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पंच प्यारों की अगुवाई में दिल्ली से रवाना हुआ कीर्तन
Updated Fri, 24 Nov 2017 01:10 AM IST
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दिल्ली से अमृतसर जा रहे कीर्तन जत्थे का जोरदार स्वागत
फोटो-9
समालखा। गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली से अमृतसर जा रहे नगर कीर्तन जत्थे का गांव पट्टीकल्याणा के पास सेवंटी माइल स्टोन ढाबे पर जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान जत्थे में शामिल पंच प्यारों को ढाबा मालिक सरदार रेशम सिंह, सरदार हरवंश सिंह और संगत ने फूलमालाएं पहनाकर पुष्प वर्षा की।
रेशम सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने कश्मीरी पंडितों तथा अन्य हिंदुओं को बलपूर्वक मुसलमान बनाने का विरोध किया। 1675 में मुगल शासक ने उन्हें इस्लाम कबूल करने को कहा, लेकिन गुरुजी ने कहा कि शीश कटा सकते हैं, लेकिन केश नहीं। गुरुद्वारा शीशगंज साहिब तथा गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब उनके बलिदान को स्मरण कराते हैं। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर जी का स्थान अद्वितीय हैं। ढाबे पर पहुंचे जत्थे को चाय नाश्ता, भोजन की सेवा दी गई। इस दौरान संगत गुरु का कीर्तन भी कर रही थी। इस अवसर पर जसपाल सिंह, मनप्रीत सिंह, सुरेंद्र सिंह, हैप्पी सिंह, सुरेश, गौतम, लोकेश गांधी, श्रवण व राकेश ने जत्थे की सेवा की।
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समालखा। गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली से अमृतसर जा रहे नगर कीर्तन जत्थे का गांव पट्टीकल्याणा के पास सेवंटी माइल स्टोन ढाबे पर जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान जत्थे में शामिल पंच प्यारों को ढाबा मालिक सरदार रेशम सिंह, सरदार हरवंश सिंह और संगत ने फूलमालाएं पहनाकर पुष्प वर्षा की।
रेशम सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने कश्मीरी पंडितों तथा अन्य हिंदुओं को बलपूर्वक मुसलमान बनाने का विरोध किया। 1675 में मुगल शासक ने उन्हें इस्लाम कबूल करने को कहा, लेकिन गुरुजी ने कहा कि शीश कटा सकते हैं, लेकिन केश नहीं। गुरुद्वारा शीशगंज साहिब तथा गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब उनके बलिदान को स्मरण कराते हैं। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर जी का स्थान अद्वितीय हैं। ढाबे पर पहुंचे जत्थे को चाय नाश्ता, भोजन की सेवा दी गई। इस दौरान संगत गुरु का कीर्तन भी कर रही थी। इस अवसर पर जसपाल सिंह, मनप्रीत सिंह, सुरेंद्र सिंह, हैप्पी सिंह, सुरेश, गौतम, लोकेश गांधी, श्रवण व राकेश ने जत्थे की सेवा की।
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