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फूल तोड़ने पर एएसआई ने सफाई कर्मचारी को मारा थप्पड़
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सिविल अस्पताल के पार्क से फूल तोड़ने पर गुस्साए एएसआई ने वीरवार को सफाई कर्मचारी को थप्पड़ मार दिया और उनके सुपरवाइजर को एफआईआर दर्ज करने की धमकी दी। इतना ही महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा के लिए फूल तोड़ने पहुंचे सरकारी अस्पताल के डॉक्टर के पिता से भी उसने अभद्रता की। एएसआई के इस बर्ताव से नाराज सफाई कर्मचारी वर्क सस्पेंड कर इमरजेंसी के बाहर धरने पर बैठ गए। इससे अस्पताल में अव्यवस्था फैल गई और मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पांच घंटे बाद एएसआई ने हाथ जोड़कर माफी मांगी तो अस्पताल का कामकाज सुचारु हो सका।
गांव बड़ौली निवासी सफाई कर्मचारी सोनू कुमार के मुताबिक वह वीरवार सुबह साढ़े सात बजे फूल तोड़ने के लिए अस्पताल के पार्क में गया था। वह फूल तोड़ ही रहा था कि इस दौरान वहां सैर कर रहे एएसआई अजमेर सिंह ने कर्मचारी को पार्क से बाहर जाने को कहा। सोनू ने उन्हें बताया कि वह अस्पताल का सफाई कर्मचारी है और सुपरवाइजर ने पूजा के लिए फूल मंगाए हैं। इतने में एएसआई अजमेर सिंह ने उसे थप्पड़ मार दिया और धक्का देकर पार्क से निकाल दिया। इस दौरान सफाई कर्मियों का सुपरवाइजर भी मौके पर आ गया तो एसआई ने उसे भी रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी दी। इस दौरान कर्मचारियों का पता चला कि एएसआई ने पूजा के लिए फूल तोड़ने आए अस्पताल के डॉ. पवन के पिता सूरजभान से भी अभद्रता की। इसके बाद कर्मचारियों ने वर्क सस्पेंड कर दिया और इमरजेंसी के बाहर धरने पर बैठ गए। इस दौरान उन्होंने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों के धरने पर बैठने की खबर मिलने पर डिप्टी एमएस मौके पर पहुंचे और उन्होंने डीएसपी सतीश वत्स को इस मामले की जानकारी दी। उनके नहीं आने पर कर्मचारी लघु सचिवालय में डीएसपी सिटी संदीप सिंह के कार्यालय में पहुंच गए और एएसआई अजमेर सिंह के खिलाफ शिकायत दी। दोपहर साढ़ेेे 12 बजे सिटी थाने के अतिरिक्त एसएचओ राजकुमार और आरोपी एएसआई सिविल अस्पताल पहुंचे। एएसआई ने हाथ जोड़कर कर्मचारियों से माफी मांगी, इसके बार कर्मचारी काम पर लौट गए। इस दौरान धरने में देवन, अमित, सुरेश, आनंद, विकास, बलवान, प्रीतम, हरिराम, नवदीप और रमेश समेत अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
सुपरवाइजर से बोले, केस दर्ज कर जेल में डाल दूंगा
सुपरवाइजर पारस ने बताया कि सोनू से मारपीट के बाद वे मौके पर पहुंचे। उन्होेंने एएसआई अजमेर को बताया कि वह सुपरवाइजर हैं, लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं सुना और धमकाते हुए बोले कि यहां से चला जा नहीं तो केस दर्ज कर जेल में डाल दूंगा।
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- 200 कर्मचारियों के धरने पर बैठने से अस्पताल की व्यवस्था चरमराई
पांच घंटे तक 200 कर्मचारी धरने पर बैठे रहे और सुबह आठ से दोपहर एक बजे तक सफाई कर्मचारियों ने वर्क सस्पेंड रखा। इस दौरान इमरजेंसी में मरीजों को संभालने में स्टाफ नर्सों और डॉक्टरों को काफी परेशानी पेश हुई। लेबर वार्ड में आने वाली गर्भवतियों को स्टाफ नर्सों ने खुद संभाला। अस्पताल की सफाई व्यवस्था भी चरमरा गई। एएसआई के माफी मांगने के बाद डिप्टी एमएस के मनाने पर कर्मचारी ड्यूटी पर लौटे।
मैनें मारपीट नहीं की, बस हल्का सा धक्का दिया था: एएसआई
मारपीट करने का आरोप गलत लगाया जा रहा है। फूल तोड़ने से मना करते हुए सिर्फ हल्का से धक्का दिया था, जिसके लिए माफी मांग ली है।
