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Panipat News: समय के साथ बदलाव जरूरी पर परंपराओं को अपनाएं रखना जरूरी
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मॉडल टाउन की 52 वर्षीय जोशीला भाटिया ने बताया कि सावन का महीना शिव भगवान को अत्यंत प्रिय है। यह महीना भगवान शिव का माना जाता है इसमें संपूर्ण वातावरण शिवमय हो जाता है। पहले लोग पूरा महीना भगवान शिव का उपवास करते थे और प्रतिदिन मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर गन्ने का रस, दूध में गंगाजल मिलाकर जलाभिषेक करते थे। अब समय के साथ लोगों में धार्मिक गतिविधियां तो बढ़ी हैं पर तरीके बदल गए हैं। अब लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भांग, धतूरा, शहद, बेलपत्र, दूध, दही आदि चढ़ाने लगे हैं। पहले की तरह रीति-रिवाजों को लोग मन से कम जबकि दिखावे के लिए ज्यादा करने लगे हैं। समय के साथ बदलाव हो रहे हैं। बदलाव समय की मांग होती है। इसलिए लोगों को बदलना भी चाहिए लेकिन अपने रीति-रिवाजों के साथ आगे बढ़ना चाहिए। रीति-रिवाजों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने का कोई फायदा नहीं है।
अब पहले की तरह नहीं धार्मिक गतिविधियां
बचपन में देखते थे कि सावन का महीना शुरू होते ही धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती थीं लेकिन अब तो धार्मिक कार्यक्रम चलते रहते हैं। लोग अब धर्म-कर्म में ज्यादा भाग लेने लगे हैं। बस समय के साथ लोगों ने रीति-रिवाजों और स्वयं को बदल लिया है। आजकल लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, भांग, धतूरा ज्यादा चढ़ाते हैं। पहले की तरह गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करना कहीं-कहीं देखने को मिलता है। युवा स्वयं के साथ रीति-रिवाजों को भी बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
-अमरजीत, शास्त्री कॉलोनी
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अब पहले की तरह नहीं धार्मिक गतिविधियां
बचपन में देखते थे कि सावन का महीना शुरू होते ही धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती थीं लेकिन अब तो धार्मिक कार्यक्रम चलते रहते हैं। लोग अब धर्म-कर्म में ज्यादा भाग लेने लगे हैं। बस समय के साथ लोगों ने रीति-रिवाजों और स्वयं को बदल लिया है। आजकल लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, भांग, धतूरा ज्यादा चढ़ाते हैं। पहले की तरह गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करना कहीं-कहीं देखने को मिलता है। युवा स्वयं के साथ रीति-रिवाजों को भी बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
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-अमरजीत, शास्त्री कॉलोनी