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Panchkula News: सेवानिवृत सेना अधिकारियों ने अधिगृहित रिहायशी प्लाॅटों को एचएसवी से छुड़वाने की उठाई मांग
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पंचकूला। सेवानिवृत सेना अधिकारियों ने हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर एवं कालका की विधायक शक्ति रानी शर्मा को ज्ञापन देकर कालका-पिंजौर क्षेत्र में सशस्त्र बलों के कार्मिकों की अधिग्रहित रिहायशी प्लॉटों को हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एचएसवीपी) से छुड़वाने की मांग उठाई है।
सेवानिवृत सुशील कुमार, सुरिंद्र मोहन सोनी एवं अन्य ने मंत्री को बताया कि अनेक सशस्त्र बलों के वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मियों की विधिवत रजिस्ट्री से खरीदी गई रिहायशी भूमि को हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एचएसवीपी) द्वारा 1894 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अंतर्गत धोखे से अधिग्रहित कर लिया गया। ये प्लॉट आर्मी, नेवी, एयरफोर्स व पैरा मिलिट्री के कर्मियों द्वारा 1980, 1990 और 2000 के दशकों में वैधानिक रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदे गए थे। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सीडब्ल्यूपी 15150/2010 में इन्हें सुनियोजित कॉलोनी के रूप में मान्यता दी थी। अनेक सेवानिवृत्त सैनिकों ने सेवानिवृत्ति के बाद निर्माण कार्य भी आरंभ कर दिया था, जिसमें बाउंड्री वाल, सेप्टिक टैंक तथा नगर परिषद को जमा किए गए नक्शे शामिल हैं।
सुशील कुमार और एसएम सोनी ने बताया कि आज भी अनेक ऐसे प्लॉटों पर एचएसवीपी ने कब्जा नहीं लिया है, जिसे निदेशालय शहरी संपदाएं व निरीक्षण रिपोर्ट भी प्रमाणित करती हैं। यह स्थिति न केवल न्यायसंगत अधिकारों का हनन है बल्कि यह सशस्त्र बलों के कर्मियों के साथ किया गया एक खुला धोखा है, जिनमें से अधिकांश उस समय राष्ट्र की सेवा में लगे थे। उन्होंने मांग की कि जिन रिहायशी प्लाटों पर निर्माण अथवा रजिस्ट्री अधिसूचना से पूर्व थी उन्हें तत्काल छुड़वाया जाए।
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सेवानिवृत सुशील कुमार, सुरिंद्र मोहन सोनी एवं अन्य ने मंत्री को बताया कि अनेक सशस्त्र बलों के वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मियों की विधिवत रजिस्ट्री से खरीदी गई रिहायशी भूमि को हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एचएसवीपी) द्वारा 1894 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अंतर्गत धोखे से अधिग्रहित कर लिया गया। ये प्लॉट आर्मी, नेवी, एयरफोर्स व पैरा मिलिट्री के कर्मियों द्वारा 1980, 1990 और 2000 के दशकों में वैधानिक रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदे गए थे। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सीडब्ल्यूपी 15150/2010 में इन्हें सुनियोजित कॉलोनी के रूप में मान्यता दी थी। अनेक सेवानिवृत्त सैनिकों ने सेवानिवृत्ति के बाद निर्माण कार्य भी आरंभ कर दिया था, जिसमें बाउंड्री वाल, सेप्टिक टैंक तथा नगर परिषद को जमा किए गए नक्शे शामिल हैं।
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सुशील कुमार और एसएम सोनी ने बताया कि आज भी अनेक ऐसे प्लॉटों पर एचएसवीपी ने कब्जा नहीं लिया है, जिसे निदेशालय शहरी संपदाएं व निरीक्षण रिपोर्ट भी प्रमाणित करती हैं। यह स्थिति न केवल न्यायसंगत अधिकारों का हनन है बल्कि यह सशस्त्र बलों के कर्मियों के साथ किया गया एक खुला धोखा है, जिनमें से अधिकांश उस समय राष्ट्र की सेवा में लगे थे। उन्होंने मांग की कि जिन रिहायशी प्लाटों पर निर्माण अथवा रजिस्ट्री अधिसूचना से पूर्व थी उन्हें तत्काल छुड़वाया जाए।
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