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आरोपी दीपक की मां बोली- दोनों बहनों ने बेटे को फंसाया
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पानीपत। आरोपी दीपक की मां संतोष।
- फोटो : Panipat
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पानीपत। ‘‘भारत नगर निवासी दोनों बहन सोनू और उषा ने मिलकर मेरे बेटे दीपक को फंसाया है। अब उषा उससे एक और हत्या कराना चाहती थी, जबकि वह मना कर रहा था। बेटा इस दलदल से निकलना चाहता था, उसने पहले फंदा लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया और फिर नहर में छलांग लगाने तक चला गया था।’’ ये आरोप दीपक की मां संतोष ने बातचीत में लगाए।
जींद के सफीदों के गांव करसिंधू संतोष पत्नी सूरजभान ने बताया कि उसके चार बच्चे हैं। इनमें दो बेटी और दो बेटे है। दीपक तीसरे और अनिल सबसे छोटा बेटा है। दीपक की आठ साल पहले शादी हुई थी, लेकिन कोई संतान नहीं हुई। वह पांच साल से ही उषा और उसके पति राजू के पास आता-जाता रहता था। दो साल से गांव में आना जाना छोड़कर, अर्जुन नगर में एक किराये के कमरे पर रहने लग गया था। गत 13 जनवरी को उषा ने उसके पास कॉल की और कहा कि तुम्हारा बेटा फंदा लगाकर आत्महत्या करना चाहता है।
सूचना मिलते ही पति सूरजभान के साथ वह उषा के घर पहुंच गए। बेटा आत्महत्या की जिद पर अड़ा हुआ था। उन्होंने समझाया तो वह मान गया और उसे अर्जुन नगर स्थित उसके कमरे पर भेज दिया। इसके बाद 14 जनवरी को सुबह बेटे दीपक की कॉल आई। वह कहने लगा- ‘‘मां! मैं नहर में छलांग लगाकर मरने जा रहा हूं, मुझ पर दोनों बहनों का दबाव बढ़ चुका है, मैैं एक हत्या कर चुका हूं, दूसरी हत्या नहीं करना चाहता। उसका फोन कमरे पर ही रखा है।’’ यह बात सुनी तो वे दौड़ पड़े। छोटे बेटे अनिल ने नहर पर जाकर तलाश किया और वह बेटे के कमरे पर पहुंचे। दीपक का फोन मिला, लेकिन दीपक का कोई सुराग नहीं लगा। 15 जनवरी को दीपक गांव करसिंधू आया और पूरे मामले की जानकारी दी, फिर चला गया।
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हत्या के बाद रचा ड्रामा, पति की फोटो पर टांगा हार
प्लानिंग के तहत सोनू अपने पति अशोक और तीनों बच्चे बड़ी बेटा रवि, मंझली बेटी अंजलि और सबसे छोटे बेटे इंशू के साथ सितंबर में भारत नगर से अर्जुन नगर में किराये के कमरे में रहने के लिए चली गई थी। लोगों को किराये पर जाने का कारण बताया कि उनके मकान में बरसाती पानी घुस गया है। वहीं से पति को मौत के घाट उतरवाया और फिर भारत नगर में आकर रहने लगी। पति की फोटो बनवाई और उस पर हार टांग दिया, पड़ोसियों ने पूछा तो बताया कि उसके पति की बीमारी से मौत हो गई।
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जींद के सफीदों के गांव करसिंधू संतोष पत्नी सूरजभान ने बताया कि उसके चार बच्चे हैं। इनमें दो बेटी और दो बेटे है। दीपक तीसरे और अनिल सबसे छोटा बेटा है। दीपक की आठ साल पहले शादी हुई थी, लेकिन कोई संतान नहीं हुई। वह पांच साल से ही उषा और उसके पति राजू के पास आता-जाता रहता था। दो साल से गांव में आना जाना छोड़कर, अर्जुन नगर में एक किराये के कमरे पर रहने लग गया था। गत 13 जनवरी को उषा ने उसके पास कॉल की और कहा कि तुम्हारा बेटा फंदा लगाकर आत्महत्या करना चाहता है।
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सूचना मिलते ही पति सूरजभान के साथ वह उषा के घर पहुंच गए। बेटा आत्महत्या की जिद पर अड़ा हुआ था। उन्होंने समझाया तो वह मान गया और उसे अर्जुन नगर स्थित उसके कमरे पर भेज दिया। इसके बाद 14 जनवरी को सुबह बेटे दीपक की कॉल आई। वह कहने लगा- ‘‘मां! मैं नहर में छलांग लगाकर मरने जा रहा हूं, मुझ पर दोनों बहनों का दबाव बढ़ चुका है, मैैं एक हत्या कर चुका हूं, दूसरी हत्या नहीं करना चाहता। उसका फोन कमरे पर ही रखा है।’’ यह बात सुनी तो वे दौड़ पड़े। छोटे बेटे अनिल ने नहर पर जाकर तलाश किया और वह बेटे के कमरे पर पहुंचे। दीपक का फोन मिला, लेकिन दीपक का कोई सुराग नहीं लगा। 15 जनवरी को दीपक गांव करसिंधू आया और पूरे मामले की जानकारी दी, फिर चला गया।
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प्लानिंग के तहत सोनू अपने पति अशोक और तीनों बच्चे बड़ी बेटा रवि, मंझली बेटी अंजलि और सबसे छोटे बेटे इंशू के साथ सितंबर में भारत नगर से अर्जुन नगर में किराये के कमरे में रहने के लिए चली गई थी। लोगों को किराये पर जाने का कारण बताया कि उनके मकान में बरसाती पानी घुस गया है। वहीं से पति को मौत के घाट उतरवाया और फिर भारत नगर में आकर रहने लगी। पति की फोटो बनवाई और उस पर हार टांग दिया, पड़ोसियों ने पूछा तो बताया कि उसके पति की बीमारी से मौत हो गई।