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Panchkula News: हिमालयी आपदाओं में अब राहत नहीं, पहले तैयारी पर जोर
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भारी बारिश, ग्लेशियल झील फटने और हाईवे हादसों पर मंथन
स्थानीय भाषा में अलर्ट और एजेंसियों के बेहतर तालमेल पर जोर
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। हिमालयी क्षेत्रों में बदलते आपदा स्वरूप से निपटने के लिए अब राहत और बचाव के साथ पहले से तैयारी, जोखिम आकलन और समय रहते चेतावनी पर जोर दिया जा रहा है। भारी बारिश, ग्लेशियल झील फटने, हाईवे हादसों और लगातार आने वाली आपदाओं से निपटने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी बताया गया। स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में समय रहते चेतावनी पहुंचाने को भी प्रभावी आपदा प्रबंधन का अहम हिस्सा बताया गया।
आईटीबीपी, एनआईटीएसआरडीआर और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से आयोजित दो दिवसीय एकीकृत आपदा प्रबंधन संगोष्ठी का शुभारंभ पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की मौजूदगी में हुआ। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष कृष्ण एस. वत्स विशेष अतिथि रहे।
स्थानीय भाषा में पहुंचेगा आपदा अलर्ट
विशेषज्ञों ने बताया कि आपदा प्रबंधन अब केवल घटना के बाद राहत और प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं है। पूर्व तैयारी, जोखिम आकलन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर तत्काल चेतावनी भेजने की व्यवस्था को प्रभावी चेतावनी तंत्र का अहम हिस्सा बताया गया। एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया नियंत्रण कक्ष के माध्यम से वास्तविक समय में चेतावनी, राहत-बचाव कार्यों की निगरानी और घटनाओं की रिपोर्टिंग को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय आपदा आपात प्रबंधन पोर्टल से मौजूदा स्थिति, शुरुआती चेतावनी और पुराने आंकड़ों के इस्तेमाल की जानकारी भी दी गई।
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ग्लेशियल झील फटना और लगातार आपदाएं चुनौती
संगोष्ठी में अत्यधिक भारी बारिश, लगातार होने वाली आपदाओं और राजमार्ग दुर्घटनाओं को प्रमुख चुनौती बताया गया। ग्लेशियल झील फटने जैसी उभरती आपदाओं तथा सिक्किम और ऋषिगंगा बिजली परियोजना की घटनाओं से मिले अनुभवों पर चर्चा हुई। विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए सरकार के सभी विभागों को साथ लेकर काम करने पर जोर दिया गया। आपदा मित्र योजना के विस्तार और अभ्यासों के जरिये समुदाय की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने की जरूरत भी बताई गई।
जनहानि कम करने में जनभागीदारी जरूरी : कटारिया
गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि संगोष्ठी से सामने आए अनुभवों और निष्कर्षों का संबंधित संस्थान आपसी समन्वय से उपयोग करें। इससे भविष्य के लिए बेहतर आपदा प्रबंधन की रूपरेखा और नई रणनीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी। आपदा के दौरान जनहानि कम करने के लिए हरसंभव प्रयास और अधिक से अधिक जनभागीदारी जरूरी है।
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स्थानीय भाषा में अलर्ट और एजेंसियों के बेहतर तालमेल पर जोर
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। हिमालयी क्षेत्रों में बदलते आपदा स्वरूप से निपटने के लिए अब राहत और बचाव के साथ पहले से तैयारी, जोखिम आकलन और समय रहते चेतावनी पर जोर दिया जा रहा है। भारी बारिश, ग्लेशियल झील फटने, हाईवे हादसों और लगातार आने वाली आपदाओं से निपटने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी बताया गया। स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में समय रहते चेतावनी पहुंचाने को भी प्रभावी आपदा प्रबंधन का अहम हिस्सा बताया गया।
आईटीबीपी, एनआईटीएसआरडीआर और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से आयोजित दो दिवसीय एकीकृत आपदा प्रबंधन संगोष्ठी का शुभारंभ पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की मौजूदगी में हुआ। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष कृष्ण एस. वत्स विशेष अतिथि रहे।
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स्थानीय भाषा में पहुंचेगा आपदा अलर्ट
विशेषज्ञों ने बताया कि आपदा प्रबंधन अब केवल घटना के बाद राहत और प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं है। पूर्व तैयारी, जोखिम आकलन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर तत्काल चेतावनी भेजने की व्यवस्था को प्रभावी चेतावनी तंत्र का अहम हिस्सा बताया गया। एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया नियंत्रण कक्ष के माध्यम से वास्तविक समय में चेतावनी, राहत-बचाव कार्यों की निगरानी और घटनाओं की रिपोर्टिंग को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय आपदा आपात प्रबंधन पोर्टल से मौजूदा स्थिति, शुरुआती चेतावनी और पुराने आंकड़ों के इस्तेमाल की जानकारी भी दी गई।
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ग्लेशियल झील फटना और लगातार आपदाएं चुनौती
संगोष्ठी में अत्यधिक भारी बारिश, लगातार होने वाली आपदाओं और राजमार्ग दुर्घटनाओं को प्रमुख चुनौती बताया गया। ग्लेशियल झील फटने जैसी उभरती आपदाओं तथा सिक्किम और ऋषिगंगा बिजली परियोजना की घटनाओं से मिले अनुभवों पर चर्चा हुई। विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए सरकार के सभी विभागों को साथ लेकर काम करने पर जोर दिया गया। आपदा मित्र योजना के विस्तार और अभ्यासों के जरिये समुदाय की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने की जरूरत भी बताई गई।
जनहानि कम करने में जनभागीदारी जरूरी : कटारिया
गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि संगोष्ठी से सामने आए अनुभवों और निष्कर्षों का संबंधित संस्थान आपसी समन्वय से उपयोग करें। इससे भविष्य के लिए बेहतर आपदा प्रबंधन की रूपरेखा और नई रणनीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी। आपदा के दौरान जनहानि कम करने के लिए हरसंभव प्रयास और अधिक से अधिक जनभागीदारी जरूरी है।