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कोरोना से 493 ने गंवाई जान, आठ डॉक्टर भी ‘शहीद’

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Dec 2021 01:24 AM IST
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493 lost their lives to Corona, eight doctors also 'martyr'
पानीपत। कोरोना से हुई मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार करते हुए जन सेवा दल के सदस्य चमन गुलाटी व कपिल म? - फोटो : Panipat
पानीपत। अक्तूबर 2020 में कोरोना संक्रमण कंट्रोल होने के बाद पहली जनवरी 2021 से ही कोरोना संक्रमण ने जिले को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया था। नए साल के पहले दिन जिले में कोरोना के नए 20 मामले मिलने से सनसनी फैल गई थी। एक व्यक्ति की नए वर्ष के आगमन पर कोरोना से मौत भी हो गई थी। इस साल 493 लोगों ने कोरोना से जान गंवाई। इनमें मरीजों की जान बचाने की कोशिश करने वाले आठ डॉक्टर भी शामिल हैं।
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इससे पूर्व 2020 में कोरोना से 148 लोग अपनी जान गवां चुके थे। कुल मिलकर कहें तो अब तक 641 लोगों का जीवन कोरोना संक्रमण लील चुका है। इनमें पानीपत के वे आठ डॉक्टर भी शामिल हैं, जो लोगों की जान बचाते हुए संक्रमण की चपेट में आ गए थे। इस साल अब तक कोरोना के 20,587 केस दर्ज किए गए। इनमें से बीस हजार से ज्यादा लोगों को डॉक्टरों ने बचा लिया। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में अब तक कोरोना के 31,121 केस मिल चुके हैं। जिले में साढ़े पांच लाख लोग अपनी कोरोना जांच करवा चुके हैं।
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इन मामलों ने सबकी आंखें कर दी थी नम
दिल्ली के उत्तम नगर निवासी मां व उसके दो सब इंस्पेक्टर बेटे कोरोना संक्रमित हो गए थे। पूरे एनसीआर में ऑक्सीजन की किल्लत इस प्रकार थी कि उन्हें दिल्ली, नोयडा, सोनीपत व गाजियाबाद में ऑक्सीजन बेड नहीं मिला। उन्होंने किसी तरह से पानीपत में ऑक्सीजन बेड लिया। तीनों तीन दिन यहां दाखिल रहे। 7 मई को मां ने कोरोना से दम तोड़ दिया और 7 मई की ही रात दोनों भाइयों की कोरोना से मौत हो गई। तीनों चिंताएं एक साथ जली और उनके घर पर हमेशा के लिए ताला लटक गया।
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अपनी पत्नी को नहीं बचा पाए डॉक्टर
समालखा में कार्यरत डॉ. अमन की पत्नी मई माह में कोरोना संक्रमित हो गईं। वो आठ साल के बच्चे की मां थी। जैसे-तैसे उन्हें प्राइवेट अस्पताल में ऑक्सीजन बेड मिला, लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें नहीं बचा पाए। मृतका भी डॉक्टर थीं। दोनों ने प्रेम विवाह किया था।
सास-ससुर के लिए घर में ही बना दिया था आईसीयू
आईबीएम अस्पताल के संचालक डॉ. गौरव बताते हैं कि वो कोरोना का वो दौर बेहद भयानक था। लोग सड़कों पर मर रहे थे। लोग बेड के लिए लाखों खर्च करने के लिए तैयार थे। उनके अस्पताल के सभी बेड भर चुके थे। वो भी पहले कोरोना संक्रमित हो चुके थे। उन्होंने अपने सास व ससुर को बचाने के लिए घर में ही आईसीयू बना दिया था, बावजूद इसके वो अपने ससुर को नहीं बचा पाए।

सिविल अस्पताल के आठ डॉक्टर समेत 20 कर्मी हो गए थे संक्रमित
कोरोना के दौर में सिविल अस्पताल के भी आठ डॉक्टर एक साथ संक्रमित हो गए थे। उनके संपर्क में आने से 20 कर्मी भी संक्रमित हो गए थे। उनके संक्रमित होने के बाद डिप्टी सिविल सर्जन व एमएस ने लोगों की जान बचाने के लिए ओपीडी शुरू कर दी थी।
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