{"_id":"68a78827dd8ab07ef6072d0a","slug":"bhandara-organized-on-the-death-anniversary-of-sant-kripal-singh-maharaj-panipat-news-c-244-1-pnp1007-142362-2025-08-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: संत कृपाल सिंह महाराज की पुण्यतिथि पर लगाया भंडारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: संत कृपाल सिंह महाराज की पुण्यतिथि पर लगाया भंडारा
Fri, 22 Aug 2025 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 22 Aug 2025 02:27 AM IST
विज्ञापन
पानीपत। संत कृपाल आश्रम के बाहर वीरवार को प्रधान सरदार राजा सिंह, उप प्रधान जोगिंदर नरूला सचिव योगराज की देखरेख में भंडारा लगाया गया। जिसमें लोगों ने प्रसाद चखा।
आश्रम के प्रधान सरदार राजा सिंह ने बताया कि संत कृपाल सिंह का जन्म छह फरवरी 1894 को पंजाब के रावलपिंडी जिले के सैयद कसरो में हुआ था। 1924 में हजूर बाबा सावन सिंह से दीक्षा ली और संत कृपाल को 1974 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। संत कृपाल महाराज एक आध्यात्मिक गुरु थे जिन्होंने मानवता को प्रेम शांति और एकता का संदेश दिया। संत कृपाल महाराज ने 1974 में दिल्ली में मानव एकता पर विशेष सम्मेलन का आयोजन किया। जिसमें धार्मिक और राजनीतिक नेताओं समेत दो हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह सम्मेलन आत्मा के स्तर पर एकता को साकार करने और सभी धर्म की सामान्य को बढ़ावा देने के लक्ष्य के साथ आयोजित किया गया था। इसी वर्ष दो अप्रैल को हरिद्वार के कुंभ मेले में उन्होंने राष्ट्रीय एकता सम्मेलन आयोजित किया जिसमें साधु और संतों को सहयोग और भारत के गरीबों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए एकजुट किया गया था। हर साल उनकी पुण्यतिथि पर पूरे भारत में भंडारे लगाए जाते हैं। इसलिए वीरवार को उनकी पुण्यतिथि पर कृपाल आश्रम के बाहर भंडारा लगाया गया।
विज्ञापन
आश्रम के प्रधान सरदार राजा सिंह ने बताया कि संत कृपाल सिंह का जन्म छह फरवरी 1894 को पंजाब के रावलपिंडी जिले के सैयद कसरो में हुआ था। 1924 में हजूर बाबा सावन सिंह से दीक्षा ली और संत कृपाल को 1974 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। संत कृपाल महाराज एक आध्यात्मिक गुरु थे जिन्होंने मानवता को प्रेम शांति और एकता का संदेश दिया। संत कृपाल महाराज ने 1974 में दिल्ली में मानव एकता पर विशेष सम्मेलन का आयोजन किया। जिसमें धार्मिक और राजनीतिक नेताओं समेत दो हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह सम्मेलन आत्मा के स्तर पर एकता को साकार करने और सभी धर्म की सामान्य को बढ़ावा देने के लक्ष्य के साथ आयोजित किया गया था। इसी वर्ष दो अप्रैल को हरिद्वार के कुंभ मेले में उन्होंने राष्ट्रीय एकता सम्मेलन आयोजित किया जिसमें साधु और संतों को सहयोग और भारत के गरीबों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए एकजुट किया गया था। हर साल उनकी पुण्यतिथि पर पूरे भारत में भंडारे लगाए जाते हैं। इसलिए वीरवार को उनकी पुण्यतिथि पर कृपाल आश्रम के बाहर भंडारा लगाया गया।
विज्ञापन