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बगैर भौतिक सत्यापन किए पार्क निर्माण के एवज में किया 31 लाख का भुगतान, होगी जांच
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निगम ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ( हुडा) की जमीन पर बने हुडा के पार्क पर ही 31 लाख रुपये खर्च करके पार्क बना दिया। निगम अधिकारियों ने बगैर सत्यापन ठेकेदार को पूरा भुगतान भी कर दिया। मौके पर इस पार्क में झाड़ियां और बड़ी-बड़ी घास ही हैं। अब इसकी जांच कराई जाएगी।
इस गड़बड़ी का पता मंगलवार को तब लगा जब सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट सेक्टर- 13-17 में अंसल के गेट नंबर-1 के पास बने पार्क का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां पहले हुडा ने पार्क बनाया था और इसी पार्क के दोबारा निर्माण का नगर निगम ने टेंडर दे दिया। 31 लाख रुपये का एस्टीमेट बनाकर टेंडर लगाया गया। पार्क के निर्माण काम पूरा होने के बाद निगम अधिकारियों ने मैनेजमेंट बुक पर काम पूरा होने और सही होने के हस्ताक्षर तक किए। करीब दो सप्ताह पहले ठेकेदार को 31 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। पार्क में झाड़ियां तो मिली हीं, पार्षद की सिफारिश पर लगाए गए सीमेंट के बेंच भी टूटे मिले। टावर लाइट खराब मिली। सबमर्सिबल तो लगा मिला, लेकिन उसमें बिजली कनेक्शन ही नहीं था। इस पर सीनियर डिप्टी मेयर ने निगम अधिकारियों, पार्षद और ठेकेदार को मौके पर बुलाया और पूछताछ की।
सीनियर डिप्टी मेयर के मुताबिक, ठेकेदार ने बताया कि निगम ने पार्क के निर्माण का टेंडर उनकी कंपनी को दिया लेकिन रखरखाव का टेंडर नहीं दिया गया। ठेकेदार ने कहा कि उसके टेंडर में शामिल सभी काम पूरे किए हैं। इसके अलावा अगर और भी काम कहेंगे तो वह पूरा करके देगा। इसी क्रम में वार्ड नंबर एक पार्षद पति सुरेंद्र ने बताया कि पार्क के काम पूरा होने की बात उन्होंने भी लिखकर दिया था, लेकिन पार्क में कई काम अधूरे थे। इस पर ठेकेदार ने आश्वासन दिया था कि काम पूरे करके देगा लेकिन कोई काम नहीं कराया गया। इनके अलावा नगर निगम के एमई विनोद गोयल ने कहा कि पार्क का निर्माण सही हुआ है। केवल घास उगी है, इसे कटवा दिया जाएगा।
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निगम के टेंडर, वर्क आर्डर और मैनेजमेंट बुक से खुलेंगी परतें
हुडा से पार्क निर्माण का विवरण लिया जाएगा। हुडा ने इस पार्क पर कितना खर्च किया था। इसके बाद निगम ने इस पार्क पर 31 लाख रुपये का खर्च क्यों किया। अगर खर्च करना ही था तो सही काम पर क्यों नहीं किया गया। निगम के टेंडर, मैनेजमेंट बुक और वर्क आर्डर का विवरण लेकर पूरे मामले की गहनता से जांच की जाएगी तब इस गड़बड़ी की परतें खुलेंगी। इस तरह से जनता के पैसे को बेकार नहीं होने दिया जाएगा। 31 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी पार्क बदतर हालत में हैं। यह किसी के काम नहीं आ रहा तो बनाया क्यों गया। - दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, नगर निगम।
पहले भी पार्क के नाम पर हो चुकी है करोड़ों की गड़बड़ी
इससे पहले भी निगम कई बार पार्क के नाम पर करोड़ों की गड़बड़ी सामने आ चुका है। मलिक पेट्रोल पंप से लेकर मित्तल मॉल रोड पर बने पार्क पर भी करोड़ों रुपये की गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं। वहीं, किला क्षेत्र में भी लाखों रुपये का फव्वारा आज तक नहीं चल पाया है। कृष्णपुरा में भी पार्क का घोटाला सामने आ चुका है, जिसमें निगम अधिकारियों ने कागजों में ओपन जिम चालू कर दिया था।
