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Panipat News: कई वेंटिलेटर्स में एयर सप्लाई डाउन, मरीजों को होगी दिक्कत
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पानीपत। जिला नागरिक अस्पताल में गंभीर रोगियों को 31 जुलाई से वेंटिलेटर की सेवाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी। स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि उनके पास उपलब्ध सभी 29 वेंटिलेटर दुरुस्त हैं लेकिन असल में कई वेंटिलेटर में एयर सप्लाई काफी डाउन है। ऐसे में इलाज के दौरान मरीजों को दिक्कतें आ सकती हैं। अब इन वेंटिलेटरों की जांच होगी। डॉक्टरों का कहना है कि वेंटिलेटर की सही स्थिति तब ही पता चलेगी जब मरीजों को इनकी सेवाएं मिलनी शुरू होगी।
उल्लेखनीय है कि जिला नागरिक अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में दो व आईसीयू वार्ड में छह वेंटिलेटर इंस्टॉल हैं। यहां उपलब्ध सभी 21 वेंटिलेटर की जांच होगी। आईसीयू में इंस्टॉल किए गए सभी छह वेंटिलेटर की भी जांच होगी। इन 21 वेंटिलेटर में से कुछ वेंटिलेटर अस्पताल के तृतीय तल पर बने पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट में इंस्टॉल किए जाएंगे। वहां जिन नर्सिंग ऑफिसर की ड्यूटी होगी उनको प्रशिक्षण दिया जाएगा। फिलहाल एसएनसीयू वार्ड की इंचार्ज डॉ. भावना वेंटिलेटर चलाने के लिए प्रशिक्षित हैं। इसके बाद क्रिटिकल केयर ब्लॉक भी वेंटिलेटर इंस्टॉल होने हैं। यह 50 बेड का ब्लॉक गंभीर मरीजों कें लिए बनना है। इसमें कितना वक्त लगेगा यह किसी को पता नहीं है।
कोरोना काल में सरकार व उद्यमियों की ओर से स्वास्थ्य विभाग को 29 वेंटिलेटर मिले थे। वेंटिलेटर के अभाव में जिला नागरिक अस्पताल से गंभीर रोगी रेफर होते रहे हैं, क्योंकि वेंटिलेटर के लिए आईसीयू अब सालों बाद तैयार किया जा रहा है। गंभीर रोगियों को 31 जुलाई से वेंटिलेटर की सेवाएं मिलना शुरू होगी। डॉक्टरों को सरकार की ओर से समय रहते वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण नहीं दिया गया। इसलिए वेंटिलेटर चार साल तक स्टोर रूप में व्यर्थ ही तरह पड़े रहे।
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वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा का कहना है कि नियमित तौर पर वेंटिलेटर की जांच होगी। अगर किसी वेंटिलेटर में कोई कमी है तो ठीक कराया जाएगा। वैसे सभी वेंटिलेटर की जांच हो चुकी है। फिलहाल आईसीयू में छह वेंटिलेटर इंस्टॉल किए गए हैं। बाकी वेंटिलेटर को बैकअप के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। बैकअप में 21 वेंटिलेटर रखे हैं।
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उल्लेखनीय है कि जिला नागरिक अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में दो व आईसीयू वार्ड में छह वेंटिलेटर इंस्टॉल हैं। यहां उपलब्ध सभी 21 वेंटिलेटर की जांच होगी। आईसीयू में इंस्टॉल किए गए सभी छह वेंटिलेटर की भी जांच होगी। इन 21 वेंटिलेटर में से कुछ वेंटिलेटर अस्पताल के तृतीय तल पर बने पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट में इंस्टॉल किए जाएंगे। वहां जिन नर्सिंग ऑफिसर की ड्यूटी होगी उनको प्रशिक्षण दिया जाएगा। फिलहाल एसएनसीयू वार्ड की इंचार्ज डॉ. भावना वेंटिलेटर चलाने के लिए प्रशिक्षित हैं। इसके बाद क्रिटिकल केयर ब्लॉक भी वेंटिलेटर इंस्टॉल होने हैं। यह 50 बेड का ब्लॉक गंभीर मरीजों कें लिए बनना है। इसमें कितना वक्त लगेगा यह किसी को पता नहीं है।
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कोरोना काल में सरकार व उद्यमियों की ओर से स्वास्थ्य विभाग को 29 वेंटिलेटर मिले थे। वेंटिलेटर के अभाव में जिला नागरिक अस्पताल से गंभीर रोगी रेफर होते रहे हैं, क्योंकि वेंटिलेटर के लिए आईसीयू अब सालों बाद तैयार किया जा रहा है। गंभीर रोगियों को 31 जुलाई से वेंटिलेटर की सेवाएं मिलना शुरू होगी। डॉक्टरों को सरकार की ओर से समय रहते वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण नहीं दिया गया। इसलिए वेंटिलेटर चार साल तक स्टोर रूप में व्यर्थ ही तरह पड़े रहे।
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सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा का कहना है कि नियमित तौर पर वेंटिलेटर की जांच होगी। अगर किसी वेंटिलेटर में कोई कमी है तो ठीक कराया जाएगा। वैसे सभी वेंटिलेटर की जांच हो चुकी है। फिलहाल आईसीयू में छह वेंटिलेटर इंस्टॉल किए गए हैं। बाकी वेंटिलेटर को बैकअप के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। बैकअप में 21 वेंटिलेटर रखे हैं।