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किसानों की परेशानी बनी 62 साल पुरानी मिल : 60 दिनों में
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किसानों की परेशानी बनी 62 साल पुरानी मिल
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। इलाके की 62 साल पुरानी मिल किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। इस बार के सीजन में एक तो मिल देरी से शुरू हुई, दूसरा शुरू होने के बाद कई घंटे बंद भी रह चुकी है। इस सीजन में मिल को चलते हुए 60 दिन हो चुके हैं, लेकिन इतने समय में केवल 8 लाख 83 हजार क्विंटल गन्ने की ही पिराई हो सकी है। 60 दिनों में से 141 घंटे मिल बंद भी रह चुकी है। मिल की रोजाना औसत पिराई क्षमता 18 हजार क्विंटल थी, जो इस सीजन में 14 हजार 716 क्विंटल रह गई है। 18 हजार प्रतिदिन के हिसाब से अब तक दस लाख 80 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई होनी थी। वहीं, पुरानी शुगर मिल होने के कारण रिकवरी भी घट रही है, एक क्विंटल गन्ने से 11 किलो तक की रिकवरी का टारगेट रहता है, लेकिन वह भी औसतन 9.81 किलो प्रति क्विंटल ही रह गई है। रविवार को रिकवरी 10.20 किलो प्रति क्विंटल चल रही थी। वहीं, मिल द्वारा 15 दिसंबर तक का भुगतान किया गया है। किसानों का 7 करोड़ 59 लाख रुपये का भुगतान हो चुका है। अब इससे आगे के भुगतान का एस्टिमेट बनाया जा रहा है।
मार्च अप्रैल तक चलना होती है मिल
किसानों का कहना है कि शुगर मिल आमतौर पर मार्च अप्रैल तक चलती है, लेकिन पुरानी मिल होने के कारण पिछले वर्ष जून तक चली, जिस कारण सरकार व किसान दोनों को नुकसान झेलना पड़ा। सरकार व किसान पिछले तीन साल में इतना नुकसान झेल चुके हैं कि इतमें तो नई मिल तैयार हो जाती। किसान सुरेंद्र नांदल ने कहा कि मिल में रेलवे के इंजन लगे हुए है, जो रेलवे ने भी कब के प्रयोग करने छोड़ दिये है।
किसानों को नए मिल की दरकार :
गन्ना किसानों ने बताया कि 18 अक्तूबर 2015 को मुख्यमंत्री ने नए मिल का शिलान्यास किया था और दावा किया था कि दो साल के अंदर मिल बनकर तैयार हो जाएगी, लेकिन इस बात को पूरे तीन साल ढाई माह बीत चुके हैं। परंतु आज तक मिल निर्माण के लिए एक ईंट तक नहीं रखी गई है। किसानों की समस्या का समाधान नई शुगर मिल ही है।
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किसान एक फरवरी से मिल गेट पर धरना देंगे
एक फरवरी से शुगर मिल गेट पर प्रतिदिन पांच किसान सांकेतिक धरने पर बैठेंगे। यह धरना दस फरवरी तक चलेगा। फिर भी सरकार नई शुगर मिल का काम शुरू नहीं करवाती है तो 12 फरवरी को किसानों द्वारा गोहाना रोड को पूरी तरह से जाम किया जाएगा। जिसके लिए सरकार खुद जिम्मेदार होगी।
पानीपत शुगर मिल हरियाणा की सबसे पुरानी मिल है। पुरानी मशीनें होने के कारण थोड़ी बहुत दिक्कतें आती रहती है। परंतु इतनी पुरानी मशीनें होने के बावजूद भी मिल उम्मीद से सही चल रही है। इस साल अब तक आठ लाख 83 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई हो चुकी है, बीच-बीच में कई बार तो दिन में 18.5 हजार क्विंटल गन्ने की भी पिराई हुई है।
आलोक, शुगर मिल के मैन्युफैक्चरिंग केमिस्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। इलाके की 62 साल पुरानी मिल किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। इस बार के सीजन में एक तो मिल देरी से शुरू हुई, दूसरा शुरू होने के बाद कई घंटे बंद भी रह चुकी है। इस सीजन में मिल को चलते हुए 60 दिन हो चुके हैं, लेकिन इतने समय में केवल 8 लाख 83 हजार क्विंटल गन्ने की ही पिराई हो सकी है। 60 दिनों में से 141 घंटे मिल बंद भी रह चुकी है। मिल की रोजाना औसत पिराई क्षमता 18 हजार क्विंटल थी, जो इस सीजन में 14 हजार 716 क्विंटल रह गई है। 18 हजार प्रतिदिन के हिसाब से अब तक दस लाख 80 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई होनी थी। वहीं, पुरानी शुगर मिल होने के कारण रिकवरी भी घट रही है, एक क्विंटल गन्ने से 11 किलो तक की रिकवरी का टारगेट रहता है, लेकिन वह भी औसतन 9.81 किलो प्रति क्विंटल ही रह गई है। रविवार को रिकवरी 10.20 किलो प्रति क्विंटल चल रही थी। वहीं, मिल द्वारा 15 दिसंबर तक का भुगतान किया गया है। किसानों का 7 करोड़ 59 लाख रुपये का भुगतान हो चुका है। अब इससे आगे के भुगतान का एस्टिमेट बनाया जा रहा है।
मार्च अप्रैल तक चलना होती है मिल
किसानों का कहना है कि शुगर मिल आमतौर पर मार्च अप्रैल तक चलती है, लेकिन पुरानी मिल होने के कारण पिछले वर्ष जून तक चली, जिस कारण सरकार व किसान दोनों को नुकसान झेलना पड़ा। सरकार व किसान पिछले तीन साल में इतना नुकसान झेल चुके हैं कि इतमें तो नई मिल तैयार हो जाती। किसान सुरेंद्र नांदल ने कहा कि मिल में रेलवे के इंजन लगे हुए है, जो रेलवे ने भी कब के प्रयोग करने छोड़ दिये है।
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किसानों को नए मिल की दरकार :
गन्ना किसानों ने बताया कि 18 अक्तूबर 2015 को मुख्यमंत्री ने नए मिल का शिलान्यास किया था और दावा किया था कि दो साल के अंदर मिल बनकर तैयार हो जाएगी, लेकिन इस बात को पूरे तीन साल ढाई माह बीत चुके हैं। परंतु आज तक मिल निर्माण के लिए एक ईंट तक नहीं रखी गई है। किसानों की समस्या का समाधान नई शुगर मिल ही है।
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किसान एक फरवरी से मिल गेट पर धरना देंगे
एक फरवरी से शुगर मिल गेट पर प्रतिदिन पांच किसान सांकेतिक धरने पर बैठेंगे। यह धरना दस फरवरी तक चलेगा। फिर भी सरकार नई शुगर मिल का काम शुरू नहीं करवाती है तो 12 फरवरी को किसानों द्वारा गोहाना रोड को पूरी तरह से जाम किया जाएगा। जिसके लिए सरकार खुद जिम्मेदार होगी।
पानीपत शुगर मिल हरियाणा की सबसे पुरानी मिल है। पुरानी मशीनें होने के कारण थोड़ी बहुत दिक्कतें आती रहती है। परंतु इतनी पुरानी मशीनें होने के बावजूद भी मिल उम्मीद से सही चल रही है। इस साल अब तक आठ लाख 83 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई हो चुकी है, बीच-बीच में कई बार तो दिन में 18.5 हजार क्विंटल गन्ने की भी पिराई हुई है।
आलोक, शुगर मिल के मैन्युफैक्चरिंग केमिस्ट