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दोबारा जांच से खत्म नहीं हो सकती बरी होने की कार्रवाई: हाईकोर्ट

Wed, 02 Sep 2026 11:25 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2026 11:25 PM IST
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Re-investigation cannot undo acquittal: High Court
रोक के बावजूद ट्रायल कोर्ट ने सुनाया था फैसला, तीन आरोपियों को किया था बरी
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हाईकोर्ट ने दोबारा समन करने की मांग ठुकराई
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी आरोपी को अदालत पहले ही बरी कर चुकी है तो दोबारा जांच के आधार पर उसे फिर से आरोपी नहीं बनाया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि बरी करने के फैसले को पहले सक्षम अदालत से निरस्त कराना होगा। केवल दोबारा जांच का आदेश पुराने बरी के फैसले को अपने आप खत्म नहीं करता।
यह मामला तरनतारन निवासी सलविंदर के बेटे गुरजंट सिंह की हत्या से जुड़ा है। कथित तौर पर हथियारबंद भीड़ ने उनकी हत्या कर दी थी। शिकायतकर्ता ने जांच पर लगातार सवाल उठाए थे। उसने आरोप लगाया था कि जांच सही नहीं हुई और गवाहों पर दबाव बनाया गया। परिवार को धमकियां मिलने की बात भी कही गई थी। हाईकोर्ट ने मामले की जांच की निगरानी की और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्तर पर जांच के निर्देश दिए।
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निचली अदालत का फैसला :
31 जुलाई 2018 को हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा अंतिम फैसला सुनाने पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद तरनतारन की अदालत ने 4 अगस्त 2018 को तीन आरोपियों को बरी कर दिया। ये आरोपी गुरदेव सिंह, स्टालिनजीत सिंह और गुरचरण सिंह थे। 6 दिसंबर 2019 को हाईकोर्ट ने नए सिरे से जांच का आदेश दिया। शिकायतकर्ता ने इसी आधार पर तीनों आरोपियों को फिर से अदालत में बुलाने की मांग की थी, जिसे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, तरनतारन ने खारिज कर दिया।
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