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Panipat News: खराब मौसम की उद्योग पर मार, नहीं सूख रहा माल
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पानीपत। 20 दिसंबर के बाद तापमान में कमी आई। ठंड ने जन जीवन को प्रभावित किया। 31 दिसंबर के बाद से अब तक दो दिन ही हल्की धूप निकली है। पिछले 10 दिन से बादल छाए हुए हैं। दिन भर बादल छाए रहने से धागा और पोलर कंबल उद्यमियों के लिए परेशानियां बढ़ गई हैं। डाइंग के बाद माल सूख नहीं रख रहा है। धागा समय पर न सूखने से कपड़ा उत्पादन लगभग ठप हो गया है।
उद्यमी समय पर बायलर को माल नहीं दे पा रहे हैं। धूप न निकलने से कंबल सूख नहीं पा रहा। उद्यमी कपड़े को ड्रायर में सुखाते हैं तो लागत 10 प्रतिशत बढ़ रही है। ये उद्यमियों पर भारी पड़ रही है। मौसम का असर काटन यार्न के उत्पादन पर पड़ा है। काटन यार्न मिलों में धागा ब्रेक कांबर से बनाया जाता है। सूखा कांबर उपलब्ध न होने से धागे का उत्पादन आधा रह गया है। मांग बराबर चल रही है। आपूर्ति की तुलना में मांग अधिक होने के कारण भाव में एक रुपया प्रति किलो की तेजी चल रही है। जिले में 500 से अधिक डाइंग यूनिट, 350 धागा उद्योग व 70 पोलर कंबल उद्योग हैं । सभी उद्योग एक दूसरे से जुड़े हैं। खराब मौसम के कारण धागे में भी नमी है। इसलिए कपड़ा बनाने में परेशानी हो रही है। डाइंग के बाद कपड़ा नहीं सूख रहा है। पोलर कंबल की मांग बराबर चल रही है लेकिन गीला होने से समय पर ऑर्डर नहीं दे पा रहे हैं। मंगलवार को धूप निकली तो उद्यमियों के चेहरे पर खुशी लौटी। उद्यमियों ने खाली पड़े प्लॉटों में कंबल व धागा सुखाया है।
बॉक्स
समय पर माल डिलीवर नहीं कर पा रहे- निखिल
कुछ उद्यमी समय पर माल डिलीवर करने के लिए मशीनों में कपड़े सुखा रहे हैं। इससे लागत दोगुनी पड़ रही है। बिजली का खर्च बढ़ रहा है। उद्यमियों का कहना है कि जब तक धुंध पड़ेगी उत्पादन प्रभावित रहेगा। रिंग फ्रेम फाइन काउंट बनाने वाली मिलों से निकलने वाली वेस्ट को कांबर बोला जाता है। पानीपत में कतरन रैग्ज से रूई बनाकर भी धागा बनाया जाता है। बारिश के कारण नमी अधिक होने से भी कच्चा माल सूखने में समय अधिक लगता है। धुंध के कारण धागे व कपड़े को सुखाने में परेशानी हो रही है। ऐसे में उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ रहा है। समय पर बायर को माल नहीं मिल पा रहा। कारोबार पर असर पड़ रहा है।
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- निखिल अरोड़ा, अध्यक्ष डायर्स एसोसिएशन
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उद्यमी समय पर बायलर को माल नहीं दे पा रहे हैं। धूप न निकलने से कंबल सूख नहीं पा रहा। उद्यमी कपड़े को ड्रायर में सुखाते हैं तो लागत 10 प्रतिशत बढ़ रही है। ये उद्यमियों पर भारी पड़ रही है। मौसम का असर काटन यार्न के उत्पादन पर पड़ा है। काटन यार्न मिलों में धागा ब्रेक कांबर से बनाया जाता है। सूखा कांबर उपलब्ध न होने से धागे का उत्पादन आधा रह गया है। मांग बराबर चल रही है। आपूर्ति की तुलना में मांग अधिक होने के कारण भाव में एक रुपया प्रति किलो की तेजी चल रही है। जिले में 500 से अधिक डाइंग यूनिट, 350 धागा उद्योग व 70 पोलर कंबल उद्योग हैं । सभी उद्योग एक दूसरे से जुड़े हैं। खराब मौसम के कारण धागे में भी नमी है। इसलिए कपड़ा बनाने में परेशानी हो रही है। डाइंग के बाद कपड़ा नहीं सूख रहा है। पोलर कंबल की मांग बराबर चल रही है लेकिन गीला होने से समय पर ऑर्डर नहीं दे पा रहे हैं। मंगलवार को धूप निकली तो उद्यमियों के चेहरे पर खुशी लौटी। उद्यमियों ने खाली पड़े प्लॉटों में कंबल व धागा सुखाया है।
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समय पर माल डिलीवर नहीं कर पा रहे- निखिल
कुछ उद्यमी समय पर माल डिलीवर करने के लिए मशीनों में कपड़े सुखा रहे हैं। इससे लागत दोगुनी पड़ रही है। बिजली का खर्च बढ़ रहा है। उद्यमियों का कहना है कि जब तक धुंध पड़ेगी उत्पादन प्रभावित रहेगा। रिंग फ्रेम फाइन काउंट बनाने वाली मिलों से निकलने वाली वेस्ट को कांबर बोला जाता है। पानीपत में कतरन रैग्ज से रूई बनाकर भी धागा बनाया जाता है। बारिश के कारण नमी अधिक होने से भी कच्चा माल सूखने में समय अधिक लगता है। धुंध के कारण धागे व कपड़े को सुखाने में परेशानी हो रही है। ऐसे में उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ रहा है। समय पर बायर को माल नहीं मिल पा रहा। कारोबार पर असर पड़ रहा है।
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- निखिल अरोड़ा, अध्यक्ष डायर्स एसोसिएशन