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संत को सदैव सात्विक व्यवहार करना चाहिए : उपेंद्र मुनि
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संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। स्थानीय जैन स्थानक में चातुर्मास प्रवास के दौरान धर्म प्रचार करते हुए जैन मुनि उपेंद्र ने संतों को सदा सात्विक व्यवहार करने की बात कही जिससे समाज में संतों का सम्मान बना रहे। उन्होंने कहा कि जो पुरुष अपने बीवी-बच्चों की रक्षा नहीं कर सकता। जो देश धर्म व जात-पात की रक्षा नहीं कर सकता। जो किसी के काम नहीं आ सकता वो पुरुष किसी काम का नहीं है। मुनि ने कहा कि वो श्रावक भी किसी काम का नहीं जिसमें श्रद्धा, कर्मठ व विवेक नहीं। जो अणु व्रतों की आराधना नहीं करता। साधुओं की सेवा नहीं करता। धर्म के प्रचार प्रसार के लिए तन-मन धन की शक्ति का खर्च नहीं करता। जो सामाजिक व्यावहारिक-पारिवारिक समझ नहीं रखता जिसमें हेय, जय उपादेय का कुछ बोध नहीं है। जो आत्म तत्व से अनभिज्ञ है। जड़ तत्वों के पीछे जो लगा रहता है वो श्रावक भी किसी काम का नहीं।
उन्होंने कहा कि संत भी किसी काम का नहीं। क्योंकि लोग संतों के प्रति श्रद्धा रखते हैं। इसलिए लोग संतों के व्यवहार पक्ष की ओर ज्यादा ध्यान देते हैं। वैसे भी प्रत्यक्ष दृष्टिगोचर होने वाली चीज व्यवहार है। संत को सदैव सात्विक व्यवहार के लिए जागरूक रहना चाहिए।
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समालखा। स्थानीय जैन स्थानक में चातुर्मास प्रवास के दौरान धर्म प्रचार करते हुए जैन मुनि उपेंद्र ने संतों को सदा सात्विक व्यवहार करने की बात कही जिससे समाज में संतों का सम्मान बना रहे। उन्होंने कहा कि जो पुरुष अपने बीवी-बच्चों की रक्षा नहीं कर सकता। जो देश धर्म व जात-पात की रक्षा नहीं कर सकता। जो किसी के काम नहीं आ सकता वो पुरुष किसी काम का नहीं है। मुनि ने कहा कि वो श्रावक भी किसी काम का नहीं जिसमें श्रद्धा, कर्मठ व विवेक नहीं। जो अणु व्रतों की आराधना नहीं करता। साधुओं की सेवा नहीं करता। धर्म के प्रचार प्रसार के लिए तन-मन धन की शक्ति का खर्च नहीं करता। जो सामाजिक व्यावहारिक-पारिवारिक समझ नहीं रखता जिसमें हेय, जय उपादेय का कुछ बोध नहीं है। जो आत्म तत्व से अनभिज्ञ है। जड़ तत्वों के पीछे जो लगा रहता है वो श्रावक भी किसी काम का नहीं।
उन्होंने कहा कि संत भी किसी काम का नहीं। क्योंकि लोग संतों के प्रति श्रद्धा रखते हैं। इसलिए लोग संतों के व्यवहार पक्ष की ओर ज्यादा ध्यान देते हैं। वैसे भी प्रत्यक्ष दृष्टिगोचर होने वाली चीज व्यवहार है। संत को सदैव सात्विक व्यवहार के लिए जागरूक रहना चाहिए।
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