड़े को अलग-अलग करने के लिए टेंडर लगवाने के आदेश जारी किए। जिससे इस कूड़े से बिजली और खाद्य बनाई जा सके। इसके लिए निगम अधिकारियों ने अपने किसी चहेते ठेकेदार या एजेंसी का फायदा पहुंचाने के लिए गलत एस्टीमेट बनाकर करीब 6 लाख टन कूड़ा दिखाते हुए करीब 48 करोड़ का एस्टिमेट बनाकर टेंडर लगवा दिया। इस खबर को अमर उजाला ने अपने कई अंकों में प्रमुखता से प्रकाशित भी किया। मामला सुर्खियों में आने के बाद टेंडर को स्थगित किया जाता रहा।
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जब मामला अधिकारियों की नजर में आया तो इस टेंडर की दोबारा वेल्यूएशन करवाई गई, जिसमें इंजीनियरिंग ब्रांच ने मौजूदा जगह पर करीब 4 लाख टन कूड़े का एस्टीमेट बना इस टेंडर को 9 करोड़ रुपये तक घटाते हुए 38.86 करोड़ रुपये का बना दिया। अब इसमें भागीदारी कर रही कंपनियों के पास पूरे दस्तावेज नहीं हैं। निगम अब उनसे दस्तावेज मंगवा जल्द इस काम को पूरा करना चाहता है। निगम अधिकारियों का कहना है कि एनजीटी के निर्देशानुसार 2 अक्तूबर तक इस काम का वर्क आर्डर जारी किया जाना है।
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इस बारे में निगम आयुक्त सुशील कुमार ने बताया कि पहले निगम की सफाई शाखा के ब्योरे अनुसार टेेंडर लगाया गया था, इसमें इंजीनियरिंग ब्रांच ने अपनी नापतोल नहीं की थी, जिस वजह से ये 48 करोड़ का बना था। इसके बाद निगम की इंजीनियरिंग ब्रांच ने कूड़े के ढेर की लंबाई-चौड़ाई व गूगल मैप से छानबीन की तो इसका बजट कम बना। वर्क आर्डर जारी होने के बाद एक बार फिर से निगम कमेटी नई तकनीक से इसका विश्लेषण करेगी।