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संशोधित: ईंट भट्टे बंद, अगले साल ईंट का रेट दोगुना होने की संभावना
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पानीपत। जीएसटी की दर पांच से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने के विरोध में ईंट भट्ठा एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल करने का फैसला किया है। इससे प्रदेश भर में जहां ईंटों के भाव बढ़े हैं, वहीं निर्माण कार्य भी प्रभावित होने लगा है। हड़ताल से पानीपत के सभी 90 ईंट भट्ठे बंद होनेे के बाद अब लोगों को यूपी से महंगी दरों पर ईंटें मंगाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
ईंट भट्ठा एसोसिएशन के बापौली खंड के प्रधान अमित कंसल ने बताया कि सरकार की नीतियों से तंग होकर ईंट-भट्ठा स्वामी एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की घोषणा की है। साथ ही आंदोलन की आगामी रूप रेखा के लिए एसोसिएशन की मीटिंग की जाएगी। उन्होंने बताया कि जीएसटी की दरें बढ़ने से एक ईंट की कीमत पांच से बढ़कर सात रुपये से भी अधिक हो गई है। जिन ईंट भट्ठों पर स्टॉक है वो प्रति हजार ईंटे जीएसटी समेत 7840 रुपये तक बेच रहे हैं। ऐसे में आमजन के लिए मकान बनाना बहुत महंगा हो गया है। यही नहीं जहां पहले से मकान निर्माण के कार्य चल रहे हैं। उनको ईंटों की कमी के कारण अपना काम रोकना पड़ रहा है। मकान स्वामियों को शामली, कैराना, बड़ौत व बागपत के ईंट भट्ठों से महंगे दामों पर ईंटें मंगानी पड़ रही है। ईंटों के बढ़े भाव से कई स्थानों पर चल रहा भवन का कार्य भी रुक गया है। जिले में ईंट भट्ठा मालिकों की हड़ताल से वहां काम करने वाले सैकड़ों श्रमिकों की रोजी रोटी पर भी संकट आन खड़ा हुआ है।
उन्होंने बताया कि ईंटों के साथ ही कोयले के रेट भी बढ़ा दिए गए हैं। पिछले वर्ष कोयला नौ से 10 हजार रुपये प्रति टन था, जो अब बढ़कर 27 हजार रुपये प्रति टन हो गई है। एक लाख ईंट को तैयार करने के लिए करीब 15 टन कोयले की जरूरत होती है। एक टन कोयले पर 16 से 17 हजार रुपये की बढ़ोतरी को पाटना उनके लिए मुश्किल है। यही कारण है कि एसोसिएशन ने बेमियादी हड़ताल का निर्णय लिया है।
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ईंट भट्ठा एसोसिएशन के बापौली खंड के प्रधान अमित कंसल ने बताया कि सरकार की नीतियों से तंग होकर ईंट-भट्ठा स्वामी एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की घोषणा की है। साथ ही आंदोलन की आगामी रूप रेखा के लिए एसोसिएशन की मीटिंग की जाएगी। उन्होंने बताया कि जीएसटी की दरें बढ़ने से एक ईंट की कीमत पांच से बढ़कर सात रुपये से भी अधिक हो गई है। जिन ईंट भट्ठों पर स्टॉक है वो प्रति हजार ईंटे जीएसटी समेत 7840 रुपये तक बेच रहे हैं। ऐसे में आमजन के लिए मकान बनाना बहुत महंगा हो गया है। यही नहीं जहां पहले से मकान निर्माण के कार्य चल रहे हैं। उनको ईंटों की कमी के कारण अपना काम रोकना पड़ रहा है। मकान स्वामियों को शामली, कैराना, बड़ौत व बागपत के ईंट भट्ठों से महंगे दामों पर ईंटें मंगानी पड़ रही है। ईंटों के बढ़े भाव से कई स्थानों पर चल रहा भवन का कार्य भी रुक गया है। जिले में ईंट भट्ठा मालिकों की हड़ताल से वहां काम करने वाले सैकड़ों श्रमिकों की रोजी रोटी पर भी संकट आन खड़ा हुआ है।
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उन्होंने बताया कि ईंटों के साथ ही कोयले के रेट भी बढ़ा दिए गए हैं। पिछले वर्ष कोयला नौ से 10 हजार रुपये प्रति टन था, जो अब बढ़कर 27 हजार रुपये प्रति टन हो गई है। एक लाख ईंट को तैयार करने के लिए करीब 15 टन कोयले की जरूरत होती है। एक टन कोयले पर 16 से 17 हजार रुपये की बढ़ोतरी को पाटना उनके लिए मुश्किल है। यही कारण है कि एसोसिएशन ने बेमियादी हड़ताल का निर्णय लिया है।
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