{"_id":"627d68ac54b8a344245fe553","slug":"15-convicts-including-notorious-gangster-prasanna-alias-lambu-seven-get-life-imprisonment-panipat-news-knl107998744","type":"story","status":"publish","title_hn":"पानीपत: कुख्यात गैंगस्टर प्रसन्न उर्फ लंबू समेत 15 दोषी करार, सात को उम्रकैद, छह को 14 तो दो को सात-सात साल की सजा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम","slug":"crime"}}
पानीपत: कुख्यात गैंगस्टर प्रसन्न उर्फ लंबू समेत 15 दोषी करार, सात को उम्रकैद, छह को 14 तो दो को सात-सात साल की सजा
Fri, 13 May 2022 03:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत (हरियाणा)
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 May 2022 03:41 AM IST
सार
फायरिंग और हत्या के मामले में डेढ़ साल बाद कोर्ट का फैसला आया। सभी पर जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
हरियाणा के पानीपत में नूरवाला अड्डे पर दिसंबर-2020 में शराब ठेकेदार अजीत उर्फ जीता पर फायरिंग और एक युवक की हत्या करने के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित गर्ग की अदालत ने कुख्यात गैंगस्टर प्रसन्न उर्फ लंबू समेत 15 को दोषी करार दिया।
विज्ञापन
साथ ही लंबू समेत छह दोषियों को 14-14 वर्ष, सात दोषियों को आजीवन कारावास और बाकी दो दोषियों को सात-सात वर्ष की सजा सुनाई है। यही नहीं सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे अदा नहीं करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
विज्ञापन
घटनाक्रम के अनुसार 19 दिसंबर 2020 को सुरेंद्र कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि उसका बड़ा भाई शराब ठेकेदार अजीत उर्फ जीता, निजी गनमैन अमन, ड्राइवर सागर और पुलिस से मिले गनमैन सिपाही दिलबाग नूरवाला अड्डा स्थित ठेके पर गए थे। काम निपटाकर रात करीब साढ़े आठ बजे वे घर जा रहे थे।
विज्ञापन
तभी नूरवाला की ओर से चार से पांच युवक आए और फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें एक गोली अजीत के कंधे में लगी, जिसके बाद उन्होंने भी लाइसेंसी हथियार से जवाबी फायरिंग की। दोनों ओर से हुई गोलीबारी में मोहित उर्फ मुखिया को गोली लगी, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद बाकी हमलावर फरार हो गए। माना गया है कि मोहित उर्फ मुखिया की मौत हमलावरों की ही गोली से हुई थी।
वहीं भागते वक्त हमलावरों की फायरिंग में अजीत का ड्राइवर सागर भी जख्मी हो गया था। सुरेंद्र कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि गांव सिवाह निवासी गैंगस्टर प्रसन्न उर्फ लंबू और उसके गुर्गे बुआना लाखू निवासी राकेश उर्फ राकू ने हमला कराया है। इसके बाद पुलिस की जांच में 15 लोगों के नाम सामने आए थे, जिन्हें आरोपी बनाया गया था। मामले में करीब डेढ़ साल तक चले ट्रायल के बाद कोर्ट ने सभी को दोषी करार दिया।
किस दोषी को कितनी हुई सजा
प्रसन्न उर्फ लंबू को 14 वर्ष की सजा एवं 50 हजार जुर्माना, शोएब को 14 वर्ष की सजा एवं 60 हजार जुर्माना, राकेश उर्फ राकू को 14 वर्ष की सजा एवं 50 हजार का जुर्माना। जसविंद्र उर्फ जस्सी को उमक्रैद एवं 1.50 लाख का जुर्माना, अमित को उम्रकैद की सजा एवं 1.60 लाख का जुर्माना, विशाल को 14 वर्ष की सजा एवं 60 हजार का जुर्माना, विकास को उमक्रैद की सजा एवं 1.50 लाख का जुर्माना, आंचल को उमक्रैद की सजा एवं 1.60 लाख का जुर्माना, नवीन उर्फ भोलू को उमक्रैद की सजा एवं 1.60 लाख का जुर्माना, प्रदीप कुमार को उम्रकैद की सजा एवं 1.50 लाख का जुर्माना, अनिल उर्फ काले शाह को सात वर्ष की सजा एवं 25 हजार का जुर्माना, जगदीप उर्फ जग्गा को उमक्रैद की सजा एवं 1.60 लाख का जुर्माना, राजेंद्र उर्फ राजा को 14 वर्ष की सजा एवं 60 हजार जुर्माना, विक्रम उर्फ कुकू को सात वर्ष की सजा एवं 25 हजार का जुर्माना और शील कुमार को 14 वर्ष की सजा सुनाने के साथ 50 हजार का जुर्माना लगाया गया। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर सभी को एक वर्ष की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
अदालत ने आदेश में कहा- दोषी किसी भी तरह नरमी के पात्र नहीं
दोषी किसी भी तरह की नरमी के पात्र नहीं हैं। उनकी गतिविधियां न सिर्फ समाज में आतंक फैलाती हैं, बल्कि आम इंसान के जेहन से कानून एवं प्रशासन के प्रति विश्वास खत्म करने वाली हैं। इससे सख्ती से निपटना होगा। शराब ठेकेदार अजीत उर्फ जीता पर हमले के मामले में अदालत के आदेश में 15 दोषियों के बारे में यह टिप्पणी की गई है। आरोपियों को दोषी करार देते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित गर्ग ने सजा सुनाई।
रंगदारी न देने पर नूरवाला अड्डे पर दिसंबर 2020 में शराब ठेकेदार गांव खलीला निवासी अजीत उर्फ जीता पर फायरिंग की गई थी। इसमें एक हमलावर मनीष उर्फ मुखिया की गोली लगने से मौत हो गई थी। आदेश में कहा गया है कि आरोपियों का कृत्य बेहद गंभीर और समाज के खिलाफ है।
रंगदारी न मिलने पर अभियुक्तों ने अजीत उर्फ जीता की हत्या का प्रयास किया और सार्वजनिक स्थल पर अंधाधुंध फायरिंग में मनीष उर्फ मुखिया की गोली लगने से मौत हो गई। उन्होंने इस बात की फिक्र नहीं की कि वारदात की जगह पर मौजूद निर्दोष लोग भी खतरे में आ सकते हैं। इस बात की भी फिक्र नहीं कि कितना नुकसान पहुंचेगा।
दोषियों के वकील ने दी दलील, गरीब परिवार से हैं सभी
दोषियों के वकील ने कोर्ट में पैरवी करते हुए दलील दी कि सभी अभियुक्त गरीब हैं। परिवार में इकलौते कमाने वाले हैं और उनके माता-पिता बुजुर्ग हैं। उनके साथ नरमी बरती जाए। शिकायकर्ता सुरेंद्र कुमार के वकील ने पैरवी में दलील दी कि कोई नरमी नहीं बरतनी चाहिए।