कोरोना का टीका लगने के सात दिन बाद आशा कार्यकर्ता की मौत, परिजनों का हंगामा, विभाग ने कहा- जांच जारी है
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कोरोना वैक्सीन लगने के सात दिन बाद आशा कार्यकर्ता ने निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। इससे नाराज महिला के परिजनों ने हंगामा किया। उन्होंने बताया कि चार फरवरी को सीएचसी में टीकाकरण के बाद आशा कार्यकर्ता बुखार, दस्त और निम्न रक्तचाप की समस्या से जूझ रही थी। तीन दिन पहले हालत काफी गंभीर होने पर उसे निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया था। इसकी सूचना सिविल सर्जन को भी दी गई थी। इसके बाद गुरुवार को रोहतक पीजीआई से जांच करने तीन सदस्यीय टीम भी आई थी।
हंगामे की सूचना पर पहुंची सिटी थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल में भिजवा दिया है। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं। कविता पत्नी सुरेश निवासी गांव अटावला की 12 साल पहले स्वास्थ्य विभाग में आशा कार्यकर्ता की नौकरी लगी थी।
कविता के पति सुरेश गांव सिवाह में सरकारी स्कूल में माली के पद पर कार्यरत हैं। सुरेश ने बताया कि उसकी पत्नी कविता को दो फरवरी को ही टीका लगवाने का मैसेज आया था। उसने वैक्सीन लगवाने से इंकार कर दिया था। इसके बावजूद उसको जबरदस्ती इंजेक्शन के लिए चार जनवरी को अहर गांव की सीएचसी में बुलाया गया। उसको दोपहर को वैक्सीन लगाई गई। जब वो चार फरवरी को ड्यूटी से घर आया तो उसकी पत्नी कविता बुखार से तप रही थी। उसने सुबह इस बारे में स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी।
स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने कहा कि बुखार होना आम बात है। लगातार तीन दिन तक उसको बुखार व दस्त जैसी समस्याएं रहीं। आठ फरवरी को कविता की हालत अधिक बिगड़ गई। वो उसको लेकर असंध रोड स्थित एक निजी अस्पताल में गए। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने कहा कि कविता की हालत अधिक खराब हो चुकी है।
उन्होंने उसे बड़े अस्पताल में ले जाने की सलाह दी। उसका बीपी बहुत अधिक कम हो गया था। उन्होंने सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा को इसकी सूचना दी थी। इसके बाद गुरुवार को रोहतक पीजीआई से इस मामले की जांच करने एक टीम आई। टीम ने कविता के परिजनों से बातचीत की और उसकी हिस्ट्री भी जानी।
टीम ने इलाज के बारे में भी पूछताछ की। इलाज स्थिति के अनुसार सही पाया गया। शुक्रवार दोपहर को एक बजे कविता ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि कविता की मौत का जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग है। वहीं विभाग को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
मां ने कहा था- जबरदस्ती इंजेक्शन लगाएं तो नौकरी छोड़ देना
कविता की मां कृष्णा निवासी गांव जयजी (सोनीपत) ने बताया कि वो तीन बेटियों व दो बेटों की मां है। कविता दो फरवरी को अपने मायके में आई थी। कविता ने उसको कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार कोरोना वैक्सीन लगाने के मैसेज आ रहे हैं लेकिन वो वैक्सीन नहीं लगवाना चाहती। दबाव में उसको वैक्सीन लगवानी पड़ेगी। उसने कविता को कहा था कि अगर जबरदस्ती इंजेक्शन लगाए तो नौकरी छोड़ देना।
मां वैक्सीन लगवाने से पहले डरी हुई थी
कविता की बेटी साक्षी ने बताया कि वैक्सीन लगवाने से पहले उसकी मां कविता काफी डरी थी। लगातार वो वैक्सीन लगवाने से मना भी कर रही थी। जिस दिन उसकी मां वैक्सीन लगवाकर घर आई उसी शाम को वो बीमार हो गई। उसकी मां ने बताया था कि वैक्सीन लगने के बाद ही उसको बेचैनी शुरू हो गई थी। उसकी मां को चार जनवरी को बार-बार फोन कर अहर सीएचसी में बुलाया गया था।
कविता को किडनी में पथरी थी, मामले की जांच चल रही है : डॉ. वर्मा
कविता को पहले से किडनी में पथरी थी। रोहतक टीम ने भी मामले की जांच की है। शव के पोस्टमार्टम के बाद उसकी मौत के कारण स्पष्ट होंगे। अब तक कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट का कोई मामला नहीं आया है। वो भी लगातार कविता के स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे थे। उसकी दो दिन पहले कोरोना जांच भी की गई थी। उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। डॉ. संतलाल वर्मा, सिविल सर्जन पानीपत।