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134ए के तहत दाखिला न मिलने पर भड़के अभिभावक, डीसी को सौंपा ज्ञापन
ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Sun, 08 May 2016 12:55 AM IST
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अभिभावकों ने लघु सचिवालय में जोरदार प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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134 ए के तहत दाखिला न मिलने पर अभिभावकों ने लघु सचिवालय में जोरदार प्रदर्शन किया। अभिभावकों ने प्रदर्शन के बाद मांग-पत्र डीसी को सौंपा। डीसी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों का शिक्षा विभाग में भेज दिया जाएगा। वहीं सुबह जिले भर के अधिकतर स्कूल खुले रहे।
जबकि निजी स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन का दावा है कि जिले में 95 प्रतिशत स्कूल बंद रहे।
सुबह जवाहर पार्क में एकत्रित हुए अभिभावकों ने बताया कि 134ए के तहत प्राइवेट स्कूलों में दाखिले के लिए जो परीक्षा ली गई है। वह केवल हिंदी माध्यम से ली गई है। जिसके कारण सीबीएसई में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी को हिंदी में परीक्षा देने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है।
जिसके कारण विद्यार्थी परीक्षा पास नहीं कर पाए है। अभिभावकों ने बताया कि परीक्षा से पहले जिले के प्राइवेट स्कूलों में 2800 से अधिक सीटों को दिखाया गया था। लेकिन केवल 531 विद्यार्थियों के परीक्षा पास होने पर कई स्कूलों ने सीटें पूरी होने का हवाला दे दिया है। अभिभावकों ने बताया कि ओएसडीएवी, आरकेएसडी, लिटिल फ्लावर स्कूल सीटें पूरी हुई दिखा रहे है। उन्होंने कहा कि सीटें कम दिखाने के पीछे शिक्षा विभाग की अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा है।
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अभिभावक मोहन दास, संदीप कुमार, सतबीर, राजेंद्र कुमार, सिमरनजीत, मीना, आरती, सुमन, पूजा, गीता, प्रवीन कुमार, मुकेश कुमार, जयभगवान ने बताया कि परीक्षाओं से पहले अभिभावकों से विद्यार्थियों के नंबरों का रिपोर्ट कार्ड लगवाया गया था। जिसमें विद्यार्थियों ने 90 प्रति से अधिक अंक तक लिए थे। लेकिन फिर भी विद्यार्थियों की परीक्षा ली गई है।
शिक्षा विभाग नहीं चाहता कि गरीब का बच्चा पढ़े- चावरियां
दो जमा पांच के मुद्दे के जिला प्रभारी रामदिया चावरियां ने बताया कि शिक्षा विभाग नहीं चाहता है कि गरीब का बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़े। शिक्षा विभाग के पास प्राइवेट स्कूलों द्वारा दी गई सीटों के झूठे आंकड़े है। अगर जांच की जाए जो जिले में 10 प्रतिशत के अनुसार 6000 से अधिक सीटें मिलेगी। उन्होंने बताया कि 55 प्रतिशत की शर्त लगाकर सरकार ने गरीबों को मजाक उड़ाया है ओर दो महीेने तक विद्यार्थियों की पढ़ाई खराब की है।
3100 से अधिक सीटें, दाखिला हुआ महज 480 का:-
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले भर में करीब 3100 सीटें इस नियम के तहत बताई जा रही हैं। जिसमें से दाखिला केवल 480 का हुआ है। जबकि परीक्षा 1603 ने परीक्षा दी थी। जिसमें से 531 बच्चे पास हुए थे।
खुले रहे अधिकतर स्कूल:-
शनिवार को निजी स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन ने स्कूलों को बंद रखने का ऐलान किया था। लेकिन सुबह के समय अधिकतर स्कूल खुले रहे। जबकि एसोसिएशन ने दावा किया कि दोपहर तक 95 प्रतिशत स्कूलों को बंद करवा दिया गया था। प्रधान रवि भूषण गर्ग ने बताया कि प्रदेश सरकार ने 134 ए के तहत जो ड्रा निकाला है हम उसके खिलाफ है।
