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Panipat News: चीफ इंजीनियर के परिवार को 1.91 करोड़ का मुआवजा
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पानीपत। रिफाइनरी के चीफ इंजीनियर के परिवार को पौने आठ साल बाद हाईकोर्ट से न्याय मिला। ये लंबी लड़ाई उनकी अविवाहित पुत्री ने लड़ी। हाईकोर्ट की जस्टिस मनीषा बतरा ने सोमवार को फैसला सुनाया। उन्होंने बिजली निगम को चीफ इंजीनियर के परिवार को 1.91 करोड़ रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए। फिलहाल निगम को 1.41 करोड़ रुपये मुआवजा देना होगा। बाकी 50 लाख पर स्टे लगा है।
वकील राजकुमार जीवन ने बताया कि अगस्त 2015 में रिफाइनरी के चीफ इंजीनियर पानीपत में सेक्टर-18 के नरेश कुमार परिचित का हाल चाल जानने के लिए हैदराबादी अस्पताल गए थे। वहां से लौटते समय बारिश शुरू हो गई। तहसील कैंप में खड़े बिजली निगम के लोहे के पोल पर तारों का गुच्छा था। चीफ इंजीनियर इस पोल के संपर्क में आ गए और झुलस गए। गंभीर हालत में सिविल अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का आरोप था कि बिजली निगम की लापरवाही से ही चीफ इंजीनियर नरेश की मौत हुई है। नरेश दो बेटियों और एक बेटे के पिता थे। उनकी बेटी भारती ने पानीपत कोर्ट में बिजली निगम के खिलाफ केस दायर किया। कोर्ट ने इस मामले में बिजली निगम को नरेश के परिवार को डेढ़ करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। निगम ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए 1.41 करोड़ रुपये देने का फैसला सुनाया। बिजली निगम की अपील पर फिलहाल 50 लाख पर स्टे है। अदालत ने यह फैसला चीफ इंजीनियर नरेश की उस वक्त की 1.13 लाख रुपये मासिक वेतन और उनकी होने वाली पदोन्नति और आयु को देखते हुए सुनाया है।
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वकील राजकुमार जीवन ने बताया कि अगस्त 2015 में रिफाइनरी के चीफ इंजीनियर पानीपत में सेक्टर-18 के नरेश कुमार परिचित का हाल चाल जानने के लिए हैदराबादी अस्पताल गए थे। वहां से लौटते समय बारिश शुरू हो गई। तहसील कैंप में खड़े बिजली निगम के लोहे के पोल पर तारों का गुच्छा था। चीफ इंजीनियर इस पोल के संपर्क में आ गए और झुलस गए। गंभीर हालत में सिविल अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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परिजनों का आरोप था कि बिजली निगम की लापरवाही से ही चीफ इंजीनियर नरेश की मौत हुई है। नरेश दो बेटियों और एक बेटे के पिता थे। उनकी बेटी भारती ने पानीपत कोर्ट में बिजली निगम के खिलाफ केस दायर किया। कोर्ट ने इस मामले में बिजली निगम को नरेश के परिवार को डेढ़ करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। निगम ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए 1.41 करोड़ रुपये देने का फैसला सुनाया। बिजली निगम की अपील पर फिलहाल 50 लाख पर स्टे है। अदालत ने यह फैसला चीफ इंजीनियर नरेश की उस वक्त की 1.13 लाख रुपये मासिक वेतन और उनकी होने वाली पदोन्नति और आयु को देखते हुए सुनाया है।
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