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एक्यूआई फिर से रेड जोन में, प्रदेश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा पानीपत
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पानीपत। शहर की हवा फिर जहरीली हो गई है। वीरवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 361 अंक दर्ज किया गया। पीएम-2.5 तीन सौ और पीएम-10 चार सौ प्रति घन मीटर से अधिक दर्ज किया गया। वीरवार को पानीपत प्रदेश में तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। वाहनों के साथ ही औद्योगिक इकाइयों एवं जेनरेटर का धुआं, धूल व मिट्टी के कणों ने हवा को फिर से रेड जोन में ला दिया है।
स्मॉग का असर कम होने के बाद भवन निर्माण कार्यों, कोयला आधारित उद्योगों के संचालन, जेनरेटर आदि को अनुमति मिल गई है। इसके साथ ही प्रदूषण स्तर भी बढ़ गया है। वीरवार को हिसार और गुरुग्राम के बाद प्रदेश में पानीपत का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। कचरा जलाने वाले उद्योगों पर लगाम लगाने में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नाकाम साबित हुआ है। ऐसे उद्योगों को चिह्नित नहीं किया जा सका है।
शहर के बाहर चलने वाले कुछ उद्योगों के बॉयलर में कचरे को जलाया जा रहा है। कोयला जहां 14 रुपये प्रति किलोग्राम मिलता है, वहीं कचरा एक रुपये प्रति किलोग्राम में मिल जाता है। यह प्रदूषण का सबसे बड़ा कारक माना जाता है।
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पिछले एक सप्ताह का एक्यूूआई
17 दिसंबर 293
18 दिसंबर 191
19 दिसंबर 195
20 दिसंबर 184
21 दिसंबर 362
22 दिसंबर 344
23 दिसंबर 361
पीएम-2.5 अधिकतम 368 और पीएम-10 को 455 क्यूबिक मीटर दर्ज किया
वीरवार को पर्टिकुलेट मैटर-2.5 के कण अधिकतम 368 प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किए गए वहीं पीएम-10 के कण 455 प्रति क्यूबिक मीटर पाया गया। हालांकि औसत की बात करें तो पीएम-2.5 को 334 और पीएम-10 को 361 क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया।
कचरा जलाने वाले उद्योगों पर की जा रही है कार्रवाई
भवन निर्माण समेत कई कार्यों को करने की अनुमति मिल गई है। उद्योगों में कचरा जलाने वालों पर कार्रवाई जारी है। उनकी टीमें फील्ड में उद्योगों का निरीक्षण भी कर रही हैं। - कमलजीत सिंह, रिजनल ऑफिसर, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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स्मॉग का असर कम होने के बाद भवन निर्माण कार्यों, कोयला आधारित उद्योगों के संचालन, जेनरेटर आदि को अनुमति मिल गई है। इसके साथ ही प्रदूषण स्तर भी बढ़ गया है। वीरवार को हिसार और गुरुग्राम के बाद प्रदेश में पानीपत का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। कचरा जलाने वाले उद्योगों पर लगाम लगाने में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नाकाम साबित हुआ है। ऐसे उद्योगों को चिह्नित नहीं किया जा सका है।
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शहर के बाहर चलने वाले कुछ उद्योगों के बॉयलर में कचरे को जलाया जा रहा है। कोयला जहां 14 रुपये प्रति किलोग्राम मिलता है, वहीं कचरा एक रुपये प्रति किलोग्राम में मिल जाता है। यह प्रदूषण का सबसे बड़ा कारक माना जाता है।
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पिछले एक सप्ताह का एक्यूूआई
17 दिसंबर 293
18 दिसंबर 191
19 दिसंबर 195
20 दिसंबर 184
21 दिसंबर 362
22 दिसंबर 344
23 दिसंबर 361
पीएम-2.5 अधिकतम 368 और पीएम-10 को 455 क्यूबिक मीटर दर्ज किया
वीरवार को पर्टिकुलेट मैटर-2.5 के कण अधिकतम 368 प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किए गए वहीं पीएम-10 के कण 455 प्रति क्यूबिक मीटर पाया गया। हालांकि औसत की बात करें तो पीएम-2.5 को 334 और पीएम-10 को 361 क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया।
कचरा जलाने वाले उद्योगों पर की जा रही है कार्रवाई
भवन निर्माण समेत कई कार्यों को करने की अनुमति मिल गई है। उद्योगों में कचरा जलाने वालों पर कार्रवाई जारी है। उनकी टीमें फील्ड में उद्योगों का निरीक्षण भी कर रही हैं। - कमलजीत सिंह, रिजनल ऑफिसर, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड