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सेक्टर-27 में बन रहे वृद्धाश्रम में प्रयोग हो रही घटिया सामग्री
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पंचकूला। सेक्टर-27 में 11 करोड़ की लागत से बन रहे वृद्धाश्रम में घटिया सामग्री और स्क्रैप सरिया का प्रयोग हो रहा है। इतना ही नहीं ठेकेदार द्वारा नियमों को ताक पर रखकर पीली ईंटों का प्रयोग किया जा रहा है। यह आरोप प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने लगाए हैं। उन्होंने इस मामले की जांच विजिलेंस से करवाने की मांग की है। चंद्रमोहन ने कहा वृद्धाश्रम में एक नंबर की ईंट लगनी चाहिए। उसकी जगह पर डेड नंबर ईंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। वाशिंग सेंड रेत की जगह मिट्टी वाले रेत का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे में बुजुर्गों का क्या हाल होगा जो इस वृद्धाश्रम रुकेंगे। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
शहर के बुजुर्गों को आशियाना देने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा सेक्टर-27 में एक वृद्धाश्रम बनाया जा रहा है। इसको बनाने का काम नगर निगम के जिम्मे है। जिस कंपनी को इस आश्रम को बनाने का काम दिया गया है, उसमें सही मटेरियल का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सैंपल फेल होते हैं तो ठेकेदार की कंपनी पर कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं जेई, एसडीओ पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जल्द ही इसके लिए एक टीम बनाई जाएगी, जो इस बारे में काम करेगी। पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने कहा के जिन ईंटों का इस्तेमाल किया गया है उन्हें छिपाने का काम किया जाता है। बिल्डिंग में अभी तक करीब 40 लाख ईंटों को लगाया गया है। ऐसे में इन्हें बिल्डिंग में लगाने के बाद उन पर सीमेंट को पानी में घोलकर लगा दिया जाता है। इसके बाद ग्रेड ए और थर्ड की ईंटों में कोई फर्क बता ही नहीं सकता है।
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शहर के बुजुर्गों को आशियाना देने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा सेक्टर-27 में एक वृद्धाश्रम बनाया जा रहा है। इसको बनाने का काम नगर निगम के जिम्मे है। जिस कंपनी को इस आश्रम को बनाने का काम दिया गया है, उसमें सही मटेरियल का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सैंपल फेल होते हैं तो ठेकेदार की कंपनी पर कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं जेई, एसडीओ पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जल्द ही इसके लिए एक टीम बनाई जाएगी, जो इस बारे में काम करेगी। पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने कहा के जिन ईंटों का इस्तेमाल किया गया है उन्हें छिपाने का काम किया जाता है। बिल्डिंग में अभी तक करीब 40 लाख ईंटों को लगाया गया है। ऐसे में इन्हें बिल्डिंग में लगाने के बाद उन पर सीमेंट को पानी में घोलकर लगा दिया जाता है। इसके बाद ग्रेड ए और थर्ड की ईंटों में कोई फर्क बता ही नहीं सकता है।
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