अजमेर सिंह, एएसआई, सिविल अस्पताल पुलिस चौकी
पुलिस की निंदनीय हरकत: एमएस
पुलिस ने सफाई कर्मचारी के साथ मारपीट की है। ये काफी निंदनीय है। एक पुलिस अधिकारी को ऐसा आचरण शोभा नहीं देता है। बाद में पुलिस के एएसआई ने माफी मांग ली है। स्वास्थ्य कर्मचारी और पुलिस दोनों कोरोना योद्धा हैं।
- डॉ. अमित पोरिया, डिप्टी एमएस, सिविल अस्पताल
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गांव बड़ौली निवासी सफाई कर्मचारी सोनू कुमार के मुताबिक वह वीरवार सुबह साढ़े सात बजे फूल तोड़ने के लिए अस्पताल के पार्क में गया था। वह फूल तोड़ ही रहा था कि इस दौरान वहां सैर कर रहे एएसआई अजमेर सिंह ने कर्मचारी को पार्क से बाहर जाने को कहा। सोनू ने उन्हें बताया कि वह अस्पताल का सफाई कर्मचारी है और सुपरवाइजर ने पूजा के लिए फूल मंगाए हैं। इतने में एएसआई अजमेर सिंह ने उसे थप्पड़ मार दिया और धक्का देकर पार्क से निकाल दिया। इस दौरान सफाई कर्मियों का सुपरवाइजर भी मौके पर आ गया तो एसआई ने उसे भी रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी दी। इस दौरान कर्मचारियों का पता चला कि एएसआई ने पूजा के लिए फूल तोड़ने आए अस्पताल के डॉ. पवन के पिता सूरजभान से भी अभद्रता की। इसके बाद कर्मचारियों ने वर्क सस्पेंड कर दिया और इमरजेंसी के बाहर धरने पर बैठ गए। इस दौरान उन्होंने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों के धरने पर बैठने की खबर मिलने पर डिप्टी एमएस मौके पर पहुंचे और उन्होंने डीएसपी सतीश वत्स को इस मामले की जानकारी दी। उनके नहीं आने पर कर्मचारी लघु सचिवालय में डीएसपी सिटी संदीप सिंह के कार्यालय में पहुंच गए और एएसआई अजमेर सिंह के खिलाफ शिकायत दी। दोपहर साढ़ेेे 12 बजे सिटी थाने के अतिरिक्त एसएचओ राजकुमार और आरोपी एएसआई सिविल अस्पताल पहुंचे। एएसआई ने हाथ जोड़कर कर्मचारियों से माफी मांगी, इसके बार कर्मचारी काम पर लौट गए। इस दौरान धरने में देवन, अमित, सुरेश, आनंद, विकास, बलवान, प्रीतम, हरिराम, नवदीप और रमेश समेत अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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सुपरवाइजर से बोले, केस दर्ज कर जेल में डाल दूंगा
सुपरवाइजर पारस ने बताया कि सोनू से मारपीट के बाद वे मौके पर पहुंचे। उन्होेंने एएसआई अजमेर को बताया कि वह सुपरवाइजर हैं, लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं सुना और धमकाते हुए बोले कि यहां से चला जा नहीं तो केस दर्ज कर जेल में डाल दूंगा।
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- 200 कर्मचारियों के धरने पर बैठने से अस्पताल की व्यवस्था चरमराई
पांच घंटे तक 200 कर्मचारी धरने पर बैठे रहे और सुबह आठ से दोपहर एक बजे तक सफाई कर्मचारियों ने वर्क सस्पेंड रखा। इस दौरान इमरजेंसी में मरीजों को संभालने में स्टाफ नर्सों और डॉक्टरों को काफी परेशानी पेश हुई। लेबर वार्ड में आने वाली गर्भवतियों को स्टाफ नर्सों ने खुद संभाला। अस्पताल की सफाई व्यवस्था भी चरमरा गई। एएसआई के माफी मांगने के बाद डिप्टी एमएस के मनाने पर कर्मचारी ड्यूटी पर लौटे।
मैनें मारपीट नहीं की, बस हल्का सा धक्का दिया था: एएसआई
मारपीट करने का आरोप गलत लगाया जा रहा है। फूल तोड़ने से मना करते हुए सिर्फ हल्का से धक्का दिया था, जिसके लिए माफी मांग ली है।
अजमेर सिंह, एएसआई, सिविल अस्पताल पुलिस चौकी
पुलिस की निंदनीय हरकत: एमएस
पुलिस ने सफाई कर्मचारी के साथ मारपीट की है। ये काफी निंदनीय है। एक पुलिस अधिकारी को ऐसा आचरण शोभा नहीं देता है। बाद में पुलिस के एएसआई ने माफी मांग ली है। स्वास्थ्य कर्मचारी और पुलिस दोनों कोरोना योद्धा हैं।
- डॉ. अमित पोरिया, डिप्टी एमएस, सिविल अस्पताल