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Panipat News: एक्यूआई 225 पहुंचा, अब हर रोज बढ़ने का अनुमान
Fri, 17 Oct 2025 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 17 Oct 2025 12:55 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। पर्यावरण प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। वीरवार को एक्यूआई 225 पहुंच गया। जबकि बुधवार को एक्यूआई 207 था। शहर में औद्योगिक क्षेत्र में शाम को ही इसका असर देखने को मिला। वहीं ग्रैप-1 की शर्तों की पालना नहीं हो पा रही है। ऐसे में अगले कई दिन में एक्यूआई और भी बढ़ने का अनुमान है।
जिले में वीरवार को सुबह के समय मौसम सामान्य रहा। दोपहर बाद ही एक्यूआई बढ़ना शुरू हो गया। जिले में शाम को एक्यूआई 218 था। यह रात करीब आठ 225 पर पहुंच गया। वहीं अधिकतम तापमान 30 और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री दर्ज किया गया। हवा की गति छह किलोमीटर प्रतिघंटे रही। कृषि विज्ञान केंद्र उझा के मौसम विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि अब सुबह व शाम को ठंड लगातार बढ़ेगी। दिन के समय तापमान कुछ शुष्क रह सकता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ कुलदीप ने बताया कि ग्रैप-1 लागू किया गया है। इसकी शर्त की पालना कराई जाएगी। फैक्टरियाें में प्रदूषण फैलाने वाले कारणों का पता लगाया जाएगा।
ग्रैप-1 की धज्जियां उड़ रही
जीआरएपी पर उप-समिति ने वायु गुणवत्ता परिदृश्य, आईएमडी/आईआईटीएम पूर्वानुमान की समीक्षा के बाद मंगलवार को ग्रेप-1 लागू किया था। नियमानुसार दिल्ली एनसीआर में उद्योगों व अन्य प्रतिष्ठानों पर नजर रखी जानी थी। कोयला और लकड़ी पर प्रतिबंध रखा जाना था। इसमें होटलों, रेस्तरां और ढाबों में कोयला या लकड़ी के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाई थी। शहर में वीरवार को सुबह से शाम तक जीटी रोड किनारे ढाबों में तंदूर चलते रहे। वहीं गीता कॉलोनी रोड, सेक्टर-11 में तंदूर चले। मॉडल टाउन में रामलाल चौक के नजदीक शाम के समय सड़क किनारे चिमनी और तंदूर खुले में चलाए गए। इससे पर्यावरण प्रदूषण कम होने की बजाय उसी स्थिति में बना रहा। शहर समेत जिले में बुधवार को निर्माण कार्य चलते रहे। नियमानुसार 500 वर्ग मीटर या उससे बड़े प्लॉट पर चल रही परियोजनाओं में निर्माण गतिविधियों की अनुमति लेनी जरूरी है। इसके अलावा यहां निर्माण कार्य नियमों पर आधारित ही किया जाना है। असंध रोड व गोहाना रोड समेत शहर में कई जगह इस तरह के निर्माण चलते रहे। वाहनों पर निगरानी के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। डीजल जेनरेटर पर प्रतिबंध था। केवल आवश्यक या आपातकालीन उपयोग में ही लगाया जाना था। फैक्टरियों या अन्य स्थानों पर बुधवार को बिजली जाते ही जेनरेटर चल पड़े।
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पानीपत। पर्यावरण प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। वीरवार को एक्यूआई 225 पहुंच गया। जबकि बुधवार को एक्यूआई 207 था। शहर में औद्योगिक क्षेत्र में शाम को ही इसका असर देखने को मिला। वहीं ग्रैप-1 की शर्तों की पालना नहीं हो पा रही है। ऐसे में अगले कई दिन में एक्यूआई और भी बढ़ने का अनुमान है।
जिले में वीरवार को सुबह के समय मौसम सामान्य रहा। दोपहर बाद ही एक्यूआई बढ़ना शुरू हो गया। जिले में शाम को एक्यूआई 218 था। यह रात करीब आठ 225 पर पहुंच गया। वहीं अधिकतम तापमान 30 और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री दर्ज किया गया। हवा की गति छह किलोमीटर प्रतिघंटे रही। कृषि विज्ञान केंद्र उझा के मौसम विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि अब सुबह व शाम को ठंड लगातार बढ़ेगी। दिन के समय तापमान कुछ शुष्क रह सकता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ कुलदीप ने बताया कि ग्रैप-1 लागू किया गया है। इसकी शर्त की पालना कराई जाएगी। फैक्टरियाें में प्रदूषण फैलाने वाले कारणों का पता लगाया जाएगा।
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ग्रैप-1 की धज्जियां उड़ रही
जीआरएपी पर उप-समिति ने वायु गुणवत्ता परिदृश्य, आईएमडी/आईआईटीएम पूर्वानुमान की समीक्षा के बाद मंगलवार को ग्रेप-1 लागू किया था। नियमानुसार दिल्ली एनसीआर में उद्योगों व अन्य प्रतिष्ठानों पर नजर रखी जानी थी। कोयला और लकड़ी पर प्रतिबंध रखा जाना था। इसमें होटलों, रेस्तरां और ढाबों में कोयला या लकड़ी के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाई थी। शहर में वीरवार को सुबह से शाम तक जीटी रोड किनारे ढाबों में तंदूर चलते रहे। वहीं गीता कॉलोनी रोड, सेक्टर-11 में तंदूर चले। मॉडल टाउन में रामलाल चौक के नजदीक शाम के समय सड़क किनारे चिमनी और तंदूर खुले में चलाए गए। इससे पर्यावरण प्रदूषण कम होने की बजाय उसी स्थिति में बना रहा। शहर समेत जिले में बुधवार को निर्माण कार्य चलते रहे। नियमानुसार 500 वर्ग मीटर या उससे बड़े प्लॉट पर चल रही परियोजनाओं में निर्माण गतिविधियों की अनुमति लेनी जरूरी है। इसके अलावा यहां निर्माण कार्य नियमों पर आधारित ही किया जाना है। असंध रोड व गोहाना रोड समेत शहर में कई जगह इस तरह के निर्माण चलते रहे। वाहनों पर निगरानी के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। डीजल जेनरेटर पर प्रतिबंध था। केवल आवश्यक या आपातकालीन उपयोग में ही लगाया जाना था। फैक्टरियों या अन्य स्थानों पर बुधवार को बिजली जाते ही जेनरेटर चल पड़े।
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