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वेस्ट प्लास्टिक से बनाए 30 हजार थैले, लोगों को बांट रहे
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पानीपत। प्रतिष्ठा फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्लास्टिक की बोतल के बनाए गए बैग की पहल ?
- फोटो : Panipat
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पानीपत। प्रतिष्ठा फाउंडेशन ने आजादी के अमृत महोत्सव के तहत पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अभियान चलाया है। वेस्ट प्लास्टिक को रिसाइकिल कर 30 हजार थैले बनाए गए हैं, जिन्हें लोगों को बांटा जा रहा है। प्लास्टिक वेस्ट के दोबारा प्रयोग को सफल बनाने के साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
अपनी पहल के तहत फाउंडेशन प्लास्टिक की बोतलों के साथ ही अन्य वेस्ट प्लास्टिक इकट्ठा करता है। फिर इसे साफ कर रिसाइकिल किया जाता है। इससे कच्चा माल तैयार होता है, जिससे थैले बनाए जा रहे हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि प्लास्टिक को इस्तेमाल के बाद फेंके नहीं बल्कि उन्हें दें, जिससे उसका दोबारा इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा सके।
सबसे पहले कचरा एकत्रित करने का अभियान किया शुरू
प्रतिष्ठा फाउंडेशन ने सबसे पहले कचरा एकत्रित करने का अभियान शुरू किया। इसके बाद प्लास्टिक को अलग करके यूनिट में भेजा गया। इस प्लास्टिक से धागा बनाया गया और इसी धागे से कपड़े जैसा मैटेरियल तैयार किया गया। जिससे थैला बनाया गया। प्लास्टिक का कचरा कम करने की दिशा में यह पहल की गई है। स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को जागरूक किया जा रहा है और इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है।
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एक थैले की लागत आती है 150 रुपये
अभी तक 30 हजार थैले वितरित किए जा चुके हैं। एक थैले की लागत 150 रुपये आती है। शहर में प्लास्टिक से थैले बनाने की दो यूनिट हैं, जहां से थैले तैयार कराए जा रहे हैं। रोजाना 200 थैले बनवाए जाते हैं। थैले की यूनिट लगाने में सब्सिडी मिले तो इसी लागत कम की जा सकती है। समाजसेवी सुरेश तायल की यूनिट में थैले बनवाए जा रहे हैं। - डॉ. कुंजल, संस्थापक, प्रतिष्ठा फाउंडेशन
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अपनी पहल के तहत फाउंडेशन प्लास्टिक की बोतलों के साथ ही अन्य वेस्ट प्लास्टिक इकट्ठा करता है। फिर इसे साफ कर रिसाइकिल किया जाता है। इससे कच्चा माल तैयार होता है, जिससे थैले बनाए जा रहे हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि प्लास्टिक को इस्तेमाल के बाद फेंके नहीं बल्कि उन्हें दें, जिससे उसका दोबारा इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा सके।
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सबसे पहले कचरा एकत्रित करने का अभियान किया शुरू
प्रतिष्ठा फाउंडेशन ने सबसे पहले कचरा एकत्रित करने का अभियान शुरू किया। इसके बाद प्लास्टिक को अलग करके यूनिट में भेजा गया। इस प्लास्टिक से धागा बनाया गया और इसी धागे से कपड़े जैसा मैटेरियल तैयार किया गया। जिससे थैला बनाया गया। प्लास्टिक का कचरा कम करने की दिशा में यह पहल की गई है। स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को जागरूक किया जा रहा है और इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है।
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एक थैले की लागत आती है 150 रुपये
अभी तक 30 हजार थैले वितरित किए जा चुके हैं। एक थैले की लागत 150 रुपये आती है। शहर में प्लास्टिक से थैले बनाने की दो यूनिट हैं, जहां से थैले तैयार कराए जा रहे हैं। रोजाना 200 थैले बनवाए जाते हैं। थैले की यूनिट लगाने में सब्सिडी मिले तो इसी लागत कम की जा सकती है। समाजसेवी सुरेश तायल की यूनिट में थैले बनवाए जा रहे हैं। - डॉ. कुंजल, संस्थापक, प्रतिष्ठा फाउंडेशन