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Panipat News: 60 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी
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पानीपत। स्वास्थ्य विभाग ने वीरवार को जिला नागरिक अस्पताल सहित जिले के 15 केंद्रों पर प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत जांच शिविर लगाया। यहां 590 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें दस प्रतिशत हाई रिस्क डिलीवरी के दायरे में मिली। वहीं 60 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी मिली। 20 प्रतिशत महिलाओं को उच्च रक्तचाप की परेशानी मिली। 60 महिलाओं को सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से जिला नागरिक अस्पताल में रेफर किया गया है। पांच साल में डिलीवरी के दौरान 80 से अधिक गर्भवती महिलाओं की मौत हो चुकी है। इन कैंपों के बावजूद आज भी जिले की 60 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी है। नतीजा प्रीमैच्योर डिलीवरी की संख्या बढ़ गई है।
रोज औसतन तीन-चार शिशु प्रीमैच्योर पैदा हो रहे हैं। कैंप में डॉक्टर गर्भवतियों को सरकारी सेवाओं के बारे में जागरूक करते हैं ताकि सरकारी सेवाओं का फायदा उठाया जा सके। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. लिपिका ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग हर माह की नौ तारीख को मातृत्व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत जांच शिविर लगाता है। महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जच्चा बच्चा को बचाना और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं बताना है। जिले की 60 प्रतिशत से अधिक गर्भवतियों में खून की कमी है।
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सरकारी अस्पतालों में मिलती हैं ये सुविधाएं
1. सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में डिलिवरी कराने पर सरकार की ओर से गरीब परिवारों को 1500 रुपये की सहायता मिलती है।
2. जन्म के 42 दिन बाद तक नवजात व 30 दिन तक महिला को अस्पताल आने जाने के लिए फ्री एंबुलेंस की सुविधा है।
3. किसी भी आपातकाल की स्थिति में जच्चा की केयर के लिए गायनोकॉलॉजिस्ट व बच्चे के लिए बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।
वर्जन :
जिला सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि पिछले एक दो में डिलीवरी हटों को शुरू करने पर जोर दिया गया है। 15 डिलीवरी हट शुरू किए गए हैं। होम डिलीवरी अब बहुत कम हैं। महिलाओं को सरकारी सेवाओं के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। अब सामुदायिक केंद्रों में भी सिजेरियन डिलीवरी शुरू कराने का प्रयास है।
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रोज औसतन तीन-चार शिशु प्रीमैच्योर पैदा हो रहे हैं। कैंप में डॉक्टर गर्भवतियों को सरकारी सेवाओं के बारे में जागरूक करते हैं ताकि सरकारी सेवाओं का फायदा उठाया जा सके। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. लिपिका ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग हर माह की नौ तारीख को मातृत्व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत जांच शिविर लगाता है। महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जच्चा बच्चा को बचाना और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं बताना है। जिले की 60 प्रतिशत से अधिक गर्भवतियों में खून की कमी है।
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सरकारी अस्पतालों में मिलती हैं ये सुविधाएं
1. सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में डिलिवरी कराने पर सरकार की ओर से गरीब परिवारों को 1500 रुपये की सहायता मिलती है।
2. जन्म के 42 दिन बाद तक नवजात व 30 दिन तक महिला को अस्पताल आने जाने के लिए फ्री एंबुलेंस की सुविधा है।
3. किसी भी आपातकाल की स्थिति में जच्चा की केयर के लिए गायनोकॉलॉजिस्ट व बच्चे के लिए बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।
वर्जन :
जिला सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि पिछले एक दो में डिलीवरी हटों को शुरू करने पर जोर दिया गया है। 15 डिलीवरी हट शुरू किए गए हैं। होम डिलीवरी अब बहुत कम हैं। महिलाओं को सरकारी सेवाओं के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। अब सामुदायिक केंद्रों में भी सिजेरियन डिलीवरी शुरू कराने का प्रयास है।
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