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Panipat News: निरंकारी मिशन के सामूहिक विवाह में 126 नवयुगल परिणय सूत्र में बंधे
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संत निरंकारी मिशन के आध्यात्मिक स्थल पर परिणय सूत्र में बंधे 126 नव युगल। स्रोत : मिशन
- फोटो : Archive
समालखा (पानीपत)। समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के बाद वीरवार को एकत्व और सादगी का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज व निरंकारी राजपिता रमित की उपस्थिति में वीरवार को आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में 126 नवयुगल परिणय सूत्र में बंधे। इसमें न केवल देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से पहुंचे नवयुगल शामिल रहे। ये जानकारी संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिंद्र सुखीजा ने दी।
उन्होंने बताया कि समाज कल्याण विभाग के सहयोग से आयोजित इस समारोह में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा जैसे देशों से आए विदेशी नवयुगलों ने भी सहभागिता की। इसके साथ ही देश के 16 राज्यों हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के 126 जोड़ों ने एक साथ जीवन की नई शुरुआत की। विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और भौगोलिक सीमाओं को लांघकर एक मंडप के नीचे बंधने वाला यह आयोजन वैश्विक भाईचारे और समानता की अनूठी मिसाल बना।
निरंकारी लावों और जयमाला से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ पारंपरिक जयमाला व निरंकारी सांझा-हार से हुआ। संत निरंकारी मिशन की प्रधान राजकुमारी और कार्यकारिणी के अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने सभी नवविवाहित जोड़ों को सांझा-हार पहनाकर उनके सुखी दांपत्य जीवन की मंगलकामना की। इसके बाद भक्तिमय वातावरण में हिंदी में निरंकारी लावों का गायन किया गया, जिनमें गृहस्थ जीवन को आदर, विश्वास और समर्पण के साथ जीने के दिव्य संदेश समाहित थे। कार्यक्रम के अंत में सतगुरु माता व निरंकारी राजपिता ने सभी नवदंपतियों पर पुष्पवर्षा की और उन्हें सुख, शांति और आनंदमय जीवन के लिए आशीर्वाद दिया।
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सतगुरु माता ने एक-दूसरे के दो पंख बनकर उड़ने का दिया आशीर्वाद
सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने नवविवाहित जोड़ों को जीवन का मूल मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी को एक-दूसरे की जिम्मेदारियों को समान रूप से निभाते हुए प्रेम, विश्वास और बेहतर तालमेल के साथ आगे बढ़ना चाहिए। वे जीवन रूपी उड़ान में दोनों एक-दूसरे के दो पंख बनकर हर परिस्थिति का सामना करें। सतगुरु माता ने सेवा, सुमिरन और सत्संग के मार्ग पर दृढ़ रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विवाह जीवनभर निभाया जाने वाला एक पवित्र रिश्ता है। इसमें एक-दूसरे की कमियों को सहजता से स्वीकार करने, क्षमाशीलता और विनम्रता का भाव बनाए रखना अति आवश्यक है। दोनों परिवारों के प्रति परस्पर सम्मान और स्नेह ही इस रिश्ते को सुदृढ़ बनाता है।
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उन्होंने बताया कि समाज कल्याण विभाग के सहयोग से आयोजित इस समारोह में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा जैसे देशों से आए विदेशी नवयुगलों ने भी सहभागिता की। इसके साथ ही देश के 16 राज्यों हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के 126 जोड़ों ने एक साथ जीवन की नई शुरुआत की। विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और भौगोलिक सीमाओं को लांघकर एक मंडप के नीचे बंधने वाला यह आयोजन वैश्विक भाईचारे और समानता की अनूठी मिसाल बना।
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निरंकारी लावों और जयमाला से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ पारंपरिक जयमाला व निरंकारी सांझा-हार से हुआ। संत निरंकारी मिशन की प्रधान राजकुमारी और कार्यकारिणी के अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने सभी नवविवाहित जोड़ों को सांझा-हार पहनाकर उनके सुखी दांपत्य जीवन की मंगलकामना की। इसके बाद भक्तिमय वातावरण में हिंदी में निरंकारी लावों का गायन किया गया, जिनमें गृहस्थ जीवन को आदर, विश्वास और समर्पण के साथ जीने के दिव्य संदेश समाहित थे। कार्यक्रम के अंत में सतगुरु माता व निरंकारी राजपिता ने सभी नवदंपतियों पर पुष्पवर्षा की और उन्हें सुख, शांति और आनंदमय जीवन के लिए आशीर्वाद दिया।
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सतगुरु माता ने एक-दूसरे के दो पंख बनकर उड़ने का दिया आशीर्वाद
सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने नवविवाहित जोड़ों को जीवन का मूल मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी को एक-दूसरे की जिम्मेदारियों को समान रूप से निभाते हुए प्रेम, विश्वास और बेहतर तालमेल के साथ आगे बढ़ना चाहिए। वे जीवन रूपी उड़ान में दोनों एक-दूसरे के दो पंख बनकर हर परिस्थिति का सामना करें। सतगुरु माता ने सेवा, सुमिरन और सत्संग के मार्ग पर दृढ़ रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विवाह जीवनभर निभाया जाने वाला एक पवित्र रिश्ता है। इसमें एक-दूसरे की कमियों को सहजता से स्वीकार करने, क्षमाशीलता और विनम्रता का भाव बनाए रखना अति आवश्यक है। दोनों परिवारों के प्रति परस्पर सम्मान और स्नेह ही इस रिश्ते को सुदृढ़ बनाता है।

संत निरंकारी मिशन के आध्यात्मिक स्थल पर परिणय सूत्र में बंधे 126 नव युगल। स्रोत : मिशन- फोटो : Archive

संत निरंकारी मिशन के आध्यात्मिक स्थल पर परिणय सूत्र में बंधे 126 नव युगल। स्रोत : मिशन- फोटो : Archive