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Panipat News: झगड़े में बच्चों को पति के पास छोड़ा, पति की मौत के बाद जागी ममता, अब बच्चे नहीं रहना चाहते साथ
Sun, 01 Feb 2026 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 01 Feb 2026 02:03 AM IST
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पानीपत। पति के साथ झगड़े में महिला ने बच्चों से नाता तोड़ लिया। कुछ दिनों के बाद पति की हादसे में घायल होने से मौत हुई तो मां की ममता जाग गई, लेकिन, अब दादा-दादी के साथ रह रहे बच्चों ने मां के पास जाने से इन्कार कर दिया। महिला ने महिला संरक्षण अधिकारी कार्यालय में शिकायत देकर बच्चे दिलाने की मांग की है। संरक्षण अधिकारी ने दोनों पक्षों की सुनवाई की और दोनों पक्षों में सहमति बनाने के लिए काउंसिलिंग कराई। अभी दोनों पक्षों के बीच सहमति के लिए बात चल रही है।
पानीपत की एक कॉलोनी निवासी महिला ने संरक्षण अधिकारी के कार्यालय में प्रार्थनापत्र देकर बताया कि उनका विवाह जिले के ही एक युवक के करीब 12 साल पहले हुआ था। शादी के बाद उनके दो बच्चे एक बेटी और एक बेटे का जन्म हुआ। कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच मनमुटाव होने के कारण अपने मायके चली गई और बच्चे पति के पास ही रहने लगे। महिला ने पति के खिलाफ तलाक के लिए अदालत में वाद दायर कर दिया। इसी बीच उनके पति की सड़क हादसे में घायल होने से मौत हो गई, इसके बाद वह ससुराल आई और बच्चों को लेकर मायके चली गई, लेकिन कुछ दिन बाद ही दोनों बच्चों को दादा-दादी अपने साथ ले आए।
अब दोनों बच्चे दादा-दादी के साथ ही रहते हैं। महिला ने संरक्षण अधिकारी को प्रार्थनापत्र सौंपकर बच्चे वापस दिलाने और ससुराल में रहने का प्रबंध करने की मांग की। संरक्षण अधिकारी ने दोनों पक्षों को काउंसलिंग के लिए बुलाया। बच्चे भी अपने दादा-दादी के साथ आए। जब महिला संरक्षण अधिकारी ने बच्चों से मां के साथ जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने स्पष्ट इन्कार कर दिया। बच्चों ने कहा कि जब पहले छोड़ दिया था तो अब वह उनके साथ क्यों जाएं। महिला संरक्षण अधिकारी ने दोनों पक्षों को आपस में बैठकर पूरे मामले को एक बार अपने स्तर पर सुलझाने का समय दिया है।
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महिला ने प्रार्थनापत्र देकर बच्चे वापस दिलाने की मांग की है। इस अभी दोनों पक्षों को एक बार आपस में ही समझौता करने का समय दिया है। सहमति नहीं बनने पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-रजनी गुप्ता, महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी।
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पानीपत की एक कॉलोनी निवासी महिला ने संरक्षण अधिकारी के कार्यालय में प्रार्थनापत्र देकर बताया कि उनका विवाह जिले के ही एक युवक के करीब 12 साल पहले हुआ था। शादी के बाद उनके दो बच्चे एक बेटी और एक बेटे का जन्म हुआ। कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच मनमुटाव होने के कारण अपने मायके चली गई और बच्चे पति के पास ही रहने लगे। महिला ने पति के खिलाफ तलाक के लिए अदालत में वाद दायर कर दिया। इसी बीच उनके पति की सड़क हादसे में घायल होने से मौत हो गई, इसके बाद वह ससुराल आई और बच्चों को लेकर मायके चली गई, लेकिन कुछ दिन बाद ही दोनों बच्चों को दादा-दादी अपने साथ ले आए।
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अब दोनों बच्चे दादा-दादी के साथ ही रहते हैं। महिला ने संरक्षण अधिकारी को प्रार्थनापत्र सौंपकर बच्चे वापस दिलाने और ससुराल में रहने का प्रबंध करने की मांग की। संरक्षण अधिकारी ने दोनों पक्षों को काउंसलिंग के लिए बुलाया। बच्चे भी अपने दादा-दादी के साथ आए। जब महिला संरक्षण अधिकारी ने बच्चों से मां के साथ जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने स्पष्ट इन्कार कर दिया। बच्चों ने कहा कि जब पहले छोड़ दिया था तो अब वह उनके साथ क्यों जाएं। महिला संरक्षण अधिकारी ने दोनों पक्षों को आपस में बैठकर पूरे मामले को एक बार अपने स्तर पर सुलझाने का समय दिया है।
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महिला ने प्रार्थनापत्र देकर बच्चे वापस दिलाने की मांग की है। इस अभी दोनों पक्षों को एक बार आपस में ही समझौता करने का समय दिया है। सहमति नहीं बनने पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-रजनी गुप्ता, महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी।