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Panchkula News: फूलों और फलों की पैदावार में आएगा क्रांतिकारी बदलाव, वैज्ञानिकों को मिली नई दिशा

Mon, 15 Sep 2025 10:18 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला Updated Mon, 15 Sep 2025 10:18 PM IST
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There will be a revolutionary change in the production of flowers and fruits, scientists have found a new direction
संवाद न्यूज एजेंसी
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लुधियाना। खेतीबाड़ी और बागबानी में उभरती चुनौतियों तथा नई संभावनाओं पर रोशनी डालते हुए नेशनल अकादमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (नास) की लुधियाना इकाई ने सोमवार को एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया।
विषय था बायोटेक्नोलॉजी और फ्लावर पावर। इस अवसर पर अमेरिका की कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एमेरिटस और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आणविक वैज्ञानिक डॉ. रजिंदर सिंह राणू मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद रहे। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. गुरदेव सिंह खुश इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट ब्रीडिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी के डॉ. दर्शन सिंह बराड़ संगोष्ठी हॉल में हुआ। मुख्य अतिथि थे पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के निदेशक शोध एवं नास की लुधियाना इकाई के संयोजक डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट। वहीं, इकाई के कोषाध्यक्ष डॉ. प्रवीण छुनेजा और संचालन कर रहे डॉ. गौरव कुमार तग्गड़ भी मौजूद रहे।
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डॉ. राणू ने फलों के पौधों में तनाव सहनशीलता बढ़ाने में जेनेटिक इंजीनियरिंग की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे वैज्ञानिक प्रयासों से पौधों की किस्मों को इस तरह विकसित किया जा सकता है कि वे विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार दें। उन्होंने फूलों की तुड़ाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और पौधों की गुणवत्ता में वृद्धि से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
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व्याख्यान के बाद वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों ने उनसे विस्तृत चर्चा की। इस संवाद में कई नए विचार और धारणाएं सामने आईं, जिनसे आगे के शोध कार्य को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट ने कहा कि मौजूदा समय में तनाव-रोधी किस्में विकसित करना कृषि वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
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