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ओलंपिक में मेडल के लिए अर्जुन की तरह एकाग्रता बनाए हुए हैं नीरज

Sun, 23 Sep 2018 10:28 PM IST
Updated Sun, 23 Sep 2018 10:28 PM IST
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ओलंपिक में मेडल के लिए अर्जुन की तरह एकाग्रता बनाए हुए हैं नीरज
फोटो संख्या : 12 से 15 व 17 और 20
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11 महीने बाद घर लौटे नीरज बोले-बहोत दिनां मै मिली घर की रोटी, तड़के फेर उल्टा जाणा
एशियन गेम्स में भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी का गांव भव्य स्वागत
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। एशियन गेम्स में भाला फेंक में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा 11 माह बाद रविवार को अपने गांव खंडरा पहुंचे। यहां ग्रामीणों ने फूल मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि 11 भिन्ने बाद घर का खाणा मिलेगा, वो भी बस दो टेम, तड़के उल्टा जाना है।
स्वागत समारोह के दौरान नीरज के साथ सेल्फी लेने वाले लोगों की होड़ लगी रही। गांव में पहुंचने पर नीरज के चाचा भीम व सुरेंद्र पिता सतीश और दादा धर्म सिंह गांव के अड्डे पर पहुंचे। उनसे मिलने के बाद घर के बाहर पहुंचने पर नीरज की बुआ सुमन व माता सरोज ने नीरज को मिठाई खिलाकर मुंह मीठा किया व तिलक लगाकर स्वागत किया। नीरज से मिलने के बाद माता सरोज व बुआ दोनों भावुक हो गईं। नीरज से मिलने पर उनकी मां एक पल तक उनके मुंह को देखती रही व फिर नीरज को गले लगा लिया।
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स्वागत समारोह में नीरज के कोच कृष्ण सिंह, जयवीर बिंझौल, वजीर सिंह साईं से व पंचकूला से नसीम अहमद भी नीरज के स्वागत के लिए उसके गांव पहुंचे। समारोह में जनता नर्सरी से डेढ़ लाख पौधे लगाने वाले शख्स पवन ने नीरज को पौधा देकर सम्मानित किया। नीरज के स्वागत के लिए बीजेपी से देवेंद्र कल्याण, इनेलो से ओम प्रकाश शेरा, गुलाब सिंह व कांग्रेस से खुशीराम जागलाण भी पहुंचे। इनके अलावा हरियाणा स्टेट एथलेटिक एसोसिएशन के स्टेट सेकरेट्री राजकुमार, सोनीपत सेकरेट्री राजीव खत्री, जगदीप सिंह व प्रदीप मलिक भी स्वागत करने के लिए पहुंचे। इस मौके पर राजकुमार ने कहा कि नीरज के लिए स्वागत समारोह में आना उनके लिए गर्व की बात है। हरियाणा में बहुत लंबे समय बाद कोई ऐसा एथलीट मिला है।
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भारतीय एथलीट में से ओलंपिक के सबसे बड़े दावेदार नीरज : दलेल
वॉलीबॉल के प्रसिद्ध खिलाड़ी व अर्जुन अवॉर्डी दलेल सिंह भी नीरज चोपड़ा के सम्मान समारोह में पहुंचे। उन्होंने नीरज चोपड़ा को गोल्ड मेडल जीतने के लिए बधाई दी और कहा कि देश के सात एथलीट्स ने गोल्ड मेडल जीता है। इनमें से ओलंपिक में गोल्ड मेडल के सबसे नजदीक नीरज चोपड़ा है। भारत को 60 साल बाद ऐसा एथलीट मिला है जिसने एक ही वर्ष में कॉमन वेल्थ और एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता है।

नहीं आ पाए चाचा
नीरज के स्वागत के लिए जहां पूरा गांव में आसपास के इलाकों के लोग गांव में पहुंचे हुए थे। वहीं उनके चाचा सुल्तान स्वागत समारोह में नहीं पहुंच सके। नीरज का संयुक्त परिवार है जो मध्य प्रदेश में ठेके पर जमीन लेकर खेती करते हैं। नीरज के चाचा सुल्तान ने कहा कि स्वागत समारोह में न पहुंचने से वह दुखी तो है लेकिन खेत संभालने की उनके लिए जरूरी है। क्योंकि नीरज की कामयाबी के लिए उन्होंने खेतों से ही पैसा जोड़ा था।

नीरज ने साझा की मन की बात
घर पहुंचकर कैसा महसूस हो रहा है?
जवाब : 11 भिन्ने बाद घर का खाणा मिलेगा, वो भी बस दो टेम, तड़के उल्टा जाना है। बाकी घर पहुंचकर गांव वालों का उनके प्रति प्यार देखकर उन्हें बहुत गर्व महसूस हुआ। घर से दूर रहना तो एक खिलाड़ी की जिंदगी का हिस्सा है।
कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स, डायमंड लीग व कॉन्टिनेंटल कप में से सबसे खास कौन सी रहा?
जवाब : एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतना व रिकॉर्ड बनाना उनके लिए सबसे बेहतरीन पल था। एशियन गेम्स अब तक के सबसे बेहतरीन टूर्नामेंट है। वहीं कॉन्टिनेंटल कप में उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला। उन्होंने कहा कि कॉन्टिनेंटल कप में उनसे गलती हुई थी, जिससे वह सीख लेंगे, वह आगे उस गलती को सुधारेंगे।

कॉन्टिनेंटल कप में क्या गलती हो गई?
जवाब : कॉन्टिनेंटल कप में उनकी थ्रो आउट ऑफ कोर्ट चली गई थी। थ्रो करने के लिए एक सेकंड तक का टाइम होता है। अगर इस बीच थोड़ा सा भी ध्यान भटक जाए तो थ्रो गलत जा सकती है। उनका भी ध्यान दर्शकों की वजह से थोड़ा सा भटक गया था, लेकिन आगे से वह हैं इस गलती से सीख लेंगे।

अर्जुन अवार्ड मिल रहा है, इसके बारे में आपका क्या कहना है?
जवाब: अर्जुन अवॉर्ड प्राप्त करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। अर्जुन दो चीजों के प्रतीक हैं- एक फोकस दूसरा गुरु की बातों को ग्रहण करने वाला। वह हर समय अपने गेम पर ही फोकस रखते हैं और उनके जिंदगी में हर कोच गुरु द्रोण की तरह रहा है तो उनके द्वारा दी गई शिक्षा भी वह बारीकी से ग्रहण करते हैं। शायद इसलिए ही उनको अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है।
बजरंग पुनिया को खेल रत्न न मिलना इसे आप किस नजरिए से देखते हैं?
जिस खिलाड़ी को लगता है कि वह किसी पद या प्रतिष्ठा के योग्य है तो उसे अपनी मांग उठानी चाहिए।
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