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धर्म से ही पुण्य की पूंजी बढ़ाई जा सकती है : राधे राधे महाराज
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पानीपत। कथा सुनते हुए श्रद्धालु।
- फोटो : Panipat
पानीपत। श्री अवध धाम मंदिर में वार्षिक महोत्सव एवं हनुमान जन्म उत्सव के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बृहस्पतिवार को कथा वाचक पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि धर्म से ही पुण्य की पूंजी बढ़ाई जा सकती है। निर्मल और पवित्र मन से भक्ति करने से भगवान के चरणों में स्थान पाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जब प्यास लगती है, तभी पानी का महत्व समझ में आता है। उसी प्रकार भगवान के श्रीचरणों में स्थान प्राप्त करने के लिए हृदय से प्रभु को स्मरण करने की आवश्यकता है। जिसे भक्ति का एक बार स्वाद मिल गया, वह भगवान की भक्ति में दिन-रात लीन हो जाता है। जीवन को सार्थक बनाने के लिए सत्संग से जुड़ना अनिवार्य है, क्योंकि हमारे सत्कर्म ही हमारी रक्षा करते हैं। हम धर्म से पुण्य की पूंजी बढ़ा सकते हैं, लेकिन पाप की पूंजी तो अपने आप बढ़ती है।
श्रीमद्भागवत कथा के तहत नैमिषारण्य प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि करीब छह हजार वर्ष पूर्व धर्म सम्मेलन हुआ था। शौनक ऋषि ने एक हजार वर्ष तक चलने वाले अनुष्ठान का आयोजन किया। कलियुग में लंबे अनुष्ठान का महत्व नहीं है, क्योंकि चूक एवं त्रुटि की संभावनाएं अधिक हैं। उन्होंने कहा कि भगवान को प्राप्त करने का सरल तरीका भक्ति ही है। इस अवसर पर स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज का प्रवचन सेवा समिति ने अभिनंदन किया। दाऊ जी महाराज ने दुशाला ओढ़ाकर महाराज को सम्मानित किया। इस अवसर पर रमेश नागौर, रमेश माटा, अशोक बांग्ला, भीम सचदेवा, सुभाष गुलाटी, रमेश, कपिल महेंद्रु, राकेश ग्रोवर, महापौर अवनीत कौर, शकुंतला गर्ग, पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि जब प्यास लगती है, तभी पानी का महत्व समझ में आता है। उसी प्रकार भगवान के श्रीचरणों में स्थान प्राप्त करने के लिए हृदय से प्रभु को स्मरण करने की आवश्यकता है। जिसे भक्ति का एक बार स्वाद मिल गया, वह भगवान की भक्ति में दिन-रात लीन हो जाता है। जीवन को सार्थक बनाने के लिए सत्संग से जुड़ना अनिवार्य है, क्योंकि हमारे सत्कर्म ही हमारी रक्षा करते हैं। हम धर्म से पुण्य की पूंजी बढ़ा सकते हैं, लेकिन पाप की पूंजी तो अपने आप बढ़ती है।
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श्रीमद्भागवत कथा के तहत नैमिषारण्य प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि करीब छह हजार वर्ष पूर्व धर्म सम्मेलन हुआ था। शौनक ऋषि ने एक हजार वर्ष तक चलने वाले अनुष्ठान का आयोजन किया। कलियुग में लंबे अनुष्ठान का महत्व नहीं है, क्योंकि चूक एवं त्रुटि की संभावनाएं अधिक हैं। उन्होंने कहा कि भगवान को प्राप्त करने का सरल तरीका भक्ति ही है। इस अवसर पर स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज का प्रवचन सेवा समिति ने अभिनंदन किया। दाऊ जी महाराज ने दुशाला ओढ़ाकर महाराज को सम्मानित किया। इस अवसर पर रमेश नागौर, रमेश माटा, अशोक बांग्ला, भीम सचदेवा, सुभाष गुलाटी, रमेश, कपिल महेंद्रु, राकेश ग्रोवर, महापौर अवनीत कौर, शकुंतला गर्ग, पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।

पानीपत। कथा सुनाते हुए पंडित राधे-राधे महाराज।- फोटो : Panipat
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