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Panchkula News: पिता और पति ने दुनिया छोड़ी तो बेटियों में देश सेवा का जज्बा जागा

Tue, 04 Feb 2025 01:43 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 04 Feb 2025 01:43 AM IST
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When father and husband left this world, the passion to serve the country awakened in daughters
भानू में करतब दिखाते आईटीबीपी के जवान। संवाद 
पंचकूला। पति और पिता ने दुनिया छोड़ी तो 44 सप्ताह की ट्रेनिंग पूरी कर तीन महिलाएं अब सरहद पर तैनात होकर देश की रक्षा करेंगी। सोमवार को आईटीबीपी भानू में 490वें दीक्षांत समारोह में इन महिलाओं के अलावा अन्य ने भी शपथ ग्रहण कर देश सेवा का संकल्प लिया। उत्तर प्रदेश की प्रीति, छत्तीसगढ़ की प्रतिमा और उत्तराखंड की कुसुम ने देश सेवा का संकल्प लिया है। प्रीति और प्रतिमा ने पति की मौत के बाद यह संकल्प लिया और जबकि उत्तराखंड की कुसुम ने पिता की मौत के बाद हिम वीरांगना बनने का फैसला लिया।
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परिजनों के सहयोग से पूरी की ट्रेनिंग
उत्तर प्रदेश की प्रीति ने बताया कि उनके पति की वर्ष 2021 में एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। इसके बाद छह साल के बेटे और परिवार को संभालने की जिम्मेदारी उन पर थी। परिवार के लोगों ने बच्चों को जिम्मेदारी उठाई और उन्होंने 44 सप्ताह का प्रशिक्षण हासिल कर हिम वीरांगना बन गईं। उन्होंने बताया कि 44 सप्ताह की ट्रेनिंग में उन्होंने जीवन के अनुशासन का पाठ सीखा है। इस दौरान जब भी बेटे की याद आई। वीडियो कॉलिंग कर बात की। इस दौरान वे कई बार भावुक हो गईं।
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ट्रेनिंग ने जीवन बदल दिया
छत्तीसगढ़ की रहने वाली प्रतिमा ने हिम वीरांगना बनने के बाद कहा कि ट्रेनिंग ने जीवन बदल दिया। उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान 18 घंटे प्रशिक्षण लिया। पति दिनेश कुमार की मौत के बाद मेरी मां ने मेरे पांच साल के बेटे को संभाला। उन्होंने हमेशा मेरा उत्साह बढ़ाया। इस कारण मैं इस मुकाम को हासिल कर पाई।
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पिता की वर्दी, सामान संभाल कर रखा है
उत्तराखंड की कुसुम ने बताया कि पिता दिनेश कुमार ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे। आज भी पिता की वर्दी संभाल कर रखी है। शहीद होने के बाद मेरे भाई और परिजनों ने मेरा उत्साह बढ़ाया। इसके बाद आईटीबीपी में बतौर कांस्टेबल ज्वाइन कर 44 सप्ताह की कड़ी मशक्कत से ट्रेनिंग पूरी की है।

अनुशासन के साथ जीना सीखा
कांस्टेबल सुधीर कुमार ने बताया कि ट्रेनिंग में अस्त्र चलाने के साथ जीवन में अनुशासन में रहने की सीख मिली है। यह मेरी जिंदगी का कभी न भूलने वाला पल है। इस हिसाब से मैं पूरे जीवन चलूंगा। इस ट्रेनिंग से मेरा जीवन बदल गया है।


सभी प्रकार के हथियार चलाने की ट्रेनिंग ली
कांस्टेबल कृष्ण कुमार ने बताया कि सभी प्रकार के हथियार चलाने की ट्रेनिंग ली है। इस दौरान देश की रक्षा की शपथ ली है। देश की रक्षा में अपना सर्वोत्तम योगदान दूंगा।
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