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मतलौडा ब्लाक की 43 हजार एकड़ जमीन हुई ऑनलाइन, सेटेलाइट के जरिये होगी गरदावरी
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हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड के आदेश पर स्थानीय मार्केट कमेटी के अधिकारियों ने ब्लाक क्षेत्र के कुल 62 हजार एकड़ जमीन में से 43 हजार एकड़ जमीन व उनके मालिक के नाम ऑनलाइन कर दिए गए। अन्य किसानों को ऑन लाइन करने के लिए मार्केट कमेटी के कर्मचारी व अधिकारी गांव गांव जाकर किसानों को ऑनलाइन कर रहे हैं।
स्थानीय मार्केट कमेटी के लेखाकार अजीत सिंह ने बताया कि अब ऑनलाइन करने को काम 70 प्रतिशत तक पूरा कर लिया गया है। अगले एक महीने तक सभी किसानों व उनकी जमीनों को आनलाइन कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि व्यापार में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। सरकार ने बिचौलिए के हस्तक्षेप को समाप्त करने की योजना बनाई है। किसानों की मंडी में बेची गई जीनस का पैसा व सब्सिडी या फिर फसल बीमा योजना के लाभ का पैसा सीधे सरकार के खाते में जाएगा।
सेटेलाइट से होगी गिरदावरी
अपने दफतर व गांव के सरपंच के घर बैठ कर अब पटवारी गिरदावरी नहीं कर सकेगा। सरकार की साफ हिदायतें हैं कि पटवारी खेतों में मौके पर पहुंचकर प्रति एकड़ जमीन की गिरदावरी करेगा। इसीलिए अब पटवारी हर गांव में खेतों में जाकर फसल की गिरदावरी कर रहे हैं। हालांकि गिरदावरी का काम अंतिम चरण में चल रहा है। पटवारी सही गिरदावरी कर रहा है या फिर गलत इस पर नजर रखने के लिए अब भविष्य में सेटेलाइट के जरिये खेतों की गिरदावरी होगी। पटवारी की कार्यशैली पर चंडीगढ़ बैठे अफसर सेटेलाइट से देख पाएंगे कि किस जमीन में क्या फसल उगाई हुई है। इतना ही नहीं किसी आपदा आने पर खराब हुई फसल की गरदावरी करने में पटवारी पर अकसर पक्षपात करने के आरोप लगाए जाते थे और कई किसान पटवारी से मिलकर करके अपनी ठीक फसल को भी गिरदावरी में खराब दिखाकर बे-वजह सरकार से मुआवजा ले जाते थे और वास्तव में प्रभावित हुआ किसान मुआवजे से वंचित रह जाता था। कानूनगो राजेश कुमार ने बताया कि सरकार द्वारा सेटेलाइट के जरिये प्रति एकड़ के नंबर सहित जमीन के नक्शे बनाए जा रहे है। ताकि किसी आपदा के दौरान किस किसान की फसल खराब हुई है। उसे चंडीगढ़ बैठे अफसर भी सीधे देख पाएंगे।
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स्थानीय मार्केट कमेटी के लेखाकार अजीत सिंह ने बताया कि अब ऑनलाइन करने को काम 70 प्रतिशत तक पूरा कर लिया गया है। अगले एक महीने तक सभी किसानों व उनकी जमीनों को आनलाइन कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि व्यापार में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। सरकार ने बिचौलिए के हस्तक्षेप को समाप्त करने की योजना बनाई है। किसानों की मंडी में बेची गई जीनस का पैसा व सब्सिडी या फिर फसल बीमा योजना के लाभ का पैसा सीधे सरकार के खाते में जाएगा।
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सेटेलाइट से होगी गिरदावरी
अपने दफतर व गांव के सरपंच के घर बैठ कर अब पटवारी गिरदावरी नहीं कर सकेगा। सरकार की साफ हिदायतें हैं कि पटवारी खेतों में मौके पर पहुंचकर प्रति एकड़ जमीन की गिरदावरी करेगा। इसीलिए अब पटवारी हर गांव में खेतों में जाकर फसल की गिरदावरी कर रहे हैं। हालांकि गिरदावरी का काम अंतिम चरण में चल रहा है। पटवारी सही गिरदावरी कर रहा है या फिर गलत इस पर नजर रखने के लिए अब भविष्य में सेटेलाइट के जरिये खेतों की गिरदावरी होगी। पटवारी की कार्यशैली पर चंडीगढ़ बैठे अफसर सेटेलाइट से देख पाएंगे कि किस जमीन में क्या फसल उगाई हुई है। इतना ही नहीं किसी आपदा आने पर खराब हुई फसल की गरदावरी करने में पटवारी पर अकसर पक्षपात करने के आरोप लगाए जाते थे और कई किसान पटवारी से मिलकर करके अपनी ठीक फसल को भी गिरदावरी में खराब दिखाकर बे-वजह सरकार से मुआवजा ले जाते थे और वास्तव में प्रभावित हुआ किसान मुआवजे से वंचित रह जाता था। कानूनगो राजेश कुमार ने बताया कि सरकार द्वारा सेटेलाइट के जरिये प्रति एकड़ के नंबर सहित जमीन के नक्शे बनाए जा रहे है। ताकि किसी आपदा के दौरान किस किसान की फसल खराब हुई है। उसे चंडीगढ़ बैठे अफसर भी सीधे देख पाएंगे।
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