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संदिग्ध बुखार से सगे भाइयों की मौत
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पानीपत। सुजल और कृष। फाइल फोटो।
- फोटो : Panipat
पानीपत। वार्ड नंबर-5 में कुटानी रोड स्थित विजय नगर में एक सप्ताह भीतर ही संदिग्ध बुखार से 14 और 15 वर्ष के सगे भाइयों की मौत हो गई। उधर, सूचना पर स्वास्थ्य विभाग से डॉक्टरों की टीम जांच के लिए उनके घर पहुंची। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी।
विजय नगर निवासी कृष (15) और सुजल (14) कक्षा 9 में पढ़ते थे। कृष का देहांत 12 सिंतबर और सुजल का देहांत सोमवार को हुआ है। दोनों की मौत के बाद अब घर में कोई चिराग नहीं बचा। दोनों बच्चों की मौत के बाद से माता-पिता बेसुध हैं। बुखार की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम भी दोनों के घर पहुंची। बच्चों की रिपोर्ट देखी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि रिपोर्ट में डेंगू एवं सेप्टिक शॉक लिखा गया है। दोनों पर प्रश्न चिह्न लगाया गया है। ऐसे में विभाग ने डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। वहीं दूसरी ओर सोमवार को संभावित डेंगू के चार और केस आए हैं। ये केस निगम की ऑउटर कॉलोनियों से हैं। मरीजों का फिलहाल सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
लापरवाही का आरोप
परिजनों एवं स्थानीय लोगों ने मौतों ठीकरा निगम प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर फोड़ा है। लोगों का कहना है कि वे कई बार प्रशासन से फॉगिंग करवाने के लिए कह चुके थे, लेकिन शिकायतों के बावजूद फॉगिंग नहीं करवाई गई। कॉलोनी में मच्छरों ी वजह से लोग लगातार बीमार हो रहे हैं। अगर समय रहते फॉगिंग की जाती या स्वास्थ्य विभाग बीमारी को लेकर कड़े कदम उठाता या फिर नगर निगम पानी की निकासी का प्रबंध करता तो बच्चे जिंदा होते।
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दोनों भाई थे होशियार
बच्चों की मौत से पिता प्रदीप और उनकी मां बेहाल हैं। वे बोलने तक में सक्षम नहीं हैं। परिवार के अन्य सदस्यों एवं पड़ोसियों ने बताया कि दोनों बच्चों पढ़ाई में काफी होशियार थे। दोनों लहसुन-प्याज तक का सेवन नहीं करते थे। स्वभाव भी विनम्र था। परिवार के सदस्यों ने बताया कि दोनों बीमार भाइयों का इलाज पानीपत के निजी अस्पतालों से लेकर दिल्ली तक के बड़े अस्पतालों तक में कराया गया लेकिन उनको नहीं बचाया जा सका।
बार बार की शिकायत, नहीं की सुनवाई
फॉगिंग करवाने को लेकर निगम को बार बार शिकायत की, लेकिन निगम ने एक बार भी फॉगिंग नहीं करवाई। अधिकारी बोले जैसा चल रहा है, वैसा चलने दो। एक बार एक बाइक फॉगिंग के लिए आई थी, जिसका कोई लाभ नहीं हुआ। - अनिल बजाज, पार्षद, वार्ड नंबर 5
निजी अस्पतालों की जो जांच रिपोर्ट मिली है, उसमें डेंगू एवं सेप्टिक शॉक लिखा गया है। दोनों पर प्रश्न चिह्न लगाया गया है। डेंगू का कार्ड टेस्ट किया है। रिपोर्ट में वीकली पॉजिटिव लिखा गया है। कंफर्मेशन के लिए टेस्ट नहीं किया है। इसलिए बच्चों की मौत डेंगू से हुई है। ये स्पष्ट नहीं है। मामले की जांच की जा रही है। - डॉ. सुनील संदुजा, डिप्टी सिविल सर्जन एवं नोडल अधिकारी डेंगू एवं मलेरिया
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विजय नगर निवासी कृष (15) और सुजल (14) कक्षा 9 में पढ़ते थे। कृष का देहांत 12 सिंतबर और सुजल का देहांत सोमवार को हुआ है। दोनों की मौत के बाद अब घर में कोई चिराग नहीं बचा। दोनों बच्चों की मौत के बाद से माता-पिता बेसुध हैं। बुखार की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम भी दोनों के घर पहुंची। बच्चों की रिपोर्ट देखी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि रिपोर्ट में डेंगू एवं सेप्टिक शॉक लिखा गया है। दोनों पर प्रश्न चिह्न लगाया गया है। ऐसे में विभाग ने डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। वहीं दूसरी ओर सोमवार को संभावित डेंगू के चार और केस आए हैं। ये केस निगम की ऑउटर कॉलोनियों से हैं। मरीजों का फिलहाल सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
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लापरवाही का आरोप
परिजनों एवं स्थानीय लोगों ने मौतों ठीकरा निगम प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर फोड़ा है। लोगों का कहना है कि वे कई बार प्रशासन से फॉगिंग करवाने के लिए कह चुके थे, लेकिन शिकायतों के बावजूद फॉगिंग नहीं करवाई गई। कॉलोनी में मच्छरों ी वजह से लोग लगातार बीमार हो रहे हैं। अगर समय रहते फॉगिंग की जाती या स्वास्थ्य विभाग बीमारी को लेकर कड़े कदम उठाता या फिर नगर निगम पानी की निकासी का प्रबंध करता तो बच्चे जिंदा होते।
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दोनों भाई थे होशियार
बच्चों की मौत से पिता प्रदीप और उनकी मां बेहाल हैं। वे बोलने तक में सक्षम नहीं हैं। परिवार के अन्य सदस्यों एवं पड़ोसियों ने बताया कि दोनों बच्चों पढ़ाई में काफी होशियार थे। दोनों लहसुन-प्याज तक का सेवन नहीं करते थे। स्वभाव भी विनम्र था। परिवार के सदस्यों ने बताया कि दोनों बीमार भाइयों का इलाज पानीपत के निजी अस्पतालों से लेकर दिल्ली तक के बड़े अस्पतालों तक में कराया गया लेकिन उनको नहीं बचाया जा सका।
बार बार की शिकायत, नहीं की सुनवाई
फॉगिंग करवाने को लेकर निगम को बार बार शिकायत की, लेकिन निगम ने एक बार भी फॉगिंग नहीं करवाई। अधिकारी बोले जैसा चल रहा है, वैसा चलने दो। एक बार एक बाइक फॉगिंग के लिए आई थी, जिसका कोई लाभ नहीं हुआ। - अनिल बजाज, पार्षद, वार्ड नंबर 5
निजी अस्पतालों की जो जांच रिपोर्ट मिली है, उसमें डेंगू एवं सेप्टिक शॉक लिखा गया है। दोनों पर प्रश्न चिह्न लगाया गया है। डेंगू का कार्ड टेस्ट किया है। रिपोर्ट में वीकली पॉजिटिव लिखा गया है। कंफर्मेशन के लिए टेस्ट नहीं किया है। इसलिए बच्चों की मौत डेंगू से हुई है। ये स्पष्ट नहीं है। मामले की जांच की जा रही है। - डॉ. सुनील संदुजा, डिप्टी सिविल सर्जन एवं नोडल अधिकारी डेंगू एवं मलेरिया