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इस गड़बड़ी का पता मंगलवार को तब लगा जब सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट सेक्टर- 13-17 में अंसल के गेट नंबर-1 के पास बने पार्क का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां पहले हुडा ने पार्क बनाया था और इसी पार्क के दोबारा निर्माण का नगर निगम ने टेंडर दे दिया। 31 लाख रुपये का एस्टीमेट बनाकर टेंडर लगाया गया। पार्क के निर्माण काम पूरा होने के बाद निगम अधिकारियों ने मैनेजमेंट बुक पर काम पूरा होने और सही होने के हस्ताक्षर तक किए। करीब दो सप्ताह पहले ठेकेदार को 31 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। पार्क में झाड़ियां तो मिली हीं, पार्षद की सिफारिश पर लगाए गए सीमेंट के बेंच भी टूटे मिले। टावर लाइट खराब मिली। सबमर्सिबल तो लगा मिला, लेकिन उसमें बिजली कनेक्शन ही नहीं था। इस पर सीनियर डिप्टी मेयर ने निगम अधिकारियों, पार्षद और ठेकेदार को मौके पर बुलाया और पूछताछ की।
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सीनियर डिप्टी मेयर के मुताबिक, ठेकेदार ने बताया कि निगम ने पार्क के निर्माण का टेंडर उनकी कंपनी को दिया लेकिन रखरखाव का टेंडर नहीं दिया गया। ठेकेदार ने कहा कि उसके टेंडर में शामिल सभी काम पूरे किए हैं। इसके अलावा अगर और भी काम कहेंगे तो वह पूरा करके देगा। इसी क्रम में वार्ड नंबर एक पार्षद पति सुरेंद्र ने बताया कि पार्क के काम पूरा होने की बात उन्होंने भी लिखकर दिया था, लेकिन पार्क में कई काम अधूरे थे। इस पर ठेकेदार ने आश्वासन दिया था कि काम पूरे करके देगा लेकिन कोई काम नहीं कराया गया। इनके अलावा नगर निगम के एमई विनोद गोयल ने कहा कि पार्क का निर्माण सही हुआ है। केवल घास उगी है, इसे कटवा दिया जाएगा।
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निगम के टेंडर, वर्क आर्डर और मैनेजमेंट बुक से खुलेंगी परतें
हुडा से पार्क निर्माण का विवरण लिया जाएगा। हुडा ने इस पार्क पर कितना खर्च किया था। इसके बाद निगम ने इस पार्क पर 31 लाख रुपये का खर्च क्यों किया। अगर खर्च करना ही था तो सही काम पर क्यों नहीं किया गया। निगम के टेंडर, मैनेजमेंट बुक और वर्क आर्डर का विवरण लेकर पूरे मामले की गहनता से जांच की जाएगी तब इस गड़बड़ी की परतें खुलेंगी। इस तरह से जनता के पैसे को बेकार नहीं होने दिया जाएगा। 31 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी पार्क बदतर हालत में हैं। यह किसी के काम नहीं आ रहा तो बनाया क्यों गया। - दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, नगर निगम।
पहले भी पार्क के नाम पर हो चुकी है करोड़ों की गड़बड़ी
इससे पहले भी निगम कई बार पार्क के नाम पर करोड़ों की गड़बड़ी सामने आ चुका है। मलिक पेट्रोल पंप से लेकर मित्तल मॉल रोड पर बने पार्क पर भी करोड़ों रुपये की गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं। वहीं, किला क्षेत्र में भी लाखों रुपये का फव्वारा आज तक नहीं चल पाया है। कृष्णपुरा में भी पार्क का घोटाला सामने आ चुका है, जिसमें निगम अधिकारियों ने कागजों में ओपन जिम चालू कर दिया था।