सरकार 134 ए को खत्म करके आरटीई लागू करें। सरकार बच्चों को 2500 रूपये प्रति माह के हिसाब से एजूकेशन वाउचर उपलब्ध करवाए, ताकि बच्चा उस पैसे से अपने मर्जी के स्कूल से शिक्षा हासिल कर सके। जिले में कुल 200 से ज्यादा स्कूल बंद रहे।
जबकि निजी स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन का दावा है कि जिले में 95 प्रतिशत स्कूल बंद रहे।
सुबह जवाहर पार्क में एकत्रित हुए अभिभावकों ने बताया कि 134ए के तहत प्राइवेट स्कूलों में दाखिले के लिए जो परीक्षा ली गई है। वह केवल हिंदी माध्यम से ली गई है। जिसके कारण सीबीएसई में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी को हिंदी में परीक्षा देने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है।
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जिसके कारण विद्यार्थी परीक्षा पास नहीं कर पाए है। अभिभावकों ने बताया कि परीक्षा से पहले जिले के प्राइवेट स्कूलों में 2800 से अधिक सीटों को दिखाया गया था। लेकिन केवल 531 विद्यार्थियों के परीक्षा पास होने पर कई स्कूलों ने सीटें पूरी होने का हवाला दे दिया है। अभिभावकों ने बताया कि ओएसडीएवी, आरकेएसडी, लिटिल फ्लावर स्कूल सीटें पूरी हुई दिखा रहे है। उन्होंने कहा कि सीटें कम दिखाने के पीछे शिक्षा विभाग की अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा है।
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अभिभावक मोहन दास, संदीप कुमार, सतबीर, राजेंद्र कुमार, सिमरनजीत, मीना, आरती, सुमन, पूजा, गीता, प्रवीन कुमार, मुकेश कुमार, जयभगवान ने बताया कि परीक्षाओं से पहले अभिभावकों से विद्यार्थियों के नंबरों का रिपोर्ट कार्ड लगवाया गया था। जिसमें विद्यार्थियों ने 90 प्रति से अधिक अंक तक लिए थे। लेकिन फिर भी विद्यार्थियों की परीक्षा ली गई है।
शिक्षा विभाग नहीं चाहता कि गरीब का बच्चा पढ़े- चावरियां
दो जमा पांच के मुद्दे के जिला प्रभारी रामदिया चावरियां ने बताया कि शिक्षा विभाग नहीं चाहता है कि गरीब का बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़े। शिक्षा विभाग के पास प्राइवेट स्कूलों द्वारा दी गई सीटों के झूठे आंकड़े है। अगर जांच की जाए जो जिले में 10 प्रतिशत के अनुसार 6000 से अधिक सीटें मिलेगी। उन्होंने बताया कि 55 प्रतिशत की शर्त लगाकर सरकार ने गरीबों को मजाक उड़ाया है ओर दो महीेने तक विद्यार्थियों की पढ़ाई खराब की है।
3100 से अधिक सीटें, दाखिला हुआ महज 480 का:-
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले भर में करीब 3100 सीटें इस नियम के तहत बताई जा रही हैं। जिसमें से दाखिला केवल 480 का हुआ है। जबकि परीक्षा 1603 ने परीक्षा दी थी। जिसमें से 531 बच्चे पास हुए थे।
खुले रहे अधिकतर स्कूल:-
शनिवार को निजी स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन ने स्कूलों को बंद रखने का ऐलान किया था। लेकिन सुबह के समय अधिकतर स्कूल खुले रहे। जबकि एसोसिएशन ने दावा किया कि दोपहर तक 95 प्रतिशत स्कूलों को बंद करवा दिया गया था। प्रधान रवि भूषण गर्ग ने बताया कि प्रदेश सरकार ने 134 ए के तहत जो ड्रा निकाला है हम उसके खिलाफ है।
सरकार 134 ए को खत्म करके आरटीई लागू करें। सरकार बच्चों को 2500 रूपये प्रति माह के हिसाब से एजूकेशन वाउचर उपलब्ध करवाए, ताकि बच्चा उस पैसे से अपने मर्जी के स्कूल से शिक्षा हासिल कर सके। जिले में कुल 200 से ज्यादा स्कूल बंद रहे।