फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   Became an IAS leaving the taunts behind

तानों को पीछे छोड़ आईएएस बनीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 02:01 AM IST
विज्ञापन
Became an IAS leaving the taunts behind
पानीपत। मधुमिता व अपने पिता महावीर के साथ। - फोटो : Panipat
पानीपत। लोगों के तानों ने 26 वर्षीय मधुमिता के इरादे इतने मजबूत कर दिए कि उन्होंने अपने मेहनत से आईएएस में ऑल इंडिया 86वीं रैंक हासिल की। बेटी पढ़ाओ... की मिसाल बनकर आज ओडिशा के शहर गंजम में सब कलेक्टर हैं। अपनी सफलता को उन्होंने लड़कियों के लिए प्रेरणा में बदल दिया है।
विज्ञापन

पानीपत निवासी मधुमिता ने बताया कि वह परिवार की पहली लड़की हैं, जो इतना पढ़ सकीं। परिवार में 20 से 22 वर्ष की उम्र में विवाह का सोचना शुरू कर दिया जाता है लेकिन उनका इरादा अटल था। उनका तीसरा प्रयास था और रिश्ते एवं नातेदारों के तानें कानों में पड़ने लगे कि इसकी शादी कब कराएंगे। इन तानों ने उनके इरादे बेहद मजबूत कर दिए। आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की और इस वक्त ओडिशा के गंजम में सब कलेक्टर हैं, उनकी ट्रेनिंग चल रही है।
विज्ञापन

अलमारी पर लगाई थी पिता की फोटो, मिलती थी प्रेरणा
मधुमिता ने बताया कि उन्होंने तैयारी के दौरान अलमारी पर अपने पिता की फोटो लगाकर रखी थी। जिसे देखकर प्रेरणा मिलती थी। इस सफलता के पीछे उनके पिता महावीर सिंह का सबसे बड़ा योगदान रहा। उन्होंने ही आईएएस बनने के लिए हौसला दिया। पिता महावीर सिंह ने 1987 में आईएएस बनने का सपना देखा। परीक्षा में बैठे लेकिन किन्हीं कारणों से उत्तीर्ण नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने दोबारा परीक्षा ही नहीं दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed