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खतरे के निशान के पास यमुना, बाढ़ का मंडराया खतरा, बढ़ी ग्रामीणों की धड़कनें
Updated Mon, 04 Sep 2017 12:00 AM IST
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खतरे के निशान के पास यमुना, बाढ़ का मंडराया खतरा, बढ़ी ग्रामीणों की धड़कनें
अमर उजाला ब्यूरो
सनौली। पहाड़ो में होने वाली बारिश के बाद पिछले दो दिनों से बढ़ रहे यमुना के जलस्तर से करीब 20 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। लगातार बढ़ते जा रहे यमुना के जलस्तर ने ग्रामीणों की धड़कने तेज कर दी है। 15 गांवों के किसानों की नदी के अंदर तटबंध से लगती करीब दस हजार एकड़ फसलें डूबी हुई हैं। शनिवार से बढ़ना शुरू हुआ जलस्तर रविवार की शाम तक खतरे के निशान 230.85 को पार कर 230.87 क्यूसेक पर बह रहा है। कई जगह तेज बहाव में कटाव होने से फसलें भी कटाव में बहने लगी हैं। प्रशासनिक अधिकारी लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं। किसानों की मानें तो अगर नदी का जल स्तर खतरे के निशान से नीचे नहीं आया तो बाढ़ के पानी में डूबी फसलें गलने से बर्बाद हो जाएगी। तेज बहाव में कटाव होने से फसलें व भूमि तो कटाव से बर्बाद हो जाएगी साथ ही तटबंध में कटाव होने से बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाएगा।
यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते देखते हुए रविवार को बाढ़ के पानी का निरीक्षण करने के लिए सिंचाई विभाग के एसडीओ कर्मबीर ने यमुना का दौरा किया और बाढ़ प्रबंधों का जायजा लिया। यमुना के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सिंचाई विभाग के कर्मचारी राजकुमार की यमुना नदी पर ड्यूटी लगाई गई है। जो पल-पल की रिपोर्ट जिला प्रशासन को देगा। विदित रहे कि नदी का जल स्तर पिछले एक महीने से धीरे-धीरे चल रहा था। लेकिन शनिवार सुबह अचानक बढ़ना शुरू हुआ जलस्तर रविवार शाम तक खतरे के निशान पर जा पहुंचा।
इन गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा
यमुना नदी का जलस्तर बढ़ता है तो गांव नन्हेड़ा, रामड़ा, पत्थरगढ़, जलमाना, गोयला कलां, चंदोली, गोयला खुर्द, हथवाला और मिर्जापुर, नवादा आर, खोजकीपुर में बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए ग्रामीणों की धड़कने बढ़ी हुई हैं।
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अभी तक पानी स्थिर
यमुना नदी पुल पर बने केन्द्रीय जल आयोग कार्यालय के अधिकारियों की मानें तो अभी ताजे वाले हैड से दो लाख 48 हजार क्युशिक मीटर पानी चल रहा है। देर रात नदी में पानी स्थिर रहने की संभावना है। अभी तक नदी में बह रहे पानी से खतरे जैसी कोई बात नहीं है। अगर जलस्तर इससे ज्यादा बढ़ता है तो बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं।
हजारों एकड़ फसल डूबी
खतरे के निशान को पार कर बह रही यमुना के कारण करीब दस हजार एकड़ फसलें डूब चुकी है। किसान नदी के अंदर लगे इंजन, बिजली की मोटरें उठा कर ले जा रहे हैं। बढ़ते जलस्तर के कारण डूबी फसलों के कारण किसान चिंतित नजर आ रहे हैं।
अधिकारी ले रहे बाढ़ प्रबंधों का जायजा
यमुना के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सिंचाई विभाग के अधिकारी बाढ प्रबंधो के जायजा ले रहे है। सिंचाई विभाग के एसडीओ कर्मबीर का कहना है कि इस बार बाढ़ बचाव के लिए पत्थरों की ठोकरें नही लगवाई गई है। यमुना बांध पर कटाव वाले स्थानों पर मिट्टी डाली जा रही है। एसडीओ ने कहा कि रविवार को यमुना के साथ लगते गांवों का दौरा किया गया गया। यमुना बांध से स्टे गांवों में स्थित ठीक है। बाढ बचाव के लिए कई जगह यमुना बांध पर कट्टों में मिट्टी भराई का कार्य किया जा रहा है, ताकि कटाव वाली जगह पर उन्हें लगाया जा सके।
जलस्तर कम नहीं हुआ तो बर्बाद हो जाएंगी फसलें
किसान कृष्ण, सुभाष, राजेंद्र, विनोद, सुनील, श्यामलाल, नरेश, सुखबीर, मनोहर, महबुब का कहना है कि यमुना नदी के बढ़े जलस्तर के कारण हजारों एकड़ में खड़ी खड़ी घीया, पेठा, मिर्च, ईख, ज्वार की फसलें पानी में डूब चुकी है। अगर जल्द ही यमुना का जलस्तर कम नहीं हुआ तो उनकी फसलें गलकर बर्बाद हो जाएंगी और कटाव शुरू हो जाएगा। कटाव होने से बड़ा नुकसान हो सकता है।
स्थित नियंत्रण में
इस बारे में सिंचाई विभाग के एसडीओ कर्मबीर सिंह का कहना है कि अभी तक नदी का पानी नियंत्रण में है। हालांकि यमुना खतरे के निशान 230.85 को पार कर 230.87 क्यूशिक पर बह रही है। अगर इससे ज्यादा जलस्तर बढ़ता है तो स्थित गंभीर हो सकती है। बाढ़ से निपटने का पूरे इंतजाम किए जा रहे है। यमुना बांध पर कटान भरने के लिए मिट्टी के कट्टे भरवाएं जा रहे हैं।
वर्जन
यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए रविवार को यमुना के साथ लगते गांवों का दौरा किया और बाढ़ प्रबंधों का जायजा लिया। फिलहाल पानी नियंत्रण में है। बाढ़ से बचाव के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। हर गांव में ठीकरा पहरे लगवाए गए हैं। जिला प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है।
अशोक कुमार, बीडीपीओ, सिंचाई विभाग, बापौली।
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अमर उजाला ब्यूरो
सनौली। पहाड़ो में होने वाली बारिश के बाद पिछले दो दिनों से बढ़ रहे यमुना के जलस्तर से करीब 20 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। लगातार बढ़ते जा रहे यमुना के जलस्तर ने ग्रामीणों की धड़कने तेज कर दी है। 15 गांवों के किसानों की नदी के अंदर तटबंध से लगती करीब दस हजार एकड़ फसलें डूबी हुई हैं। शनिवार से बढ़ना शुरू हुआ जलस्तर रविवार की शाम तक खतरे के निशान 230.85 को पार कर 230.87 क्यूसेक पर बह रहा है। कई जगह तेज बहाव में कटाव होने से फसलें भी कटाव में बहने लगी हैं। प्रशासनिक अधिकारी लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं। किसानों की मानें तो अगर नदी का जल स्तर खतरे के निशान से नीचे नहीं आया तो बाढ़ के पानी में डूबी फसलें गलने से बर्बाद हो जाएगी। तेज बहाव में कटाव होने से फसलें व भूमि तो कटाव से बर्बाद हो जाएगी साथ ही तटबंध में कटाव होने से बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाएगा।
यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते देखते हुए रविवार को बाढ़ के पानी का निरीक्षण करने के लिए सिंचाई विभाग के एसडीओ कर्मबीर ने यमुना का दौरा किया और बाढ़ प्रबंधों का जायजा लिया। यमुना के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सिंचाई विभाग के कर्मचारी राजकुमार की यमुना नदी पर ड्यूटी लगाई गई है। जो पल-पल की रिपोर्ट जिला प्रशासन को देगा। विदित रहे कि नदी का जल स्तर पिछले एक महीने से धीरे-धीरे चल रहा था। लेकिन शनिवार सुबह अचानक बढ़ना शुरू हुआ जलस्तर रविवार शाम तक खतरे के निशान पर जा पहुंचा।
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इन गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा
यमुना नदी का जलस्तर बढ़ता है तो गांव नन्हेड़ा, रामड़ा, पत्थरगढ़, जलमाना, गोयला कलां, चंदोली, गोयला खुर्द, हथवाला और मिर्जापुर, नवादा आर, खोजकीपुर में बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए ग्रामीणों की धड़कने बढ़ी हुई हैं।
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अभी तक पानी स्थिर
यमुना नदी पुल पर बने केन्द्रीय जल आयोग कार्यालय के अधिकारियों की मानें तो अभी ताजे वाले हैड से दो लाख 48 हजार क्युशिक मीटर पानी चल रहा है। देर रात नदी में पानी स्थिर रहने की संभावना है। अभी तक नदी में बह रहे पानी से खतरे जैसी कोई बात नहीं है। अगर जलस्तर इससे ज्यादा बढ़ता है तो बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं।
हजारों एकड़ फसल डूबी
खतरे के निशान को पार कर बह रही यमुना के कारण करीब दस हजार एकड़ फसलें डूब चुकी है। किसान नदी के अंदर लगे इंजन, बिजली की मोटरें उठा कर ले जा रहे हैं। बढ़ते जलस्तर के कारण डूबी फसलों के कारण किसान चिंतित नजर आ रहे हैं।
अधिकारी ले रहे बाढ़ प्रबंधों का जायजा
यमुना के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सिंचाई विभाग के अधिकारी बाढ प्रबंधो के जायजा ले रहे है। सिंचाई विभाग के एसडीओ कर्मबीर का कहना है कि इस बार बाढ़ बचाव के लिए पत्थरों की ठोकरें नही लगवाई गई है। यमुना बांध पर कटाव वाले स्थानों पर मिट्टी डाली जा रही है। एसडीओ ने कहा कि रविवार को यमुना के साथ लगते गांवों का दौरा किया गया गया। यमुना बांध से स्टे गांवों में स्थित ठीक है। बाढ बचाव के लिए कई जगह यमुना बांध पर कट्टों में मिट्टी भराई का कार्य किया जा रहा है, ताकि कटाव वाली जगह पर उन्हें लगाया जा सके।
जलस्तर कम नहीं हुआ तो बर्बाद हो जाएंगी फसलें
किसान कृष्ण, सुभाष, राजेंद्र, विनोद, सुनील, श्यामलाल, नरेश, सुखबीर, मनोहर, महबुब का कहना है कि यमुना नदी के बढ़े जलस्तर के कारण हजारों एकड़ में खड़ी खड़ी घीया, पेठा, मिर्च, ईख, ज्वार की फसलें पानी में डूब चुकी है। अगर जल्द ही यमुना का जलस्तर कम नहीं हुआ तो उनकी फसलें गलकर बर्बाद हो जाएंगी और कटाव शुरू हो जाएगा। कटाव होने से बड़ा नुकसान हो सकता है।
स्थित नियंत्रण में
इस बारे में सिंचाई विभाग के एसडीओ कर्मबीर सिंह का कहना है कि अभी तक नदी का पानी नियंत्रण में है। हालांकि यमुना खतरे के निशान 230.85 को पार कर 230.87 क्यूशिक पर बह रही है। अगर इससे ज्यादा जलस्तर बढ़ता है तो स्थित गंभीर हो सकती है। बाढ़ से निपटने का पूरे इंतजाम किए जा रहे है। यमुना बांध पर कटान भरने के लिए मिट्टी के कट्टे भरवाएं जा रहे हैं।
वर्जन
यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए रविवार को यमुना के साथ लगते गांवों का दौरा किया और बाढ़ प्रबंधों का जायजा लिया। फिलहाल पानी नियंत्रण में है। बाढ़ से बचाव के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। हर गांव में ठीकरा पहरे लगवाए गए हैं। जिला प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है।
अशोक कुमार, बीडीपीओ, सिंचाई विभाग, बापौली।