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जीटी बेल्ट के 125 अफसरों और क्लर्कों पर कार्रवाई
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पानीपत। जिला योजनाकार की एनओसी लिए बगैर कृषि भूमि की रजिस्टरी करने और कागजों में छेड़छाड़ कर भूमि की प्रकृति बदलने के मामले में राजस्व विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। इसमें जीटी बेल्ट के कैथल, करनाल और पानीपत के 34 तहसीलदार-नायब तहसीलदार समेत 57 पटवारियों और 34 आरसी यानी रजिस्ट्रेशन क्लर्कों को दोषी पाया गया है। राजस्व विभाग ने इन 125 अफसरों और क्लर्कों की रिपोर्ट संबंधित जिला उपायुक्तों को भेजते हुए इन पर कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में उपायुक्त सुशील सारवान का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। सरकार के आदेशानुसार और नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
रजिस्टरी फर्जीवाड़े प्रकरण पर सरकार की ओर से करवाई गई जांच में पिछले सवा चार साल के अंतराल में ऐसी करीब 9774 रजिस्ट्रियां करवाई गई थी। वहीं, इनके अलावा भूमि की प्रकृति को बदला गया था। ये जांच तीन अप्रैल 2017 से लेकर 16 अगस्त 2021 तक की गई थी। जिसकी रिपोर्ट राजस्व विभाग ने तैयार कर अब संबंधित सभी अधिकारियों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
राजस्व विभाग के आदेशों में तीनों जिलों के 34 तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को शामिल किया है। इसमें करनाल के 12, कैथल के नौ और पानीपत के 13 तहसीलदार और नायब तहसीलदार शामिल हैं। वहीं इन जमीनों की रजिस्टरी करने में तीनों जिले के 22 आरसी क्लर्क में से छह आरसी क्लर्क करनाल, पांच आरसी क्लर्क कैथल और 11 आरसी क्लर्क पानीपत के हैं। इसके अलावा भूमि की प्रकृति बदलने के मामले में तीनों जिलों से कुल 57 पटवारियों में से 23 पटवारी करनाल, 24 पटवारी कैथल और 10 पटवारी पानीपत के हैं। इनमें से अब कई अधिकारी रिटायर्ड तक हो चुके हैं और कई अधिकारी पदोन्नत हो चुके हैं।
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धारा 7-ए का किया था उल्लंघन
आरोप है कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों ने हरियाणा डेवलपमेंट एंड अर्बन रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरिया एक्ट 1975 के तहत सेक्शन 7-ए का उल्लंघन किया था। जिसमें दो कनाल से कम कृषि योग्य भूमि की बिना डीटीपी से एनओसी लिए रजिस्टरी का पंजीकरण करवाया गया था। ये भूमि वह थी, जो राजस्व रिकार्ड में नहरी, चाही और बरानी में दर्ज थी। जो कि नियम 7-ए के तहत अधिसूचित क्षेत्र की जमीन भी थी। इन तीनों जिलों में महज सवा चार वर्ष में ऐसी 9774 रजिस्ट्रियां कर दी गईं।
राजस्व विभाग की ओर से सभी जिलों के उपायुक्तों को भेजे गए पत्राचार में स्पष्ट लिखा गया है कि सभी आरसी क्लर्कों और पटवारियों को 7-ए नियम का उल्लघंन करते पाया गया है। अब सरकार आरसी क्लर्कों के स्पष्टीकरण के बाद इन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करें और नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाए। वहीं, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए आदेश दिए गए हैं। हालांकि इसमें तहसीलदार और नायब तहसीलदारों से 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण भी मांगा जा सकता है। इसके बाद कार्रवाई तय की जाएगी।
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रजिस्टरी फर्जीवाड़े प्रकरण पर सरकार की ओर से करवाई गई जांच में पिछले सवा चार साल के अंतराल में ऐसी करीब 9774 रजिस्ट्रियां करवाई गई थी। वहीं, इनके अलावा भूमि की प्रकृति को बदला गया था। ये जांच तीन अप्रैल 2017 से लेकर 16 अगस्त 2021 तक की गई थी। जिसकी रिपोर्ट राजस्व विभाग ने तैयार कर अब संबंधित सभी अधिकारियों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
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राजस्व विभाग के आदेशों में तीनों जिलों के 34 तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को शामिल किया है। इसमें करनाल के 12, कैथल के नौ और पानीपत के 13 तहसीलदार और नायब तहसीलदार शामिल हैं। वहीं इन जमीनों की रजिस्टरी करने में तीनों जिले के 22 आरसी क्लर्क में से छह आरसी क्लर्क करनाल, पांच आरसी क्लर्क कैथल और 11 आरसी क्लर्क पानीपत के हैं। इसके अलावा भूमि की प्रकृति बदलने के मामले में तीनों जिलों से कुल 57 पटवारियों में से 23 पटवारी करनाल, 24 पटवारी कैथल और 10 पटवारी पानीपत के हैं। इनमें से अब कई अधिकारी रिटायर्ड तक हो चुके हैं और कई अधिकारी पदोन्नत हो चुके हैं।
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धारा 7-ए का किया था उल्लंघन
आरोप है कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों ने हरियाणा डेवलपमेंट एंड अर्बन रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरिया एक्ट 1975 के तहत सेक्शन 7-ए का उल्लंघन किया था। जिसमें दो कनाल से कम कृषि योग्य भूमि की बिना डीटीपी से एनओसी लिए रजिस्टरी का पंजीकरण करवाया गया था। ये भूमि वह थी, जो राजस्व रिकार्ड में नहरी, चाही और बरानी में दर्ज थी। जो कि नियम 7-ए के तहत अधिसूचित क्षेत्र की जमीन भी थी। इन तीनों जिलों में महज सवा चार वर्ष में ऐसी 9774 रजिस्ट्रियां कर दी गईं।
राजस्व विभाग की ओर से सभी जिलों के उपायुक्तों को भेजे गए पत्राचार में स्पष्ट लिखा गया है कि सभी आरसी क्लर्कों और पटवारियों को 7-ए नियम का उल्लघंन करते पाया गया है। अब सरकार आरसी क्लर्कों के स्पष्टीकरण के बाद इन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करें और नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाए। वहीं, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए आदेश दिए गए हैं। हालांकि इसमें तहसीलदार और नायब तहसीलदारों से 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण भी मांगा जा सकता है। इसके बाद कार्रवाई तय की जाएगी।