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शनिवार को बंद रही 450 डाइंग यूनिट, आज भी उद्योगों पर लगा रहेगा ताला

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jun 2022 02:24 AM IST
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450 dyeing units remained closed on Saturday, industries will remain locked even today
पानीपत। इंडस्ट्री का सिंबोलिक फोटो - फोटो : Panipat
पानीपत। कोयले व कैमिकल के दाम बढ़ने से आहत डायर्स ने शनिवार व रविवार को उद्योग बंद रखने का फैसला किया है। इसी फैसले के कारण शनिवार को शहर के 450 डाइंग हाउस बंद रहे हैं। उद्यमियों ने लेबर की माह में चार अतिरिक्त छुट्टी कर दी है। अब इन चार छुट्टियों का वेतन भी कटेगा। माह में चार दिन डाइंग यूनिट बंद होने से कपड़ा उद्यमियों को भी माल देरी से व महंगा मिलेेगा। डाइंग यूनिट को ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं, क्योंकि एक्सपोर्ट कम हो गया है। कोयले का रेट छह से बढ़कर 16 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। केमिकल के रेट 100 से बढ़कर 200 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है।
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डाइंग में इस्तेमाल होने वाले सभी पांचों केमिकलों के दाम दोगुने हो गए हैं। लिक्विड ब्रीच का रेट 2 से बढ़कर 8 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। ऐसे में डाई करना उद्यमियों के लिए तीन गुना महंगा हो रहा है। डायर्स भी अपने रेट 20 प्रतिशत बढ़ा दिए हैं। इससे टेक्सटाइल कारोबार को झटका लग रहा है। डाइंग के रेट बढ़ने से कपड़े के रेट भी बढ़ेंगे।
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उद्यमियों ने खर्च कम करने के लिए सप्ताह में दो दिन डाइंग यूनिट बंद करने का निर्णय लिया है। अब हर शनिवार और रविवार को उद्योग बंद रहेंगे। लेबर की माह में चार दिन की सैलरी काटी जाएगी। 25 हजार करोड़ का डाइंग कारोबार 50 प्रतिशत तक कम हो गया है।
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धागा लगभग तीन गुना महंगा
रूस-यूक्रेन युद्ध से टेक्सटाइल नगरी को इस वर्ष रूई की बढ़ी कीमतों के कारण करोड़ों का नुकसान हो रहा है। पिछले वर्ष के 120 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर रूई के दाम 330 रुपए तक पहुंच गया है। इससे कॉटन यार्न यानी धागा महंगा हो गया है। इसका सीधा असर कपड़ा उद्योग पर पड़ रहा है। यार्न के दाम बढ़ने से विदेशों से मिलने वाले ऑर्डर कैंसिल हो रहे हैं।
पानीपत के निर्यात में इस वर्ष 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में निर्यात 20 हजार करोड़ तक पहुंच गया था। इस साल यह महज 12 हजार करोड़ पर ही अटक सकता है। यार्न के बढ़े दामों से सीधा 8 हजार करोड़ का नुकसान हो रहा है। यूरोपियन देशों के खरीदार माल को पांच-छह माह बाद भेजने के लिए ई-मेल कर रहे हैं। ऐसे में निर्यातक काफी परेशान हैं।

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क्या करें हम मजूबर हैं: राणा
पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रधान भीम राणा का कहना है कि केमिकल और कोयले के रेट कई गुना बढ़ गए हैं। लेबर की सैलरी भी बढ़ गई है। लेबर छुट्टियों में अपने घर चली गई है। काम बिल्कुल धीमा हो गया है। डाइंग दोगुनी हो गई है। इसलिए उनको भी अपने रेट बढ़ाने पड़ रहे हैं। सप्ताह में दो दिन उद्योगों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। लेबर का 4 दिन का वेतन कटेगा।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
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