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Panipat News: खेताें में अवैध रूप से चल रहे करीब 50 ब्लीचिंग हाउस
Fri, 22 May 2026 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 22 May 2026 01:22 AM IST
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ब्लीच हाउस। स्रोत : शिकायतकर्ता
पानीपत। औद्योगिक नगरी पानीपत में कृषि क्षेत्रों में ब्लीचिंग हाउस अवैध रूप से चल रहे हैं। करीब 50 ब्लीचिंग हाउस यमुना को सीधे रूप से मैली कर रहे हैं। इनके संचालन में पर्यावरणीय उल्लंघन सामने आया है। आरोप हैं कि ये इकाइयां अनिवार्य अनुमतियों और पर्यावरणीय अनुपालनों के बिना चल रही हैं। अवैध रिवर्स बोरवेल प्रणालियों के माध्यम से अनुपचारित औद्योगिक अपशिष्ट को नालियों, सीवरों और भूमिगत जल में बहाया जा रहा है।
पर्यावरणविद वरुण गुलाटी ने इसकी शिकायत हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फोटो और वीडियो साझा की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी निरीक्षणों, तस्वीरों और ड्रोन वीडियोग्राफी से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के विभिन्न गांव और कृषि क्षेत्रों में कई अवैध ब्लीचिंग कारखाने चल रहे हैं। ये इकाइयां रासायनिक रूप से दूषित अपशिष्ट जल को सीधे पास की नालियों और सीवर नेटवर्क में छोड़ रहे हैं। कुछ संचालक अधिकारियों की पकड़ से बचने के लिए गुप्त रिवर्स बोरवेल के माध्यम से अनुपचारित अपशिष्ट को भूमिगत रूप से बहा रहे हैं।
कृषि और भूजल के लिए खतरा
औद्योगिक अपशिष्ट का ऐसा अवैध निर्वहन भूजल की गुणवत्ता, कृषि भूमि, जन स्वास्थ्य और क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। ब्लीचिंग गतिविधियों से उत्पन्न अपशिष्ट में खतरनाक रसायन और उच्च प्रदूषण भार होता है। यह पवित्र यमुना नदी सहित आसपास के जल निकायों को प्रभावित कर सकता है। अवैध रूप से संचालित इकाइयों, उत्सर्जन बिंदुओं और संदिग्ध भूमिगत निपटान गतिविधियों को दर्शाने वाली तस्वीरें और ड्रोन वीडियो दस्तावेज कर संदर्भ और आवश्यक कार्रवाई के लिए संलग्न किए गए हैं।
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निरीक्षण करने की मांग उठाई
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी), जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को जिले में संचालित सभी अवैध ब्लीचिंग कारखानों का तत्काल निरीक्षण करने की मांग की है। इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू करें। इकाइयों को तत्काल बंद करने, सील करने, बिजली आपूर्ति काटने, पर्यावरण क्षतिपूर्ति और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक अभियोजन की भी मांग की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मुद्दा कृषि क्षेत्रों में पर्यावरण कानूनों और जन स्वास्थ्य की अनदेखी करते हुए की जा रही अवैध औद्योगिक गतिविधियों पर बढ़ती चिंता को उजागर करता है।
ब्लीचिंग हाउस की लगातार जांच की जा रही है। किसी प्रकार का उल्लंघन मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।
कुलदीप, एईई, एचएसपीसीबी।
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पर्यावरणविद वरुण गुलाटी ने इसकी शिकायत हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फोटो और वीडियो साझा की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी निरीक्षणों, तस्वीरों और ड्रोन वीडियोग्राफी से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के विभिन्न गांव और कृषि क्षेत्रों में कई अवैध ब्लीचिंग कारखाने चल रहे हैं। ये इकाइयां रासायनिक रूप से दूषित अपशिष्ट जल को सीधे पास की नालियों और सीवर नेटवर्क में छोड़ रहे हैं। कुछ संचालक अधिकारियों की पकड़ से बचने के लिए गुप्त रिवर्स बोरवेल के माध्यम से अनुपचारित अपशिष्ट को भूमिगत रूप से बहा रहे हैं।
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कृषि और भूजल के लिए खतरा
औद्योगिक अपशिष्ट का ऐसा अवैध निर्वहन भूजल की गुणवत्ता, कृषि भूमि, जन स्वास्थ्य और क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। ब्लीचिंग गतिविधियों से उत्पन्न अपशिष्ट में खतरनाक रसायन और उच्च प्रदूषण भार होता है। यह पवित्र यमुना नदी सहित आसपास के जल निकायों को प्रभावित कर सकता है। अवैध रूप से संचालित इकाइयों, उत्सर्जन बिंदुओं और संदिग्ध भूमिगत निपटान गतिविधियों को दर्शाने वाली तस्वीरें और ड्रोन वीडियो दस्तावेज कर संदर्भ और आवश्यक कार्रवाई के लिए संलग्न किए गए हैं।
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निरीक्षण करने की मांग उठाई
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी), जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को जिले में संचालित सभी अवैध ब्लीचिंग कारखानों का तत्काल निरीक्षण करने की मांग की है। इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू करें। इकाइयों को तत्काल बंद करने, सील करने, बिजली आपूर्ति काटने, पर्यावरण क्षतिपूर्ति और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक अभियोजन की भी मांग की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मुद्दा कृषि क्षेत्रों में पर्यावरण कानूनों और जन स्वास्थ्य की अनदेखी करते हुए की जा रही अवैध औद्योगिक गतिविधियों पर बढ़ती चिंता को उजागर करता है।
ब्लीचिंग हाउस की लगातार जांच की जा रही है। किसी प्रकार का उल्लंघन मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।
कुलदीप, एईई, एचएसपीसीबी।