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Panipat News: बाल वैज्ञानिकों ने मॉडलों से दिखाई प्रतिभा, सतत विकास के दिए समाधान
Sat, 10 Oct 2026 03:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sat, 10 Oct 2026 03:42 AM IST
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बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में मॉडल की जानकारी लेते डीएमएस रणवीर सिंह व अन्य। - संवाद
पानीपत/बापौली। सीएमईईई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बापौली में शुक्रवार को खंड स्तरीय राजकीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी 2026-27 का आयोजन किया गया। इसमें कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर आधारित मॉडल प्रस्तुत कर अपनी वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी का आयोजन खंड शिक्षा अधिकारी सतेंद्र नैन के मार्गदर्शन में एससीईआरटी गुरुग्राम के दिशा-निर्देशों के तहत किया गया।
प्रदर्शनी की थीम विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार : सतत और विकसित भारत के लिए रही। विद्यार्थियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), हरित ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, गणितीय मॉडलिंग, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, पारंपरिक कृषि पद्धतियों, ग्रामीण विकास और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर मॉडल तैयार किए। इन मॉडलों के माध्यम से विद्यार्थियों ने सामाजिक और पर्यावरणीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास किया। मॉडलों का मूल्यांकन मौलिकता, वैज्ञानिक सोच, तकनीकी कौशल, उपयोगिता, कम लागत, टिकाऊपन और प्रस्तुतीकरण के आधार पर किया गया।
खंड शिक्षा अधिकारी सतेंद्र नैन ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन और नवाचार की भावना विकसित करती हैं। विद्यार्थियों को प्रयोगों और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान से सीखने के अवसर मिलने चाहिए। जिला विज्ञान विशेषज्ञ संदीप कुमार ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक जिज्ञासा बनाए रखने और विज्ञान के माध्यम से सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित किया।जिला गणित विशेषज्ञ रणबीर सिंह ने कहा कि गणितीय मॉडलिंग और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता और समस्या समाधान कौशल को मजबूत करती हैं।प्रदर्शनी के नोडल अधिकारी संजीव बालियान ने आयोजन के समन्वय और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संवाद
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प्रदर्शनी की थीम विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार : सतत और विकसित भारत के लिए रही। विद्यार्थियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), हरित ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, गणितीय मॉडलिंग, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, पारंपरिक कृषि पद्धतियों, ग्रामीण विकास और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर मॉडल तैयार किए। इन मॉडलों के माध्यम से विद्यार्थियों ने सामाजिक और पर्यावरणीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास किया। मॉडलों का मूल्यांकन मौलिकता, वैज्ञानिक सोच, तकनीकी कौशल, उपयोगिता, कम लागत, टिकाऊपन और प्रस्तुतीकरण के आधार पर किया गया।
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खंड शिक्षा अधिकारी सतेंद्र नैन ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन और नवाचार की भावना विकसित करती हैं। विद्यार्थियों को प्रयोगों और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान से सीखने के अवसर मिलने चाहिए। जिला विज्ञान विशेषज्ञ संदीप कुमार ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक जिज्ञासा बनाए रखने और विज्ञान के माध्यम से सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित किया।जिला गणित विशेषज्ञ रणबीर सिंह ने कहा कि गणितीय मॉडलिंग और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता और समस्या समाधान कौशल को मजबूत करती हैं।प्रदर्शनी के नोडल अधिकारी संजीव बालियान ने आयोजन के समन्वय और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संवाद

बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में मॉडल की जानकारी लेते डीएमएस रणवीर सिंह व अन्य। - संवाद
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