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Panipat News: चार घंटे तक मृत घोषित होने के इंतजार में पड़े रहे शव
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पानीपत। डॉक्टरों की हड़ताल के बीच शवों की उपेक्षा की गई। परिजन शव को शवगृह से इमरजेंसी वार्ड तक लेकर घूमते रहे। शव को मृत घोषित कराने के लिए मृतकों के परिजन इधर से उधर चक्कर काटते रहे। शव को मृत घोषित करने के लिए डॉक्टर ही नहीं था। नर्सिंग ऑफिसर कॉल कर डॉक्टरों को बोलते रहे कि वह उन्हें व्हाट्सएप पर उसकी ईसीजी रिपोर्ट भेज देंगे। उसकी वीडियो दिखा देंगे। एक बार अस्पताल में आकर मृत घोषित कर दो लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित करने से साफ इंकार कर दिया।
परिजन शव को इमरजेंसी वार्ड में ही ले आए और इमरजेंसी डॉक्टर के केबिन के बाहर रख दिया। यहां भी शव डॉक्टर के इंतजार में चार घंटे तक पड़ा रहा। ऐसे में शव फूलने लगा और बदबू आने लगी। चार बजे एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत डॉ. वैभव गुलाटी को बुलाया गया,उन्होंने व्यक्ति को मृत घोषित किया। इसके बाद उसे शवगृह में रखा गया। फिर डॉक्टर ने काम की अधिकता के कारण वीरवार को पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया।
शवगृह में वीरवार को तीन शव थे लेकिन सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर थे। परिजन शव लेने के लिए सुबह से ही शवगृह के बाहर खड़े रहे। पुलिस ने पंचनामा भी तैयार कर लिया लेकिन पोस्टमार्टम करने के लिए डॉक्टर ही नहीं थे। सिविल सर्जन ने एक डॉक्टर को पोस्टमार्टम के लिए कई बार कॉल की लेकिन डॉक्टर ड्यूटी पर आकर एसोसिएशन में अपनी किरकिरी नहीं कराना चाहता था। इसलिए उन्होंने आने से इंकार कर दिया। एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत डॉ. वैभव गुलाटी ने दो सर्जरी की। इसके बाद वह बीच बीच में आकर इमरजेंसी में मरीजों की जांच कर रहे थे , इसलिए वह नहीं आ सकते। जब लोगों ने हंगामा शुरू किया तो एक रिटायर्ड डॉक्टर को बुलाया गया। फिर पोस्टमार्टम हुए।
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बॉक्स
यह है नियम
नियमानुसार बॉडी को शवगृह में रखने से पहले डॉक्टर से मृत घोषित कराना होता है। डॉक्टर नब्ज व सांस की जांच करने के बाद उसे मृत घोषित करता है। फिर नर्सिंग ऑफिसर शव की अपने रजिस्टर में एंट्री करते हैं। इसके बाद शव को शवगृह भेजा जाता है। पुलिस को घटना की सूचना दी जाती है। फिर पोस्टमार्टम ड्यूटी वाले डॉक्टर को वहां भेजा जाता है। परिजन के बयान पर शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम किया जाता है।
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परिजन शव को इमरजेंसी वार्ड में ही ले आए और इमरजेंसी डॉक्टर के केबिन के बाहर रख दिया। यहां भी शव डॉक्टर के इंतजार में चार घंटे तक पड़ा रहा। ऐसे में शव फूलने लगा और बदबू आने लगी। चार बजे एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत डॉ. वैभव गुलाटी को बुलाया गया,उन्होंने व्यक्ति को मृत घोषित किया। इसके बाद उसे शवगृह में रखा गया। फिर डॉक्टर ने काम की अधिकता के कारण वीरवार को पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया।
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शवगृह में वीरवार को तीन शव थे लेकिन सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर थे। परिजन शव लेने के लिए सुबह से ही शवगृह के बाहर खड़े रहे। पुलिस ने पंचनामा भी तैयार कर लिया लेकिन पोस्टमार्टम करने के लिए डॉक्टर ही नहीं थे। सिविल सर्जन ने एक डॉक्टर को पोस्टमार्टम के लिए कई बार कॉल की लेकिन डॉक्टर ड्यूटी पर आकर एसोसिएशन में अपनी किरकिरी नहीं कराना चाहता था। इसलिए उन्होंने आने से इंकार कर दिया। एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत डॉ. वैभव गुलाटी ने दो सर्जरी की। इसके बाद वह बीच बीच में आकर इमरजेंसी में मरीजों की जांच कर रहे थे , इसलिए वह नहीं आ सकते। जब लोगों ने हंगामा शुरू किया तो एक रिटायर्ड डॉक्टर को बुलाया गया। फिर पोस्टमार्टम हुए।
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यह है नियम
नियमानुसार बॉडी को शवगृह में रखने से पहले डॉक्टर से मृत घोषित कराना होता है। डॉक्टर नब्ज व सांस की जांच करने के बाद उसे मृत घोषित करता है। फिर नर्सिंग ऑफिसर शव की अपने रजिस्टर में एंट्री करते हैं। इसके बाद शव को शवगृह भेजा जाता है। पुलिस को घटना की सूचना दी जाती है। फिर पोस्टमार्टम ड्यूटी वाले डॉक्टर को वहां भेजा जाता है। परिजन के बयान पर शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम किया जाता है।