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Panchkula News: सीमा बनीं हरियाणा की पहली ग्रैपलिंग इंटरनेशनल महिला रेफरी
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मोरनी। मोरनी की सीमा देवी ने खेल जगत में पूरे देश को गौरवान्वित किया है। सीमा ने यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के अंतर्गत खेले जाने वाले ग्रैपलिंग खेल में इंटरनेशनल महिला रेफरी बनने का गौरव प्राप्त किया है। वह भारत की दूसरी और हरियाणा की पहली महिला इंटरनेशनल ग्रैपलिंग रेफरी बनी हैं।
सीमा ने 1 से 4 जून तक उज्बेकिस्तान के अंदीजान शहर में आयोजित इंटरनेशनल ग्रैपलिंग टूर्नामेंट में भाग लेते हुए रेफरी प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि से खेल जगत में हरियाणा के लिए एक नई उपलब्धि जुड़ गई है।
पारिवारिक संघर्ष और समर्थन बना ताकत
सीमा देवी का जन्म हरियाणा के मोरनी खंड के गांव सेहत में हुआ। उनके पिता इंदर सिंह एक साधारण किसान हैं, जिन्होंने बेटी को हमेशा बेटे की तरह पाला और हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाया। शादी के बाद सीमा अपने ससुराल गांव भूडी आईं, जहां ससुर मुल्तान सिंह ने भी उन्हें आगे बढ़ने के लिए भरपूर समर्थन दिया।
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सीमा कहती हैं कि मुझे बचपन से ही खेलों का शौक था, लेकिन रेफरी बनने का सपना तब देखा जब मुझे इस खेल की तकनीकी जानकारी मिली। मेरे परिवार ने मुझे कभी यह एहसास नहीं होने दिया कि मैं एक महिला हूं। उनके सहयोग ने ही मुझे यह मुकाम दिलाया है। वह चाहती हैं कि मोरनी के अन्य बच्चे भी खेलों में आगे आएं। फिलहाल वह गोहाना में अपने परिवार के साथ रहती है।
देश और राज्य के लिए बनी प्रेरणा
सीमा की इस सफलता पर उनके पिता इंदर सिंह ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह सिर्फ उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा और देश की जीत है। सीमा आज हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई है। अगर लड़कियों को सही अवसर और समर्थन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
खेल के विकास में निभाएंगी अहम भूमिका
सीमा अब ग्रैपलिंग खेल को देशभर में बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वह अन्य रेफरियों और कोचों के साथ मिलकर इस खेल के तकनीकी पक्ष को मजबूत करने, युवाओं को प्रशिक्षित करने और प्रतियोगिताओं के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मंचों के लिए तैयार करने का कार्य करेंगी। फिलहाल वह गोहाना में अपना ट्रैनिंग सेंटर भी चला रही है।
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सीमा ने 1 से 4 जून तक उज्बेकिस्तान के अंदीजान शहर में आयोजित इंटरनेशनल ग्रैपलिंग टूर्नामेंट में भाग लेते हुए रेफरी प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि से खेल जगत में हरियाणा के लिए एक नई उपलब्धि जुड़ गई है।
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पारिवारिक संघर्ष और समर्थन बना ताकत
सीमा देवी का जन्म हरियाणा के मोरनी खंड के गांव सेहत में हुआ। उनके पिता इंदर सिंह एक साधारण किसान हैं, जिन्होंने बेटी को हमेशा बेटे की तरह पाला और हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाया। शादी के बाद सीमा अपने ससुराल गांव भूडी आईं, जहां ससुर मुल्तान सिंह ने भी उन्हें आगे बढ़ने के लिए भरपूर समर्थन दिया।
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सीमा कहती हैं कि मुझे बचपन से ही खेलों का शौक था, लेकिन रेफरी बनने का सपना तब देखा जब मुझे इस खेल की तकनीकी जानकारी मिली। मेरे परिवार ने मुझे कभी यह एहसास नहीं होने दिया कि मैं एक महिला हूं। उनके सहयोग ने ही मुझे यह मुकाम दिलाया है। वह चाहती हैं कि मोरनी के अन्य बच्चे भी खेलों में आगे आएं। फिलहाल वह गोहाना में अपने परिवार के साथ रहती है।
देश और राज्य के लिए बनी प्रेरणा
सीमा की इस सफलता पर उनके पिता इंदर सिंह ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह सिर्फ उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा और देश की जीत है। सीमा आज हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई है। अगर लड़कियों को सही अवसर और समर्थन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
खेल के विकास में निभाएंगी अहम भूमिका
सीमा अब ग्रैपलिंग खेल को देशभर में बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वह अन्य रेफरियों और कोचों के साथ मिलकर इस खेल के तकनीकी पक्ष को मजबूत करने, युवाओं को प्रशिक्षित करने और प्रतियोगिताओं के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मंचों के लिए तैयार करने का कार्य करेंगी। फिलहाल वह गोहाना में अपना ट्रैनिंग सेंटर भी चला रही है।